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शुगर के घरेलू उपाय | मधुमेह का इलाज बिना दवा के

शुगर के घरेलू उपाय | मधुमेह का इलाज बिना दवा के

Gynecologist & IVF Specialist, Vinsfertility Hospital 18+ Years Experience • 1,000+ Successful Live Births

भारत में मधुमेह (Diabetes) एक प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। International Diabetes Federation (IDF) के अनुसार, 2021 में भारत में 74.2 मिलियन मधुमेह रोगी थे[1]। यह दस्तावेज़ सरकारी स्रोतों और वैज्ञानिक शोध पर आधारित घरेलू उपायों की संपूर्ण जानकारी प्रदान करता है, जिसमें आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां, योग, प्राणायाम, आहार प्रबंधन और जीवनशैली में बदलाव शामिल हैं।
महत्वपूर्ण नोट: ये घरेलू उपाय चिकित्सकीय सलाह के पूरक हैं, विकल्प नहीं। किसी भी नए उपाय को शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।

डायबिटीज केवल ब्लड शुगर तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि यह हार्मोनल संतुलन और प्रजनन स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है। अनियंत्रित शुगर लेवल के कारण महिलाओं में ओव्यूलेशन अनियमित हो सकता है और गर्भधारण में कठिनाई आ सकती है। यदि लंबे समय तक शुगर नियंत्रण और उपचार के बावजूद प्रेग्नेंसी संभव नहीं हो पा रही है, तो उन्नत प्रजनन विकल्प जैसे सरोगेसी सहायक साबित हो सकते हैं। ऐसे में भारत में सरोगेसी की लागत और बैंगलोर में सरोगेसी की लागत के बारे में जानकारी लेना और सही क्लिनिक का चयन करना उपयोगी हो सकता है।

विषय-सूची (Table of Contents)

  1. मधुमेह क्या है? (Understanding Diabetes)

  2. भारत सरकार की पहल और योजनाएं (Government Initiatives)

  3. आयुर्वेदिक घरेलू उपाय (Ayurvedic Home Remedies)

  4. योग और प्राणायाम (Yoga & Pranayama)

  5. आहार प्रबंधन और ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Diet Management)

  6. जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Modifications)

  7. वैज्ञानिक प्रमाण और अध्ययन (Scientific Evidence)

  8. सावधानियां और चेतावनी (Precautions)

  9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  10. संदर्भ (References)


1. मधुमेह क्या है? (Understanding Diabetes)

1.1 परिभाषा (Definition)

मधुमेह (Diabetes Mellitus) एक चयापचय विकार है जिसमें रक्त में शर्करा (glucose) का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। यह तब होता है जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सही प्रतिक्रिया नहीं देतीं[2]।

1.2 निदान मानदंड (Diagnostic Criteria)

ICMR (Indian Council of Medical Research) के अनुसार टाइप 2 मधुमेह का निदान निम्नलिखित मानदंडों से किया जाता है[3]:

परीक्षण

मधुमेह का स्तर

फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज

 126 mg/dL

2-घंटे प्लाज्मा ग्लूकोज (OGTT)

 200 mg/dL

HbA1c (ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन)

 6.5% (48 mmol/mol)

रैंडम प्लाज्मा ग्लूकोज (लक्षणों के साथ)

 200 mg/dL


Table 1: मधुमेह निदान मानदंड (ICMR Guidelines)

1.3 प्रकार (Types)

  • टाइप 1 डायबिटीज: अग्न्याशय इंसुलिन नहीं बनाता

  • टाइप 2 डायबिटीज: शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता (90-95% मामले)

  • गर्भावधि मधुमेह: गर्भावस्था के दौरान

  • प्री-डायबिटीज: सामान्य से अधिक लेकिन मधुमेह से कम

नोट: यह दस्तावेज मुख्य रूप से टाइप 2 मधुमेह पर केंद्रित है।
यदि आप डायबिटीज के लक्षण, कारण और शुगर कंट्रोल करने के तरीकों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो यह गाइड भी पढ़ें —डायबिटीज के लक्षण, कारण और इलाज |


2. भारत सरकार की पहल और योजनाएं (Government Initiatives)

भारत सरकार ने मधुमेह रोगियों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं[4][5]:

2.1 राष्ट्रीय कार्यक्रम (National Programs)

  • NPCDCS (National Programme for Prevention and Control of Cancer, Diabetes, Cardiovascular Diseases and Stroke): 2010 में शुरू किया गया, यह कार्यक्रम मधुमेह की रोकथाम और नियंत्रण पर केंद्रित है[6]

  • NHM Free Drugs Service Initiative: गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त आवश्यक दवाएं और इंसुलिन प्रदान करता है[7]

  • Pradhan Mantri Bhartiya Janaushadhi Pariyojana (PMBJP): सभी को सस्ती कीमतों पर गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराता है[8]

  • Ayushman Bharat - PMJAY: इनपेशेंट देखभाल के लिए उपचार उपलब्ध[9]

2.2 सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं (Free Healthcare Services)

योजना

लाभ

NHM Free Drugs Initiative

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को इंसुलिन सहित मुफ्त आवश्यक दवाओं के प्रावधान के लिए वित्तीय सहायता

PMBJP Jan Aushadhi Kendras

9000+ केंद्रों पर 50-90% तक कम कीमत पर जेनेरिक दवाएं

NPCDCS Screening

मुफ्त मधुमेह जांच और नियमित फॉलो-अप

ICMR Guidelines

मानकीकृत उपचार प्रोटोकॉल और दिशानिर्देश


Table 2: सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं और योजनाएं
सरकारी वेबसाइट लिंक:


3. आयुर्वेदिक घरेलू उपाय (Ayurvedic Home Remedies)

आयुर्वेद में मधुमेह को "मधुमेह" या "प्रमेह" कहा जाता है। वैज्ञानिक अध्ययनों ने कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की प्रभावशीलता को प्रमाणित किया है[10][11][12]।

3.1 प्रमुख आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ (Top Ayurvedic Herbs)

जड़ी-बूटी

हिंदी/वैज्ञानिक नाम

लाभ

उपयोग विधि

Fenugreek

मेथी दाना (Trigonella foenum-graecum)

रक्त शर्करा नियंत्रण, इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है

1 चम्मच रात भर भिगोकर सुबह खाली पेट

Bitter Gourd

करेला (Momordica charantia)

पॉलीयूरिया कम करता है, रक्त शर्करा घटाता है

30 ml जूस सुबह खाली पेट या सब्जी के रूप में

Gymnema

गुरमार (Gymnema sylvestre)

"शुगर डिस्ट्रॉयर", चीनी की तलब कम करता है

400 mg कैप्सूल या पत्ती का काढ़ा दिन में 2 बार

Indian Gooseberry

आंवला (Emblica officinalis)

विटामिन C समृद्ध, इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है

1-2 ताज़ा आंवला या 20 ml जूस प्रतिदिन

Turmeric

हल्दी (Curcuma longa)

एंटी-इंफ्लेमेटरी, ग्लूकोज कम करता है

1/2 चम्मच दूध/पानी के साथ रात में

Holy Basil

तुलसी (Ocimum sanctum)

रक्त शर्करा नियंत्रण

2-3 पत्तियां खाली पेट या चाय

Indian Kino Tree

बीजासार (Pterocarpus marsupium)

हाइपरग्लाइसीमिया कम करता है

400 mg जल अर्क दिन में 2 बार

Neem

नीम (Azadirachta indica)

रक्त शर्करा स्तर बनाए रखता है

2-3 पत्तियां खाली पेट या कैप्सूल

Jamun

जामुन (Eugenia jambolana)

एंटीऑक्सीडेंट समृद्ध

फल, बीज पाउडर 1 चम्मच पानी के साथ

Cinnamon

दालचीनी (Cinnamomum verum)

रक्त शर्करा नियंत्रण

1/2 चम्मच चाय या गर्म पानी में


Table 3: आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ और उनके उपयोग

3.2 विशेष घरेलू नुस्खे (Special Home Remedies)

1. मेथी का पानी (Fenugreek Water)
विधि: 1 बड़ा चम्मच मेथी के दाने रात भर एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट बीज सहित पानी पी लें[13]।
वैज्ञानिक आधार: मेथी में घुलनशील फाइबर होता है जो कार्बोहाइड्रेट के पाचन और अवशोषण को धीमा करता है।

2. आंवला-हल्दी का पानी (Amla-Turmeric Water)
विधि: 1 चम्मच आंवला पाउडर + 1/2 चम्मच हल्दी पाउडर को गर्म पानी में मिलाकर रात को सोने से पहले पिएं[14]।
लाभ: आंवला में क्रोमियम इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है, हल्दी में करक्यूमिन एंटी-इंफ्लेमेटरी है।

3. करेले का जूस (Bitter Gourd Juice)
विधि: 1-2 करेले को धोकर, बीज निकालकर जूसर में पीस लें। 30 ml जूस में थोड़ा पानी मिलाकर सुबह खाली पेट पिएं।
सावधानी: अत्यधिक मात्रा से बचें, गर्भवती महिलाएं न लें।

4. जामुन के बीज का पाउडर (Jamun Seed Powder)
विधि: जामुन के बीजों को सुखाकर पाउडर बना लें। 1/2 चम्मच पाउडर पानी के साथ दिन में दो बार लें।

5. तुलसी-नीम की पत्तियां (Tulsi-Neem Leaves)
विधि: 4-5 तुलसी पत्ती + 2-3 नीम पत्ती चबाएं या पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं। सुबह खाली पेट लें।

3.3 पॉली-हर्बल फॉर्मूलेशन (Poly-Herbal Formulations)

वैज्ञानिक अध्ययनों में प्रमाणित संयोजन[15][16]:

  • Combination 1: Gymnema sylvestre + Momordica charantia + Trigonella foenum-graecum

  • Combination 2: Indian Gooseberry (Amla) + Turmeric + Bitter Gourd

  • Combination 3: Holy Basil + Fenugreek + Cinnamon

महत्वपूर्ण: इन संयोजनों को मानकीकृत और नियंत्रित परिस्थितियों में लेना चाहिए।


4. योग और प्राणायाम (Yoga & Pranayama)

योग और प्राणायाम मधुमेह प्रबंधन में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुए हैं। कई अध्ययनों ने फास्टिंग और पोस्टप्रांडियल ब्लड शुगर में महत्वपूर्ण कमी दिखाई है[17][18][19]।

4.1 प्रभावी आसन (Effective Asanas)

आसन

लाभ और विधि

धनुरासन (Dhanurasana)

अग्न्याशय को सक्रिय करता है, इंसुलिन उत्पादन बढ़ाता है। पेट के बल लेटकर पैरों को पकड़कर धनुष की तरह शरीर को खींचें।

मत्स्येन्द्रासन (Matsyendrasana)

अग्न्याशय की मालिश करता है। बैठकर रीढ़ की हड्डी को मोड़ें।

पश्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana)

पेट के अंगों को उत्तेजित करता है। आगे की ओर झुककर पैर की उंगलियों को छूएं।

हलासन (Halasana)

थायरॉयड और अग्न्याशय को नियंत्रित करता है।

वज्रासन (Vajrasana)

पाचन में सुधार, भोजन के बाद बैठने के लिए एकमात्र आसन।

सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar)

12 आसनों का सेट, ग्लूकोज उपयोग बढ़ाता है, इंसुलिन उत्पादन उत्तेजित करता है। 7-12 सेट प्रतिदिन।

भुजंगासन (Bhujangasana)

अग्न्याशय को खींचता है, रक्त प्रवाह बढ़ाता है।

सेतुबंधासन (Setubandhasana)

थायरॉयड उत्तेजित करता है, तनाव कम करता है।

पवनमुक्तासन (Pavanamuktasana)

पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।


Table 4: मधुमेह के लिए योगासन

4.2 प्राणायाम तकनीकें (Pranayama Techniques)

  1. कपालभाति (Kapalbhati): तेज़ सांस छोड़ने की क्रिया, 100-200 बार। अग्न्याशय सक्रिय करता है।

  2. अनुलोम-विलोम/नाड़ी शोधन (Nadi Shodhana): वैकल्पिक नासिका श्वास, 10-15 मिनट। तनाव कम करता है, हार्मोन संतुलन।

  3. भस्त्रिका (Bhastrika): तीव्र श्वास, 20-30 बार। चयापचय बढ़ाता है।

  4. भ्रामरी (Bhramari): मधुमक्खी की तरह गुंजन, मानसिक शांति।

  5. उद्गीथ (Udgitha): ॐ का उच्चारण, 10-15 मिनट।

4.3 योग कार्यक्रम की अवधि और प्रभाव (Duration and Effects)

अध्ययन परिणाम:

  • 15-दिवसीय आवासीय योग कार्यक्रम: फास्टिंग और पोस्टप्रांडियल शुगर में महत्वपूर्ण कमी (p  0.001), दवा स्कोर में कमी[20]

  • 7-दिवसीय योग शिविर: रैंडम ब्लड शुगर में कमी, पल्स रेट में सुधार[21]

  • 6-सप्ताह से 6-महीने का योग अभ्यास: HbA1c में कमी, इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार[22]

अनुशंसित दैनिक योग अनुसूची:

  • सुबह 5:30-6:30 AM: सूर्य नमस्कार (7-12 सेट) + आसन (30 मिनट)

  • शाम 5:30-6:00 PM: प्राणायाम (20 मिनट) + ध्यान (10 मिनट)

  • रात 9:00 PM: शवासन (10 मिनट)


5. आहार प्रबंधन और ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Diet Management)

5.1 ग्लाइसेमिक इंडेक्स क्या है? (What is Glycemic Index?)

ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) एक पैमाना है जो यह मापता है कि खाद्य पदार्थ कितनी तेज़ी से रक्त शर्करा बढ़ाता है[23]:

  • Low GI (कम): 55 या कम - धीरे-धीरे शर्करा बढ़ाता है

  • Medium GI (मध्यम): 56-69 - मध्यम गति से

  • High GI (उच्च): 70 या अधिक - तेज़ी से शर्करा बढ़ाता है

5.2 भारतीय खाद्य पदार्थों का GI चार्ट (GI Chart of Indian Foods)

खाद्य पदार्थ

GI Value

श्रेणी

अनाज और दालें (Cereals & Pulses)

मूंग दाल (Moong Dal)

38

Low GI

उड़द दाल (Urad Dal)

43

Low GI

मसूर दाल (Masoor Dal)

39-46

Low GI

राजमा (Red Kidney Beans)

19-23

Low GI

छोले (Chickpeas)

28-32

Low GI

बार्ली (Barley)

28

Low GI

ओट्स (Oats)

55

Low GI

ब्राउन राइस (Brown Rice)

50-55

Low GI

ज्वार (Jowar)

52

Low GI

बाजरा (Bajra)

54

Low GI

रागी (Ragi/Finger Millet)

35-45

Low GI

सफेद चावल (White Rice)

73

High GI

मैदा (Refined Flour)

71

High GI

सफेद ब्रेड (White Bread)

75

High GI

पोहा (Poha - depending)

38-55

Low-Med GI

इडली (Idli - Rava)

60-65

Medium GI

डोसा (Dosa)

55-77

Med-High GI

फल (Fruits)

सेब (Apple)

36

Low GI

संतरा (Orange)

43

Low GI

नाशपाती (Pear)

38

Low GI

आम (Mango)

51

Low GI

पपीता (Papaya)

60

Medium GI

केला (Banana - ripe)

51-62

Low-Med GI

अंगूर (Grapes)

59

Medium GI

तरबूज (Watermelon)

76

High GI

अनानास (Pineapple)

66

Medium GI

सब्जियां (Vegetables)

पत्तागोभी (Cabbage)

10

Low GI

ब्रोकली (Broccoli)

10

Low GI

टमाटर (Tomato)

15

Low GI

शिमला मिर्च (Capsicum)

15

Low GI

गाजर (Carrot - raw)

16-47

Low GI

भिंडी (Okra/Bhindi)

20

Low GI

पालक (Spinach)

15

Low GI

मेथी (Fenugreek Leaves)

15

Low GI

करेला (Bitter Gourd)

18

Low GI

आलू (White Potato)

78

High GI

कद्दू (Pumpkin)

75

High GI

अन्य (Others)

पनीर (Paneer)

 10

Very Low

दही (Curd/Yogurt)

28-35

Low GI

दूध (Milk)

27-34

Low GI

बादाम (Almonds)

15

Low GI

अखरोट (Walnuts)

15

Low GI

जैगरी (Jaggery)

84

High GI

शहद (Honey)

55-61

Med GI


Table 5: भारतीय खाद्य पदार्थों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स चार्ट

5.3 मधुमेह के लिए आदर्श आहार योजना (Ideal Diet Plan)

दिन भर का नमूना आहार:
सुबह खाली पेट (6:00-6:30 AM):

  • मेथी का पानी या आंवला-हल्दी का पानी

  • 2-3 तुलसी पत्ती + 1-2 नीम पत्ती

नाश्ता (8:00-9:00 AM):

  • विकल्प 1: ओट्स उपमा + 1 कप ग्रीन टी

  • विकल्प 2: मूंग दाल चीला + पुदीने की चटनी

  • विकल्प 3: वेजिटेबल दलिया + 5-6 बादाम

  • विकल्प 4: बाजरा रोटी + दही + सब्जी

मिड-मॉर्निंग (11:00-11:30 AM):

  • 1 फल (सेब/नाशपाती/संतरा)

  • या 1 कप बटरमिल्क

दोपहर का भोजन (1:00-2:00 PM):

  • 2 ज्वार/बाजरा रोटी या 1 कटोरी ब्राउन राइस

  • 1 कटोरी दाल (मूंग/मसूर)

  • 1 कटोरी सब्जी (करेला/भिंडी/पालक)

  • सलाद (खीरा, टमाटर, प्याज, गाजर)

  • 1 कप छाछ

भोजन के बाद (2:15-2:30 PM):

  • 10-15 मिनट टहलना (अनिवार्य)

शाम का नाश्ता (4:00-5:00 PM):

  • ग्रीन टी + 4-5 बादाम

  • या मुट्ठी भर भुने चने

  • या स्प्राउट्स चाट

रात का भोजन (7:00-8:00 PM):

  • 2 रोटी (गेहूं + चना आटा मिक्स)

  • 1 कटोरी सब्जी

  • सलाद

  • 1 कटोरी दही या छाछ

सोने से पहले (9:30-10:00 PM):

  • आंवला-हल्दी पाउडर पानी में

  • या 1 कप गुनगुना दूध (हल्दी के साथ)

5.4 आहार के सिद्धांत (Dietary Principles)

  1. कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल का उपयोग: मस्टर्ड ऑयल, नारियल तेल, ऑलिव ऑयल

  2. प्याज़ सलाद: भोजन के साथ कच्चा प्याज़ इंसुलिन रिलीज़ को सुधारता है

  3. खाने के बाद टहलना: 10-15 मिनट की पैदल चाल अनिवार्य

  4. फाइबर का सेवन: दालें, साबुत अनाज, सब्जियाँ

  5. छोटे भोजन: दिन में 5-6 बार छोटे भोजन

  6. पानी: दिन में 8-10 गिलास पानी

5.5 बचने योग्य खाद्य पदार्थ (Foods to Avoid)

  • सफेद चावल, मैदा, सफेद ब्रेड

  • तला हुआ खाना, फास्ट फूड

  • मिठाई, चीनी, जैगरी

  • कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस

  • आलू, कद्दू (उच्च GI)

  • प्रोसेस्ड और रिफाइंड खाद्य पदार्थ
    शुगर को नियंत्रित रखने के लिए केवल घरेलू नुस्खे ही नहीं, बल्कि सही खानपान भी बेहद जरूरी है — जानिए विस्तार से कि मधुमेह में क्या खाएं और क्या न खाएं | शुगर के लिए बेस्ट डाइट

 

अनियंत्रित ब्लड शुगर हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकती है, जिससे महिलाओं में ओव्यूलेशन की समस्या और गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है। यदि शुगर कंट्रोल में रखने के घरेलू उपाय अपनाने के बावजूद लंबे समय तक प्रेग्नेंसी संभव नहीं हो पा रही है, तो IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) एक प्रभावी विकल्प हो सकता है। ऐसे में सही क्लिनिक का चयन करना और दिल्ली में IVF की लागत तथा रांची में IVF की लागत की जानकारी लेना आपके लिए सहायक साबित हो सकता है।

 

6. जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Modifications)

6.1 शारीरिक गतिविधि (Physical Activity)

गतिविधि

अनुशंसा

तेज़ चलना (Brisk Walking)

दिन में 30-45 मिनट, 5-6 दिन प्रति सप्ताह

योग

दिन में 45-60 मिनट

साइकिलिंग

30 मिनट, 3-4 दिन प्रति सप्ताह

तैराकी

30 मिनट, 2-3 दिन प्रति सप्ताह

भोजन के बाद टहलना

हर भोजन के बाद 10-15 मिनट (अनिवार्य)

सीढ़ियाँ चढ़ना

लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का उपयोग


Table 6: शारीरिक गतिविधि अनुशंसाएं

6.2 तनाव प्रबंधन (Stress Management)

तनाव कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ाता है जो रक्त शर्करा बढ़ाता है। तनाव कम करने के उपाय:

  • ध्यान (Meditation): दिन में 15-20 मिनट

  • गहरी सांस लेना (Deep Breathing)

  • योग निद्रा (Yoga Nidra)

  • पर्याप्त नींद: 7-8 घंटे

  • शौक और मनोरंजन

  • परिवार और दोस्तों के साथ समय

6.3 नींद का महत्व (Importance of Sleep)

  • कम नींद इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ाती है

  • अनुशंसित: 7-8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद

  • नियमित सोने और जागने का समय

  • सोने से 2-3 घंटे पहले भोजन करें

  • सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें

6.4 धूम्रपान और शराब (Smoking & Alcohol)

  • धूम्रपान: पूरी तरह बंद करें - हृदय रोग और जटिलताओं का खतरा बढ़ाता है

  • शराब: बहुत सीमित मात्रा या बंद करें - हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा

6.5 नियमित निगरानी (Regular Monitoring)

  • घरेलू ग्लूकोमीटर से नियमित जांच

  • HbA1c: हर 3 महीने में

  • लिपिड प्रोफाइल: हर 6 महीने में

  • किडनी फंक्शन टेस्ट: वार्षिक

  • आंखों की जांच: वार्षिक

  • पैरों की देखभाल: दैनिक जांच


7. वैज्ञानिक प्रमाण और अध्ययन (Scientific Evidence)

7.1 आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों पर अध्ययन

प्रमुख नैदानिक अध्ययन:
अध्ययन 1 - Poly-Herbal Formulation[24]
संरचना: Gymnema sylvestre + Momordica charantia + Trigonella foenum-graecum
परिणाम:

  • ग्लाइसेमिक नियंत्रण में महत्वपूर्ण सुधार

  • इंसुलिन संवेदनशीलता में वृद्धि

  • लिपिड प्रोफाइल में सुधार

  • कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं

  • रोगियों की जीवन गुणवत्ता में सुधार

अध्ययन 2 - Indian Herbal Drugs[25]
60% विश्व आबादी पारंपरिक दवाओं का उपयोग करती है। भारतीय जड़ी-बूटियाँ जैसे bitter melon, fenugreek, Indian Kino Tree, और Gymnema मधुमेह उपचार में प्रभावी पाई गई हैं।
अध्ययन 3 - Cochrane Review[26]
आयुर्वेदिक उपचारों पर व्यवस्थित समीक्षा:

  • Diabecon, Inolter, Cogent DB (मालिकाना हर्बल मिश्रण) ने नियंत्रण की तुलना में HbA1c स्तर में महत्वपूर्ण कमी दिखाई

  • उपचार की अवधि: 3-6 महीने

7.2 योग पर अध्ययन

अध्ययन

अवधि

परिणाम

Residential Yoga Program[27]

15 दिन

फास्टिंग शुगर कमी (p$<<$0.001), दवा स्कोर में कमी

Yoga & SKY Study[28]

7 दिन

रैंडम शुगर में कमी, पल्स रेट में सुधार

Asana-specific Study[29]

दीर्घकालिक

β-कोशिकाओं की संवेदनशीलता में वृद्धि, स्थायी परिवर्तन

Short-term Yoga[30]

6 सप्ताह

फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज में महत्वपूर्ण कमी


Table 7: योग पर वैज्ञानिक अध्ययन और परिणाम

7.3 आहार हस्तक्षेप पर अध्ययन

5 जीवनशैली आधारित उपाय (Dietitian Sonia Narang Study)[31]:

  1. मेथी का पानी: चयापचय लाभ

  2. प्याज़ सलाद: इंसुलिन रिलीज़ में सुधार

  3. कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल: स्वस्थ वसा

  4. भोजन के बाद टहलना: ग्लूकोज उपयोग

  5. आंवला-हल्दी पानी: रात में ग्लूकोज चयापचय

परिणाम: चीनी की तलब में कमी, बेहतर ऊर्जा, पारंपरिक दवाओं की तुलना में कम साइड इफेक्ट्स।


8. सावधानियां और चेतावनी (Precautions & Warnings)

8.1 महत्वपूर्ण चेतावनी

  • परामर्श अनिवार्य: कोई भी नया उपाय शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें

  • छोड़ें: घरेलू उपाय चिकित्सकीय उपचार के पूरक हैं, विकल्प नहीं

  • निगरानी: ब्लड शुगर की नियमित जांच जारी रखें

  • स्थिति: हाइपोग्लाइसीमिया या हाइपरग्लाइसीमिया के लक्षणों पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें

8.2 विशेष सावधानियां

श्रेणी

सावधानियां

गर्भवती महिलाएं

आंवला, हल्दी सीमित मात्रा में। करेला अत्यधिक न लें। कोई भी जड़ी-बूटी लेने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।

स्तनपान कराने वाली माताएं

जड़ी-बूटियों का सावधानीपूर्वक उपयोग, चिकित्सक परामर्श अनिवार्य।

बच्चे

बच्चों के लिए खुराक वयस्कों से कम होनी चाहिए। बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श आवश्यक।

सर्जरी से पहले

जड़ी-बूटियां रक्त शर्करा को प्रभावित कर सकती हैं। सर्जरी से 2 सप्ताह पहले बंद करें।

किडनी/लिवर रोग

जड़ी-बूटियां सावधानी से लें। विशेषज्ञ की देखरेख अनिवार्य।

अन्य दवाएं

हर्बल उपचार अन्य दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं। डॉक्टर को सभी दवाओं की जानकारी दें।


Table 8: विशेष परिस्थितियों में सावधानियां

8.3 हाइपोग्लाइसीमिया (Low Blood Sugar)

लक्षण:

  • कंपन, पसीना, घबराहट

  • भूख, चक्कर आना

  • धुंधली दृष्टि, कमज़ोरी

  • भ्रम, चिड़चिड़ापन

तत्काल उपाय:

  • 15-20 ग्राम तेज़ी से अवशोषित कार्बोहाइड्रेट लें (1 चम्मच चीनी, ग्लूकोज टैबलेट, जूस)

  • 15 मिनट बाद दोबारा जांच करें

  • यदि सुधार न हो तो तुरंत अस्पताल जाएं

8.4 एलर्जी और प्रतिक्रियाएं

  • पहली बार कोई जड़ी-बूटी लेते समय छोटी खुराक से शुरू करें

  • एलर्जी प्रतिक्रिया के संकेत: दाने, खुजली, सूजन, सांस लेने में कठिनाई

  • प्रतिक्रिया होने पर तुरंत उपयोग बंद करें और चिकित्सक से संपर्क करें


9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

प्रश्न 1: क्या घरेलू उपाय मधुमेह को पूरी तरह ठीक कर सकते हैं?
उत्तर: नहीं। टाइप 2 मधुमेह एक पुरानी स्थिति है जिसे प्रबंधित किया जा सकता है लेकिन पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता। घरेलू उपाय रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, दवाओं की जरूरत को कम कर सकते हैं, और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करते हैं। हालांकि, ये चिकित्सकीय उपचार के पूरक हैं, विकल्प नहीं।

प्रश्न 2: कितने समय में परिणाम दिखने लगते हैं?
उत्तर: परिणाम व्यक्ति और उपाय पर निर्भर करता है। आमतौर पर:

  • योग और प्राणायाम: 7-15 दिनों में सुधार

  • आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां: 4-12 सप्ताह में महत्वपूर्ण परिवर्तन

  • आहार परिवर्तन: 2-4 सप्ताह में रक्त शर्करा में सुधार

नियमित निगरानी और धैर्य आवश्यक है।

प्रश्न 3: क्या मैं अपनी मधुमेह की दवाएं बंद कर सकता हूं?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। अपने डॉक्टर की सलाह के बिना कभी भी दवाएं बंद न करें। घरेलू उपाय शुरू करने के बाद यदि आपका रक्त शर्करा लगातार बेहतर होता है, तो आपका डॉक्टर धीरे-धीरे दवाओं की खुराक कम कर सकता है। स्व-उपचार खतरनाक हो सकता है।

प्रश्न 4: कौन सी जड़ी-बूटी सबसे प्रभावी है?
उत्तर: वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार सबसे प्रभावी जड़ी-बूटियां हैं:

  1. Gymnema sylvestre (गुरमार) - "शुगर डिस्ट्रॉयर"

  2. Momordica charantia (करेला)

  3. Trigonella foenum-graecum (मेथी)

इनका संयोजन सबसे बेहतर परिणाम देता है। हालांकि, व्यक्तिगत प्रभाव अलग हो सकता है।

प्रश्न 5: क्या योग वास्तव में मधुमेह में मदद करता है?
उत्तर: हां, कई वैज्ञानिक अध्ययनों ने योग की प्रभावशीलता प्रमाणित की है। योग:

  • अग्न्याशय को उत्तेजित करता है

  • इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है

  • तनाव कम करता है (कोर्टिसोल कम करता है)

  • वजन प्रबंधन में मदद करता है

  • समग्र चयापचय में सुधार करता है

15-दिवसीय योग कार्यक्रमों में फास्टिंग और पोस्टप्रांडियल शुगर में महत्वपूर्ण कमी देखी गई है (p$<$0.001)।

प्रश्न 6: करेले का जूस कितनी मात्रा में लेना चाहिए?
उत्तर: अनुशंसित मात्रा: 30 ml (2 बड़े चम्मच) ताजा करेले का जूस, सुबह खाली पेट। इसे पानी में मिलाकर लिया जा सकता है। अत्यधिक मात्रा से पेट दर्द हो सकता है। गर्भवती महिलाओं को बहुत सीमित मात्रा लेनी चाहिए।

प्रश्न 7: क्या मधुमेह में फल खाए जा सकते हैं?
उत्तर: हां, लेकिन कम GI वाले फल चुनें:

  • सुरक्षित: सेब, संतरा, नाशपाती, अमरूद, पपीता (सीमित)

  • सीमित मात्रा में: आम, केला, अंगूर

  • बचें: तरबूज, अनानास (उच्च GI)

फल छोटी मात्रा में, नाश्ते या मध्य-भोजन के रूप में लें। एक बार में बड़ी मात्रा न लें।

प्रश्न 8: भोजन के बाद टहलना क्यों जरूरी है?
उत्तर: भोजन के बाद 10-15 मिनट की पैदल चाल:

  • ग्लूकोज उपयोग बढ़ाती है

  • पोस्टप्रांडियल शुगर स्पाइक कम करती है

  • इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करती है

  • पाचन में मदद करती है

यह सबसे सरल और प्रभावी जीवनशैली हस्तक्षेप है।

प्रश्न 9: क्या मधुमेह में चावल खाया जा सकता है?
उत्तर: सफेद चावल (GI 73) से बचें या बहुत सीमित मात्रा में लें। बेहतर विकल्प:

  • ब्राउन राइस (GI 50-55)

  • पुलाव में सब्जियां मिलाएं

  • छोटा हिस्सा (1/2 कप पकी हुई)

  • दाल और सब्जियों के साथ

रोटी (गेहूं + चना) चावल से बेहतर विकल्प है।

प्रश्न 10: मेथी के दाने कैसे लें?
उत्तर: सबसे प्रभावी तरीका:

  • 1 बड़ा चम्मच मेथी दाना रात भर 1 गिलास पानी में भिगो दें

  • सुबह खाली पेट बीज सहित पानी पी लें

  • 30 मिनट बाद नाश्ता करें

  • नियमित रूप से 2-3 महीने तक जारी रखें

वैकल्पिक: स्प्राउट्स के रूप में या पाउडर बनाकर।

प्रश्न 11: सरकार से मुफ्त दवाएं कहां मिलती हैं?
उत्तर: मुफ्त या सस्ती मधुमेह दवाएं और इंसुलिन:

  1. Jan Aushadhi Kendras: 9000+ केंद्र, 50-90% छूट

  2. सरकारी अस्पताल: NHM Free Drugs Initiative के तहत

  3. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC): मुफ्त जांच और दवाएं

  4. NPCDCS क्लीनिक: निःशुल्क निगरानी और उपचार

निकटतम केंद्र खोजें: https://janaushadhi.gov.in

प्रश्न 12: HbA1c का लक्ष्य क्या होना चाहिए?
उत्तर: ICMR और ADA दिशानिर्देश:

  • सामान्य लक्ष्य:  7% (53 mmol/mol)

  • युवा वयस्क, जटिलताओं के बिना:  6.5%

  • बुजुर्ग, जटिलताओं के साथ:  8%

  • गर्भावस्था:  6%

व्यक्तिगत लक्ष्य आपके डॉक्टर द्वारा निर्धारित किया जाना चाहिए।

प्रश्न 13: क्या हल्दी दूध मधुमेह में लाभदायक है?
उत्तर: हां, हल्दी दूध (गोल्डन मिल्क) लाभदायक हो सकता है:

  • करक्यूमिन (हल्दी में) एंटी-इंफ्लेमेटरी और ग्लूकोज कम करने वाला है

  • 1/2 चम्मच हल्दी पाउडर + 1 कप गर्म दूध

  • रात को सोने से पहले लें

  • बिना चीनी या बहुत कम मात्रा में स्टीविया

दूध कम वसा वाला होना चाहिए। अधिक मात्रा से बचें।

प्रश्न 14: मधुमेह में वजन कम करना क्यों जरूरी है?
उत्तर: वजन कम करने से:

  • इंसुलिन प्रतिरोध कम होता है

  • इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है

  • रक्त शर्करा नियंत्रण में सुधार

  • जटिलताओं का खतरा कम होता है

  • कम दवाओं की आवश्यकता

5-10% वजन कम करने से भी महत्वपूर्ण सुधार हो सकता है। BMI लक्ष्य (भारतीय): 18.5-23 kg/m

प्रश्न 15: क्या मधुमेह में उपवास (fasting) किया जा सकता है?
उत्तर: सावधानीपूर्वक। उपवास से:

  • हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा (विशेषकर दवाओं के साथ)

  • निर्जलीकरण का खतरा

यदि उपवास करना है:

  • डॉक्टर से पहले परामर्श करें

  • दवाओं की खुराक समायोजित करें

  • नियमित रूप से शुगर जांचें

  • पर्याप्त पानी पिएं

  • लक्षणों पर ध्यान दें

इंटरमिटेंट फास्टिंग चिकित्सकीय देखरेख में की जा सकती है।


10. सारांश और सिफारिशें (Summary & Recommendations)

10.1 मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  1. समग्र दृष्टिकोण: मधुमेह प्रबंधन में आयुर्वेद, योग, आहार और जीवनशैली का समन्वित उपयोग सबसे प्रभावी है

  2. वैज्ञानिक समर्थन: आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और योग की प्रभावशीलता कई नैदानिक अध्ययनों द्वारा प्रमाणित है

  3. सरकारी सहायता: भारत सरकार NPCDCS, NHM, PMBJP के माध्यम से मुफ्त/सस्ती दवाएं और जांच प्रदान करती है

  4. चिकित्सकीय देखरेख अनिवार्य: घरेलू उपाय पूरक हैं, चिकित्सकीय उपचार के विकल्प नहीं

  5. धैर्य और निरंतरता: परिणाम में समय लगता है, नियमित अभ्यास जरूरी है

10.2 व्यापक कार्य योजना (Comprehensive Action Plan)

चरण 1 - तुरंत शुरू करें (Week 1):

  • सुबह: मेथी का पानी शुरू करें

  • दैनिक: 30 मिनट तेज़ चलना

  • भोजन के बाद: 10-15 मिनट टहलना

  • रक्त शर्करा की दैनिक निगरानी

चरण 2 - जोड़ें (Week 2-4):

  • सुबह: योग और प्राणायाम (30 मिनट)

  • आहार: कम GI भोजन योजना अपनाएं

  • शाम: करेले का जूस या आंवला-हल्दी पानी

  • अन्य जड़ी-बूटियां जोड़ें (डॉक्टर की सलाह से)

चरण 3 - स्थिरता (Month 2-3):

  • पूर्ण जीवनशैली परिवर्तन लागू करें

  • योग अभ्यास बढ़ाएं (45-60 मिनट)

  • तनाव प्रबंधन तकनीकें

  • HbA1c जांच (3 महीने में)

चरण 4 - दीर्घकालिक (Month 4+):

  • सभी अच्छी आदतों को जारी रखें

  • नियमित चिकित्सा जांच

  • आवश्यकतानुसार दवाओं में समायोजन (डॉक्टर के साथ)

  • परिवार और दोस्तों को शिक्षित करें

10.3 आपातकालीन संपर्क और संसाधन

सेवा

संपर्क/वेबसाइट

राष्ट्रीय स्वास्थ्य हेल्पलाइन

1800-180-1104

ICMR

https://www.icmr.gov.in

NHM Portal

https://nhm.gov.in

Jan Aushadhi Kendras

https://janaushadhi.gov.in

Ministry of Health

https://www.mohfw.gov.in

Ayush Ministry

https://www.ayush.gov.in

Indian Diabetes Federation

https://www.idf.org


Table 9: महत्वपूर्ण संपर्क और संसाधन

10.4 अंतिम संदेश

मधुमेह एक प्रबंधनीय स्थिति है। आयुर्वेदिक घरेलू उपाय, योग, उचित आहार और जीवनशैली परिवर्तन के माध्यम से आप अपने रक्त शर्करा को नियंत्रित कर सकते हैं, दवाओं की जरूरत कम कर सकते हैं, और गुणवत्तापूर्ण जीवन जी सकते हैं।
याद रखें:

  • नियमितता सफलता की कुंजी है

  • छोटे कदम बड़े परिवर्तन लाते हैं

  • चिकित्सकीय देखरेख में रहें

  • सकारात्मक रहें और धैर्य रखें

  • परिवार का सहयोग लें

स्वस्थ रहें, मधुमेह को नियंत्रित रखें!


संदर्भ (References)

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परिशिष्ट (Appendix)

A. दैनिक रक्त शर्करा रिकॉर्ड शीट

(एक साधारण तालिका जो आप फोटोकॉपी करके उपयोग कर सकते हैं)

दिनांक

फास्टिंग

नाश्ते के 2 घंटे बाद

दोपहर के भोजन के 2 घंटे बाद

रात के भोजन के 2 घंटे बाद

टिप्पणी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 
Table 10: साप्ताहिक रक्त शर्करा रिकॉर्ड

B. खरीदारी सूची (शुरुआत के लिए)

जड़ी-बूटियां और मसाले:

  • मेथी दाना (500 ग्राम)

  • हल्दी पाउडर (200 ग्राम)

  • आंवला पाउडर (250 ग्राम)

  • दालचीनी (100 ग्राम)

  • ताजा करेला

  • तुलसी का पौधा (घर में लगाएं)

  • नीम की पत्तियां (ताजा)

अनाज और दालें:

  • ज्वार आटा (1 किलो)

  • बाजरा आटा (1 किलो)

  • रागी आटा (500 ग्राम)

  • चना आटा (1 किलो)

  • ब्राउन राइस (1 किलो)

  • मूंग दाल (1 किलो)

  • मसूर दाल (500 ग्राम)

C. योग चित्र संदर्भ

(निम्नलिखित आसनों के लिए योग्य प्रशिक्षक से सीखें या प्रमाणित योग वीडियो देखें)

  • सूर्य नमस्कार (12-स्टेप सीक्वेंस)

  • धनुरासन (Bow Pose)

  • मत्स्येन्द्रासन (Spinal Twist)

  • पश्चिमोत्तानासन (Forward Bend)

  • भुजंगासन (Cobra Pose)

  • शवासन (Corpse Pose)

D. महत्वपूर्ण नोट

यह दस्तावेज़ शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। यह पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य स्थिति या उपचार के बारे में हमेशा अपने चिकित्सक या अन्य योग्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श करें।

संपर्क:
इस दस्तावेज़ के बारे में किसी भी प्रश्न के लिए, कृपया अपने स्थानीय स्वास्थ्य सेवा प्रदाता या निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

अस्वीकरण (Disclaimer):
यह दस्तावेज़ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों और सरकारी स्रोतों पर आधारित है। जानकारी की सटीकता सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है, लेकिन यह चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी नया उपचार शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

 

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