सरोगेसी (Surrogacy) का सीधा सा मतलब है किसी अन्य महिला द्वारा आपके बच्चे को 9 महीने अपने गर्भ में रखना। जब किसी मेडिकल समस्या या गर्भाशय की कमजोरी की वजह से कोई महिला खुद गर्भधारण नहीं कर सकती, तब यह विकल्प अपनाया जाता है।
इस प्रक्रिया में IVF तकनीक का इस्तेमाल होता है। होने वाले माता-पिता के अंडे (egg) और शुक्राणु (sperm) से लैब में भ्रूण (embryo) तैयार किया जाता है और उसे सरोगेट मदर के गर्भाशय में प्रत्यारोपित (transfer) कर दिया जाता है। भारत में यह प्रक्रिया कानूनी नियमों (Surrogacy Act) के तहत ही की जाती है। अपनी स्थिति के अनुसार सही मार्गदर्शन के लिए फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
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सरोगेसी एक ऐसी प्रजनन विधि है जिसमें एक महिला (सरोगेट मदर) किसी अन्य निःसंतान दंपत्ति के बच्चे को जन्म देती है। आज के समय में मुख्य रूप से जेस्टेशनल सरोगेसी की जाती है।
इसमें IVF के माध्यम से इच्छुक माता-पिता के एग और स्पर्म को मिलाकर भ्रूण बनाया जाता है, जिसे सरोगेट के गर्भ में विकसित होने के लिए ट्रांसफर किया जाता है। जन्म लेने वाले बच्चे का आनुवंशिक (genetic) संबंध माता-पिता से ही होता है। यदि आप गर्भाशय संबंधी किसी जटिलता या बार-बार मिसकैरेज की समस्या से जूझ रहे हैं, तो किसी मान्यता प्राप्त फर्टिलिटी विशेषज्ञ के पास जाकर मेडिकल और कानूनी पहलुओं की पूरी जांच व सलाह ले सकते हैं।
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आम बोलचाल में सरोगेसी का अर्थ है जब कोई महिला किसी ऐसे दंपत्ति की खातिर बच्चा अपनी कोख में पालती है, जो चिकित्सीय कारणों से स्वयं गर्भधारण करने में असमर्थ हैं।
यह प्रक्रिया IVF के जरिए होती है। पहले माता-पिता के एग्स और स्पर्म का लैब में निषेचन (fertilization) कराकर भ्रूण तैयार किया जाता है। इसके बाद उस भ्रूण को सरोगेट के गर्भाशय में रखा जाता है। पूरे नौ महीने सरोगेट मां बच्चे की देखरेख करती है और डिलीवरी के बाद बच्चा जैविक माता-पिता को मिल जाता है। भारत के सरोगेसी नियमों और अपनी व्यक्तिगत मेडिकल स्थिति को सही से समझने के लिए डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लेना आवश्यक है।
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सरोगेसी एक मेडिकल समाधान है उन दंपत्तियों के लिए जिनका गर्भाशय किसी बीमारी से प्रभावित हो या जहां बार-बार IVF असफल हो चुका हो। साधारण शब्दों में कहें तो इसमें एक स्वस्थ महिला दूसरे दंपत्ति के बच्चे को अपने गर्भ में धारण करती है।
इसकी प्रक्रिया में पति के स्पर्म और पत्नी के एग से IVF तकनीक द्वारा लैब में भ्रूण बनाया जाता है। फिर सरोगेट मदर की बच्चेदानी को दवाओं से तैयार करके उस भ्रूण को प्रत्यारोपित किया जाता है। पॉजिटिव प्रेगनेंसी टेस्ट के बाद डिलीवरी तक नियमित जांच की जाती है। यह एक संवेदनशील और कानूनी प्रक्रिया है, इसलिए किसी अनुभवी प्रजनन विशेषज्ञ से मिलकर ही आगे का निर्णय लें।
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सरोगेसी का सरल अर्थ है गर्भधारण में किसी दूसरी महिला (सरोगेट मदर) का सहयोग लेना। यह उन मामलों में सुझाई जाती है जहां महिला के स्वास्थ्य को प्रेगनेंसी से गंभीर खतरा हो या गर्भाशय अनुपस्थित हो।
यह मुख्य रूप से IVF के माध्यम से की जाती है। माता-पिता के स्पर्म और एग से लैब में भ्रूण तैयार होता है, इसलिए बच्चे का डीएनए माता-पिता का ही होता है। इस भ्रूण को सरोगेट के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है और डिलीवरी तक उसकी पूरी चिकित्सकीय देखरेख की जाती है। भारत के कानून के तहत इसके स्पष्ट नियम हैं। अपनी मेडिकल स्थिति और पात्रता जानने के लिए किसी फर्टिलिटी विशेषज्ञ से विस्तृत सलाह लें।
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20 August 2026