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September 19, 2026, 12:00 am

सरोगेसी और टेस्ट ट्यूब बेबी में क्या अंतर है सरल शब्दों में बताएं?

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Deverra IVF and Center for Reproductive Medicine ✓ Verified doctor
19 September 2026

सरल शब्दों में समझें तो टेस्ट ट्यूब बेबी (IVF) गर्भधारण कराने की एक चिकित्सीय प्रक्रिया है, जबकि सरोगेसी में गर्भधारण के लिए किसी अन्य महिला की मदद ली जाती है। टेस्ट ट्यूब बेबी में महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु को लैब में मिलाकर भ्रूण (embryo) तैयार किया जाता है, जिसे बाद में महिला के अपने ही गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है और वह स्वयं बच्चे को जन्म देती है।

वहीं सरोगेसी में, जब महिला किसी गंभीर चिकित्सीय कारण या गर्भाशय की समस्या से गर्भधारण करने में असमर्थ होती है, तब आईवीएफ द्वारा तैयार भ्रूण किसी अन्य महिला (सरोगेट मदर) के गर्भाशय में रखा जाता है। वह नौ महीने बच्चे को अपनी कोख में पालती है। आपकी स्थिति के अनुसार सही मार्गदर्शन के लिए फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

For more, see क्या एम्स में आईवीएफ फ्री है?; consult Deverra IVF and Center for Reproductive Medicine; reference: WHO guidance on infertility.

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Milann Fertility Centre - Kumara Park ✓ Verified doctor
19 September 2026

टेस्ट ट्यूब बेबी और सरोगेसी में मुख्य अंतर इस बात का है कि गर्भ कौन धारण कर रहा है। टेस्ट ट्यूब बेबी या आईवीएफ में महिला के अंडे और पुरुष के स्पर्म को लैब में फर्टिलाइज करके भ्रूण बनाया जाता है। इसके बाद भ्रूण को स्वयं उसी महिला के गर्भाशय में डाला जाता है, जिससे वह खुद गर्भवती होती है और प्रसव करती है।

दूसरी ओर, सरोगेसी की जरूरत तब पड़ती है जब महिला का गर्भाशय गर्भधारण के लिए चिकित्सकीय रूप से सक्षम नहीं होता। इस प्रक्रिया में भ्रूण तो आईवीएफ तकनीक से ही तैयार होता है, लेकिन उसे किसी दूसरी महिला (सरोगेट) के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। भारत के नियमों के अनुसार सरोगेसी केवल विशिष्ट चिकित्सकीय कारणों पर ही संभव है। व्यक्तिगत सलाह के लिए अपने डॉक्टर से मिलें।

For more, see क्या एम्स में आईवीएफ फ्री है?; consult Milann Fertility Centre - Kumara Park; reference: WHO guidance on infertility.

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Cocoon Fertility IVF Centre ✓ Verified doctor
19 September 2026

अक्सर लोग टेस्ट ट्यूब बेबी और सरोगेसी को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में बड़ा अंतर है। टेस्ट ट्यूब बेबी (IVF) एक सहायक प्रजनन तकनीक है। इसमें निषेचन शरीर के बाहर लैब में होता है और तैयार भ्रूण को मां के अपने गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। यानी मां खुद नौ महीने तक बच्चे को गर्भ में रखती है।

सरोगेसी तब चुनी जाती है जब महिला गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण खुद गर्भधारण नहीं कर सकती। इसमें आईवीएफ से बना भ्रूण किसी अन्य महिला के गर्भाशय में रखा जाता है, जो बच्चे को जन्म देती है। जन्म के बाद बच्चा कानूनी तौर पर माता-पिता का ही होता है। अपनी चिकित्सीय स्थिति के अनुसार सही विकल्प चुनने के लिए फर्टिलिटी डॉक्टर से संपर्क करें।

For more, see क्या एम्स में आईवीएफ फ्री है?; consult Cocoon Fertility IVF Centre; reference: WHO guidance on infertility.

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Morpheus Meenakshi International IVF center ✓ Verified doctor
19 September 2026

टेस्ट ट्यूब बेबी और सरोगेसी को समझना बहुत आसान है। टेस्ट ट्यूब बेबी (IVF) प्रक्रिया में निषेचन लैब की डिश में कराया जाता है, और फिर उस भ्रूण को महिला के अपने गर्भाशय में स्थापित किया जाता है। इसमें महिला खुद गर्भावस्था का पूरा अनुभव करती है और शिशु को जन्म देती है।

सरोगेसी में भी आईवीएफ तकनीक का ही इस्तेमाल होता है, लेकिन भ्रूण को एक अन्य महिला (सरोगेट मदर) की कोख में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह विकल्प तब चुना जाता है जब गर्भाशय से जुड़ी गंभीर जटिलताओं या अन्य बीमारियों के कारण महिला स्वयं गर्भधारण करने में असमर्थ हो। भारत में सरोगेसी के नियम बहुत स्पष्ट और नियंत्रित हैं। आपके लिए कौन-सा उपचार उचित है, यह जानने के लिए प्रजनन विशेषज्ञ से जांच करवाएं।

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Dr. Senthamarai Selvi ✓ Verified doctor
19 September 2026

एक फर्टिलिटी विशेषज्ञ के रूप में मैं यही समझाती हूँ कि आईवीएफ (टेस्ट ट्यूब बेबी) एक तकनीक है और सरोगेसी उसका एक विशेष विकल्प है। टेस्ट ट्यूब बेबी में अंडाणु और शुक्राणु का मिलन लैब में कराकर भ्रूण को स्वयं महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। इसमें महिला स्वयं मां बनती है और प्रसव करती है।

यदि किसी महिला का गर्भाशय अनुपस्थित हो, अस्वस्थ हो या बार-बार गर्भपात हो रहा हो, तब सरोगेसी की सलाह दी जाती है। सरोगेसी में भ्रूण को एक सरोगेट माता के गर्भाशय में रखा जाता है, जो उस बच्चे को जन्म देने तक संभालती है। दोनों ही पद्धतियों का उद्देश्य आपको संतान सुख देना है। अपने मेडिकल इतिहास के आधार पर सही निर्णय लेने के लिए डॉक्टर से परामर्श लें।

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