बच्चेदानी में गांठ क्यों होती है | कारण और लक्षण | इलाज के उपाय
बच्चेदानी में गांठ एक आम समस्या है जिससे आज लाखों महिलाएं जूझ रही हैं। मेडिकल भाषा में इसे यूटरिन फाइब्रॉइड (Uterine Fibroids) या सिस्ट कहा जाता है। यह गांठें प्रजनन अंगों की मांसपेशियों या ऊतकों में असामान्य रूप से वृद्धि के कारण बनती हैं। हालांकि अधिकतर मामलों में ये गांठें कैंसरयुक्त नहीं होतीं, लेकिन यदि समय पर इलाज न हो, तो यह महिला की प्रजनन क्षमता और सामान्य जीवन को प्रभावित कर सकती है।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि बच्चेदानी में गांठ क्यों होती है, इसके क्या लक्षण और कारण हैं, इलाज के विकल्प क्या हैं, और इससे बचाव के घरेलू उपाय कौन-से हैं।
यदि आपके गर्भाशय में फाइब्रॉइड यानी गांठें हैं और गर्भधारण में बार-बार परेशानी हो रही है, जैसे मिसकैरेज या IVF फेल होना, तो सरोगेसी एक बेहतर विकल्प हो सकता है। भारत में सरोगेसी की लागत और बैंगलोर में सरोगेसी की लागत जानें और सही उपचार का चयन करें।
बच्चेदानी में गांठ क्या होती है?
बच्चेदानी यानी गर्भाशय एक महिला का महत्वपूर्ण प्रजनन अंग है। जब इसमें मांसपेशियों या टिशू की परतें असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, तो उसे गांठ या फाइब्रॉइड कहा जाता है। ये गांठें एक या एक से अधिक संख्या में हो सकती हैं, और इनका आकार बहुत छोटा से लेकर बड़ा तक हो सकता है।
बच्चेदानी में गांठ होने के मुख्य कारण
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हार्मोनल असंतुलन:
एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन की अधिकता से गर्भाशय की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ सकती हैं। -
अनुवांशिक कारण:
परिवार में पहले से किसी को यह समस्या होने पर इसकी संभावना बढ़ जाती है। -
मोटापा और खराब जीवनशैली:
अधिक वजन और असंतुलित खानपान हार्मोन असंतुलन को बढ़ाते हैं। -
मासिक धर्म की जल्दी शुरुआत:
जिन महिलाओं को कम उम्र में पीरियड शुरू हो जाते हैं, उनमें फाइब्रॉइड की संभावना अधिक होती है।
बच्चेदानी में गांठ के लक्षण
हर महिला में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सामान्यतः निम्नलिखित संकेत देखे जाते हैं:
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लंबे समय तक और भारी मासिक धर्म
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पेट के निचले हिस्से में दर्द या सूजन
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बार-बार पेशाब आना
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थकान और कमजोरी (खून की कमी के कारण)
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गर्भधारण में समस्या या बार-बार गर्भपात
बच्चेदानी में गांठ का इलाज
बच्चेदानी में गांठ का इलाज महिला की उम्र, गांठ के आकार, संख्या, लक्षणों की गंभीरता और गर्भधारण की इच्छा पर निर्भर करता है। इलाज के कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिन्हें डॉक्टर की सलाह और महिला की जरूरत के अनुसार अपनाया जाता है।
1. दवाइयों द्वारा इलाज
शुरुआती और हल्के मामलों में दवाओं से गांठ को नियंत्रित किया जा सकता है:
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हार्मोन संतुलन करने वाली दवाएं:
ये दवाएं एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन को नियंत्रित करती हैं, जिससे गांठ के आकार को बढ़ने से रोका जा सकता है। -
आयरन सप्लीमेंट्स:
अत्यधिक मासिक रक्तस्राव के कारण होने वाली एनीमिया (खून की कमी) को दूर करने के लिए दी जाती हैं।
2. सर्जरी द्वारा इलाज
जब गांठ का आकार बड़ा हो जाए या लक्षण गंभीर हो, तो सर्जरी की सलाह दी जाती है:
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मायोमेक्टॉमी (Myomectomy):
इस प्रक्रिया में केवल गांठ को हटाया जाता है, बच्चेदानी सुरक्षित रहती है। यह उन महिलाओं के लिए उपयुक्त है जो भविष्य में गर्भधारण करना चाहती हैं। -
हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy):
इस ऑपरेशन में पूरी बच्चेदानी हटा दी जाती है। यह विकल्प तब चुना जाता है जब गांठें बहुत अधिक हो जाएं और महिला को और संतान की आवश्यकता न हो। -
यूटराइन आर्टरी एम्बोलाइज़ेशन (UAE):
इसमें गांठ तक खून की आपूर्ति बंद कर दी जाती है, जिससे वह धीरे-धीरे सिकुड़ जाती है। -
फोकस्ड अल्ट्रासाउंड सर्जरी (FUS):
यह एक आधुनिक, बिना चीरे वाली तकनीक है, जिसमें MRI की सहायता से अल्ट्रासाउंड तरंगों द्वारा गांठ को खत्म किया जाता है।
3. आयुर्वेदिक और वैकल्पिक इलाज
प्राचीन आयुर्वेद में भी बच्चेदानी में गांठ के लिए कई जड़ी-बूटियाँ और औषधियाँ वर्णित हैं:
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कांचनार गुग्गुलु:
गांठ और ट्यूमर जैसी वृद्धि को कम करने में सहायक -
अशोक चूर्ण:
गर्भाशय की मांसपेशियों को संतुलित करता है और पीरियड्स नियमित करता है -
त्रिफला:
शरीर की शुद्धि और पाचन सुधारने वाला -
कुमार्य आसव:
हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में उपयोगी
आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन केवल प्रमाणित वैद्य या डॉक्टर की सलाह से ही करें।
4. होम्योपैथिक इलाज
होम्योपैथी में उपचार व्यक्ति की संपूर्ण मानसिक और शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाता है। इसमें कुछ विशेष दवाएं निम्नलिखित हैं:
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Calcarea Carb:
जब गांठ के साथ थकान, कमजोरी और बार-बार पसीना आने की शिकायत हो -
Sepia:
जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अत्यधिक दर्द और चिड़चिड़ापन हो -
Fraxinus Americana:
बच्चेदानी की मांसपेशियों में सूजन और भारीपन की स्थिति में उपयोगी
बच्चेदानी में गांठ हो तो क्या खाना चाहिए?
सही खानपान से भी बच्चेदानी में गांठ के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है:
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हरी सब्जियाँ (पालक, ब्रोकली)
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आयरन युक्त आहार (अनार, गुड़, चुकंदर)
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फाइबर से भरपूर खाद्य (फल, ओट्स, साबुत अनाज)
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हल्दी, आंवला और तुलसी
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नींबू और विटामिन C युक्त फल
बच्चेदानी में गांठ होने पर क्या नहीं खाना चाहिए?
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तला-भुना और ऑयली खाना
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प्रोसेस्ड फूड और फास्ट फूड
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अधिक मिठाई और चीनी
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ज्यादा डेयरी उत्पाद
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सोया प्रोडक्ट्स और कैफीन
बच्चेदानी में गांठ के ऑपरेशन का खर्च
भारत में बच्चेदानी में गांठ के ऑपरेशन का खर्च विभिन्न फैक्टर्स पर निर्भर करता है:
इलाज का प्रकार |
अनुमानित खर्च (₹) |
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मायोमेक्टॉमी |
₹40,000 – ₹80,000 |
हिस्टेरेक्टॉमी |
₹60,000 – ₹1,50,000 |
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी |
₹1,00,000 – ₹2,50,000 |
सरकारी अस्पताल |
₹0 – ₹10,000 (न्यूनतम) |
बीमा और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से यह खर्च और भी कम हो सकता है।
Source:
https://www.icmr.gov.in/icmrobject/uploads/STWs/1725952341_obg_fibroid_polyps.pdf
https://www.fda.gov/consumers/womens-health-topics/uterine-fibroids
निष्कर्ष
बच्चेदानी में गांठ एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य समस्या है। अगर समय रहते सही जांच और इलाज कर लिया जाए तो महिला की सेहत और प्रजनन क्षमता दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। सही जीवनशैली, नियमित जांच और संतुलित आहार से इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। अगर आप किसी भी तरह के लक्षण अनुभव कर रही हैं, तो डॉक्टर से परामर्श ज़रूर लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. क्या बच्चेदानी में गांठ कैंसर बन सकती है?
अधिकतर फाइब्रॉइड गैर-कैंसरयुक्त होते हैं, लेकिन यदि गांठ तेज़ी से बढ़ रही हो या असामान्य लक्षण हों, तो बायोप्सी ज़रूरी है।
Q2. क्या बच्चेदानी में गांठ होने से गर्भधारण में दिक्कत आती है?
हाँ, कुछ मामलों में बच्चेदानी में गांठ गर्भधारण में बाधा बन सकती है या बार-बार गर्भपात का कारण बन सकती है। यदि आप गर्भधारण की योजना बना रही हैं और आपको फाइब्रॉइड की समस्या है, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें।
Q3. क्या बच्चेदानी में गांठ का इलाज बिना ऑपरेशन के संभव है?
जी हाँ, अगर गांठ छोटी है और लक्षण गंभीर नहीं हैं, तो दवाओं, आयुर्वेद, होम्योपैथी या लाइफस्टाइल बदलावों से भी इलाज किया जा सकता है। लेकिन बड़ी या तेजी से बढ़ती गांठ के लिए ऑपरेशन ज़रूरी हो सकता है।
Q4. बच्चेदानी में गांठ के लिए कौन-कौन सी जांच जरूरी होती है?
बच्चेदानी में गांठ की पुष्टि के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित जांचें की जाती हैं:
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पेल्विक अल्ट्रासाउंड (Pelvic Ultrasound)
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MRI स्कैन (यदि गांठ जटिल हो)
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बायोप्सी (अगर कैंसर का संदेह हो)
Q5. क्या बच्चेदानी में गांठ का इलाज आयुर्वेद या होम्योपैथी से हो सकता है?
हां, आयुर्वेद और होम्योपैथी में बच्चेदानी की गांठ के लिए कई कारगर उपाय हैं, जैसे कांचनार गुग्गुलु, अशोक चूर्ण, या Sepia जैसी दवाएं। लेकिन इनका सेवन अनुभवी चिकित्सक की सलाह से ही करें, क्योंकि हर महिला की स्थिति अलग होती है।
Q6. बच्चेदानी में गांठ को घरेलू उपायों से कैसे नियंत्रित करें?
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हरी सब्जियाँ, आयरन युक्त फल, हल्दी और आंवला लें
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प्रोसेस्ड फूड, तला-भुना खाना और कैफीन से बचें
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योग, प्राणायाम और तनाव नियंत्रण भी मददगार हैं
हालांकि घरेलू उपायों से लक्षणों में राहत मिल सकती है, पर इलाज के लिए डॉक्टर से परामर्श ज़रूरी है।
Q7. क्या बच्चेदानी की गांठ बार-बार हो सकती है?
हाँ, कुछ महिलाओं में फाइब्रॉइड हटाने के बाद भी दोबारा गांठ बन सकती है, खासकर यदि हार्मोनल असंतुलन बना रहे। इसलिए इलाज के बाद नियमित जांच और जीवनशैली में सुधार आवश्यक होता है।