डायबिटीज के लक्षण, कारण और इलाज | शुगर कैसे कंट्रोल करें
परिचय
डायबिटीज मेलिटस (मधुमेह) एक गंभीर चयापचय रोग है जो भारत में तेजी से बढ़ रहा है। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (IDF) एटलस 2021 के अनुसार, भारत में 20-79 वर्ष की आयु के 74.2 मिलियन लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता है या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाती हैं, जिससे रक्त में शर्करा (ग्लूकोज) का स्तर बढ़ जाता है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, डायबिटीज की समय पर पहचान और उचित प्रबंधन से इससे जुड़ी जटिलताओं को रोका जा सकता है। यह गाइड आपको डायबिटीज के लक्षण, कारण, प्रकार, उपचार और रोकथाम के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेगी।
डायबिटीज केवल ब्लड शुगर तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि यह हार्मोनल संतुलन और प्रजनन स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है। अनियंत्रित शुगर लेवल के कारण गर्भधारण में कठिनाई आ सकती है। यदि लंबे समय तक प्रयास के बाद भी प्रेग्नेंसी संभव नहीं हो पा रही है, तो सहायक प्रजनन तकनीकें जैसे सरोगेसी एक सुरक्षित विकल्प हो सकती हैं। ऐसे में भारत में सरोगेसी की लागत और बैंगलोर में सरोगेसी की लागत की जानकारी लेना और सही क्लिनिक चुनना मददगार साबित हो सकता है।
डायबिटीज के प्रकार
टाइप 1 डायबिटीज
टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून स्थिति है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अग्न्याशय में इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। यह आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था में विकसित होता है, लेकिन किसी भी उम्र में हो सकता है।
मुख्य विशेषताएं:
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अग्न्याशय इंसुलिन का उत्पादन बंद कर देता है
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जीवनभर इंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता होती है
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कुल डायबिटीज मामलों का लगभग 5-10% हिस्सा
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अचानक शुरुआत और तीव्र लक्षण
टाइप 2 डायबिटीज
टाइप 2 डायबिटीज सबसे आम प्रकार है, जो कुल मामलों का 90-95% है। इसमें शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता (इंसुलिन प्रतिरोध) और समय के साथ पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता।
मुख्य विशेषताएं:
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आमतौर पर 40 वर्ष की आयु के बाद विकसित होता है
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जीवनशैली और आनुवंशिक कारकों से जुड़ा हुआ
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प्रारंभ में आहार, व्यायाम और दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है
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धीरे-धीरे विकसित होता है, लक्षण हल्के हो सकते हैं
गर्भकालीन डायबिटीज (GDM)
गर्भकालीन डायबिटीज गर्भावस्था के दौरान विकसित होती है और आमतौर पर प्रसव के बाद ठीक हो जाती है। हालांकि, यह माँ और बच्चे दोनों के लिए भविष्य में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ाती है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
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गर्भावस्था की पहली तिमाही में स्क्रीनिंग आवश्यक है
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24-28 सप्ताह में ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (OGTT) करवाना चाहिए
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प्रसव के 6 सप्ताह बाद और फिर हर 3 साल में जांच करवाएं
प्रीडायबिटीज
प्रीडायबिटीज एक चेतावनी संकेत है जहां रक्त शर्करा का स्तर सामान्य से अधिक होता है लेकिन डायबिटीज के रूप में वर्गीकृत करने के लिए पर्याप्त नहीं होता।
प्रीडायबिटीज की पहचान:
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टेस्ट |
मान |
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फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज (FPG) |
100-125 mg/dL |
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ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (OGTT) |
140-199 mg/dL |
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HbA1c |
5.7-6.4% |
Table 1: प्रीडायबिटीज के निदान मानदंड (ICMR)
डायबिटीज के लक्षण
प्रमुख लक्षण (Osmotic Symptoms)
डायबिटीज के सबसे सामान्य लक्षण उच्च रक्त शर्करा के कारण होते हैं:
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पॉलीयूरिया (Polyuria): बार-बार पेशाब आना, विशेष रूप से रात में (नॉक्टुरिया)
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पॉलीडिप्सिया (Polydipsia): अत्यधिक प्यास लगना
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पॉलीफेजिया (Polyphagia): अधिक भूख लगना
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अस्पष्ट वजन घटना: विशेष रूप से टाइप 1 डायबिटीज में
अन्य महत्वपूर्ण लक्षण
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थकान और कमजोरी महसूस होना
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धुंधला दिखाई देना (ब्लर्ड विज़न)
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घाव या चोट का धीरे-धीरे ठीक होना
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बार-बार संक्रमण होना (त्वचा, मूत्र मार्ग, फंगल इन्फेक्शन)
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हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन (पेरेस्थेसिया)
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गुप्तांग क्षेत्र में खुजली
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त्वचा में काले धब्बे (एकैन्थोसिस नाइग्रिकन्स)
महिलाओं में विशेष लक्षण
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बार-बार गर्भपात का इतिहास
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अधिक वजन वाले बच्चे का जन्म (>4 kg)
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योनि में यीस्ट इन्फेक्शन
महत्वपूर्ण नोट: टाइप 2 डायबिटीज में लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और कई वर्षों तक हल्के रह सकते हैं। कई लोगों को तब तक पता नहीं चलता जब तक कि नियमित जांच में रक्त शर्करा का स्तर ऊंचा न पाया जाए।
डायबिटीज के कारण और जोखिम कारक
टाइप 1 डायबिटीज के कारण
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ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया: शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर हमला करती है
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आनुवंशिक कारक: परिवार में डायबिटीज का इतिहास
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वायरल इन्फेक्शन: कुछ वायरस टाइप 1 डायबिटीज को ट्रिगर कर सकते हैं
टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम कारक
भारत में टाइप 2 डायबिटीज के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. जीवनशैली संबंधी कारक
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शारीरिक निष्क्रियता: व्यायाम की कमी और गतिहीन जीवनशैली
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अस्वास्थ्यकर आहार:
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अधिक चीनी और परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट का सेवन
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तले-भुने और फास्ट फूड का अत्यधिक उपयोग
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फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों की कमी
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शक्कर युक्त पेय पदार्थों का सेवन
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तंबाकू का उपयोग: धूम्रपान और अन्य तंबाकू उत्पाद
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अत्यधिक शराब का सेवन
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मोटापा और अधिक वजन: BMI greater then or equal to 27.5 kg/m² (भारतीयों के लिए)
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केंद्रीय मोटापा: पुरुषों में कमर परिधि >90 cm, महिलाओं में >80 cm
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उच्च रक्तचाप: BP greater then or equal to 140/90 mmHg
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डिस्लिपिडेमिया: ट्राइग्लिसराइड >250 mg/dL, HDL <40 mg/dL (पुरुष), <50 mg/dL (महिला)
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प्रथम-श्रेणी के रिश्तेदार में डायबिटीज
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भारतीयों में "thin-fat phenotype" - कम मांसपेशी द्रव्यमान और अधिक शरीर में वसा
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इंसुलिन स्राव की क्षमता में कमी
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पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)
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गर्भकालीन डायबिटीज का इतिहास
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हृदय रोग का इतिहास
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कुशिंग सिंड्रोम
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पुरानी तनाव की स्थिति
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30 वर्ष से अधिक आयु (स्क्रीनिंग अनिवार्य)
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पुरुषों में महिलाओं की तुलना में अधिक प्रसार
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शहरीकरण और आधुनिक जीवनशैली
भारत में डायबिटीज का बोझ
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-2021) के अनुसार, भारत में वयस्कों में डायबिटीज की समग्र व्यापकता 6.5% है। गोवा, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में उच्च और बढ़ती हुई व्यापकता देखी गई है।
डायबिटीज का निदान
स्क्रीनिंग के लिए कौन पात्र है?
ICMR दिशानिर्देशों के अनुसार निम्नलिखित व्यक्तियों को डायबिटीज स्क्रीनिंग करवानी चाहिए:
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मोटे या अधिक वजन वाले व्यक्ति (BMI 27.5 या 23 kg/m²) जिनमें निम्न में से कोई जोखिम कारक हो:
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प्रथम-श्रेणी के रिश्तेदार में डायबिटीज
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हृदय रोग का इतिहास
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उच्च रक्तचाप (140/90 mmHg)
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डिस्लिपिडेमिया
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शारीरिक निष्क्रियता
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PCOS
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इंसुलिन प्रतिरोध (एकैन्थोसिस नाइग्रिकन्स)
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30 वर्ष से अधिक आयु के सभी वयस्क
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गर्भकालीन डायबिटीज का पिछला इतिहास
निम्नलिखित लक्षणों या स्थितियों वाले किसी भी वयस्क/किशोर में तुरंत जांच:
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ऑस्मोटिक लक्षण (पॉलीयूरिया, पॉलीडिप्सिया, पॉलीफेजिया)
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अस्पष्ट वजन घटना
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तीव्र कोरोनरी सिंड्रोम
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गहरे संक्रमण (लिवर एब्सेस, निमोनिया, ट्यूबरक्लोसिस)
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बार-बार संक्रमण
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न भरने वाले घाव (फुट अल्सर)
निदान परीक्षण
डायबिटीज का निदान निम्नलिखित में से किसी एक परीक्षण के आधार पर किया जाता है:
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परीक्षण |
डायबिटीज का निदान |
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फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज (FPG) |
126 mg/dL |
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(8 घंटे उपवास के बाद) |
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2-घंटे प्लाज्मा ग्लूकोज |
200 mg/dL |
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(75g OGTT के दौरान) |
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HbA1c |
6.5% |
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रैंडम प्लाज्मा ग्लूकोज |
200 mg/dL |
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+ डायबिटीज के लक्षण |
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Table 2: डायबिटीज निदान मानदंड (ICMR)
प्रारंभिक जांच
डायबिटीज के निदान के बाद निम्नलिखित जांचें आवश्यक हैं:
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HbA1c (ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन)
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क्रिएटिनिन और पोटेशियम (K+)
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फास्टिंग लिपिड प्रोफाइल
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मूत्र नियमित परीक्षण और स्पॉट एल्बुमिन: क्रिएटिनिन अनुपात
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लीवर फंक्शन टेस्ट (LFT/ALT, AST)
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इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG)
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अन्य जैसे इको, USG पेट जैसा संकेत मिले
शारीरिक परीक्षण
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बॉडी मास इंडेक्स (BMI) और कमर परिधि
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रक्तचाप (BP)
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परिधीय नाड़ी (Peripheral pulses)
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त्वचा, मौखिक गुहा और पैर की जांच
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फंडस परीक्षण (डाइलेटेड)
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पिन-प्रिक संवेदना, मोनोफिलामेंट टेस्ट, कंपन, डीप टेंडन रिफ्लेक्स
डायबिटीज और अनियंत्रित ब्लड शुगर स्तर हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है। यदि लंबे समय तक प्रयास के बाद भी प्रेग्नेंसी संभव नहीं हो पा रही है, तो IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) एक प्रभावी विकल्प हो सकता है। ऐसे में सही क्लिनिक का चयन करना और दिल्ली में IVF की लागत और रांची में IVF की लागत की जानकारी लेना आपके लिए मददगार साबित हो सकता है।
डायबिटीज का उपचार और प्रबंधन
चयापचय लक्ष्य (Metabolic Targets)
ICMR के अनुसार निम्नलिखित लक्ष्यों को प्राप्त करना चाहिए:
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पैरामीटर |
लक्ष्य मान |
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HbA1c |
7.0% |
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(बुजुर्गों में अधिक स्वीकार्य) |
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प्री-प्रांडियल कैपिलरी प्लाज्मा ग्लूकोज |
80-130 mg/dL |
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पोस्ट-प्रांडियल कैपिलरी प्लाज्मा ग्लूकोज |
<180 mg/dL |
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रक्तचाप (BP) |
140/90 mmHg |
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(CKD में 130/80) |
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LDL कोलेस्ट्रॉल |
<100 mg/dL |
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(CAD में <70 mg/dL) |
Table 3: डायबिटीज प्रबंधन के लक्ष्य
जीवनशैली में परिवर्तन (सबसे महत्वपूर्ण)
1. आहार संशोधन
स्वस्थ भारतीय आहार योजना में शामिल करें:
शामिल करें:
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साबुत अनाज: रागी, ज्वार, बाजरा, ब्राउन राइस, ओट्स, जौ
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दालें और फलियां: मूंग दाल, मसूर दाल, चना, राजमा
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गैर-स्टार्चयुक्त सब्जियां: करेला, पालक, भिंडी, टमाटर, बैंगन, फूलगोभी
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प्रोटीन: अंडे का सफेद भाग, चिकन ब्रेस्ट, मछली (रोहू, सालमन), पनीर, टोफू
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स्वस्थ वसा: नट्स, बीज, जैतून का तेल, थोड़ा घी
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मसाले: मेथी, हल्दी, करी पत्ता, जीरा
सीमित करें या बचें:
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सफेद चावल, मैदा, और परिष्कृत अनाज
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चीनी, मिठाई, और शक्कर युक्त पेय
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तले-भुने खाद्य पदार्थ और फास्ट फूड
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ट्रांस फैट और संसाधित खाद्य पदार्थ
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अधिक आलू और उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ
आहार योजना के सिद्धांत:
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कार्बोहाइड्रेट: 60-65% (जटिल कार्बोहाइड्रेट)
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प्रोटीन: 15-20%
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वसा: 20-25% (स्वस्थ वसा)
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दिन में 5-6 छोटे भोजन लें
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प्रत्येक भोजन में प्रोटीन + फाइबर + स्वस्थ वसा संतुलित करें
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प्रतिदिन कम से कम 30-45 मिनट व्यायाम
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एरोबिक व्यायाम: तेज चलना, साइकिलिंग, तैराकी
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शक्ति प्रशिक्षण: सप्ताह में 2-3 बार
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योग और प्राणायाम: तनाव प्रबंधन के लिए
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लंबे समय तक बैठने से बचें
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तंबाकू का परहेज (धूम्रपान बंद करें)
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शराब का सेवन सीमित करें या बचें
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पर्याप्त नींद (7-8 घंटे)
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तनाव प्रबंधन: ध्यान, योग, गहरी सांस लेना
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नियमित रक्त शर्करा की निगरानी
औषधि चिकित्सा (Pharmacotherapy)
ICMR दिशानिर्देशों के अनुसार दवा उपचार HbA1c स्तर पर निर्भर करता है:
HbA1c < 8.5%: मोनोथेरेपी
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मेटफॉर्मिन (Metformin): प्रथम-पंक्ति दवा
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प्रारंभिक खुराक: 500 mg दिन में दो बार
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धीरे-धीरे बढ़ाएं: अधिकतम 2000-2500 mg/दिन
HbA1c 8.5-10%: दोहरी चिकित्सा
मेटफॉर्मिन + निम्नलिखित में से एक:
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सल्फोनीलयूरिया (SU's): ग्लिमेपिराइड, ग्लिबेंक्लामाइड
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थियाजोलिडाइनडायोन (TZD): पायोग्लिटाजोन
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DPP-4 अवरोधक (DPP-4i): सिटाग्लिप्टिन, विल्डाग्लिप्टिन
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SGLT-2 अवरोधक (SGLT-2i): डैपाग्लिफ्लोजिन, एम्पाग्लिफ्लोजिन
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अल्फा-ग्लूकोसिडेज अवरोधक (AGI): एकरबोस
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GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1RA): लिराग्लूटाइड
HbA1c > 10%: ट्रिपल थेरेपी या इंसुलिन
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बेसल इंसुलिन + मेटफॉर्मिन + अन्य OAD
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या तीन मौखिक एंटीडायबिटिक दवाओं का संयोजन
इंसुलिन थेरेपी
इंसुलिन की आवश्यकता कब होती है:
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टाइप 1 डायबिटीज में हमेशा
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टाइप 2 में जब मौखिक दवाएं पर्याप्त नियंत्रण नहीं देतीं
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गर्भावस्था के दौरान (यदि आहार नियंत्रण अपर्याप्त है)
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गंभीर बीमारी, सर्जरी, या संक्रमण के दौरान
इंसुलिन के प्रकार:
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प्रकार |
प्रभाव की शुरुआत |
अवधि |
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रैपिड-एक्टिंग |
15 मिनट |
3-5 घंटे |
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शॉर्ट-एक्टिंग |
30-60 मिनट |
5-8 घंटे |
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इंटरमीडिएट-एक्टिंग |
1-3 घंटे |
12-16 घंटे |
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लॉन्ग-एक्टिंग |
1-2 घंटे |
20-24 घंटे |
Table 4: इंसुलिन के प्रकार और उनकी विशेषताएं
सह-रुग्णताओं का प्रबंधन
डायबिटीज के साथ अक्सर अन्य स्थितियां होती हैं जिनका प्रबंधन आवश्यक है:
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उच्च रक्तचाप: ACE inhibitors या ARBs
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डिस्लिपिडेमिया: स्टैटिन थेरेपी
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हृदय रोग: एस्पिरिन, बीटा-ब्लॉकर्स
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गुर्दे की बीमारी: नेफ्रोलॉजिस्ट को रेफरल
डायबिटीज की जटिलताएं
तीव्र जटिलताएं
1. हाइपोग्लाइसीमिया (Low Blood Sugar)
कारण:
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भोजन छोड़ना या देरी से खाना
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अधिक इंसुलिन या दवा की खुराक
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अत्यधिक व्यायाम
लक्षण:
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कंपकंपी, पसीना आना
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चक्कर आना, भ्रम
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तेज धड़कन, चिंता
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भूख लगना, चिड़चिड़ापन
तुरंत उपचार: 15-20 ग्राम तेज अवशोषित कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज टैबलेट, जूस, शहद)
2. हाइपरग्लाइसेमिक क्राइसिस
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डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA): टाइप 1 में अधिक
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हाइपरोस्मोलर हाइपरग्लाइसेमिक स्टेट (HHS): टाइप 2 में अधिक
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दोनों चिकित्सा आपातकाल हैं - तुरंत अस्पताल जाएं
दीर्घकालिक जटिलताएं
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कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD)
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हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बढ़ा हुआ जोखिम
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परिधीय धमनी रोग
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दिल की विफलता
2. गुर्दे की क्षति (Diabetic Nephropathy)
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प्रोटीनुरिया (मूत्र में प्रोटीन)
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क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD)
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अंतिम चरण में डायलिसिस की आवश्यकता
3. आंखों की क्षति (Diabetic Retinopathy)
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रेटिना में रक्त वाहिकाओं को नुकसान
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धुंधली दृष्टि और अंधापन का कारण बन सकता है
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नियमित नेत्र परीक्षण आवश्यक (वार्षिक फंडस परीक्षा)
4. तंत्रिका क्षति (Diabetic Neuropathy)
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परिधीय न्यूरोपैथी: हाथ-पैरों में सुन्नपन, झुनझुनी, दर्द
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स्वायत्त न्यूरोपैथी: पाचन, मूत्राशय, यौन कार्य को प्रभावित
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गैस्ट्रोपेरेसिस: पेट खाली होने में देरी
5. पैर की समस्याएं (Diabetic Foot)
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न्यूरोपैथी और खराब रक्त प्रवाह के कारण
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अल्सर और संक्रमण
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गंभीर मामलों में विच्छेदन की आवश्यकता हो सकती है
डायबिटिक फुट की देखभाल:
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रोजाना पैरों की जांच करें
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उचित जूते पहनें (तंग या नुकीले नहीं)
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पैरों को साफ और सूखा रखें
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नाखून सावधानी से काटें
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कॉर्न्स या कैलस को स्वयं न हटाएं
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किसी भी घाव या बदलाव को तुरंत दिखाएं
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बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण
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डायबिटिक डर्मोपैथी
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एकैन्थोसिस नाइग्रिकन्स
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खुजली और शुष्क त्वचा
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सुनने की क्षमता में कमी
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दंत रोग और मसूड़ों की समस्याएं
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अवसाद और मनोभ्रंश का बढ़ा हुआ जोखिम
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यौन रोग (erectile dysfunction पुरुषों में)
डायबिटीज की निगरानी
नियमित निगरानी आवश्यक है
ICMR दिशानिर्देशों के अनुसार:
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परीक्षण |
आवृत्ति |
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रक्त ग्लूकोज (FPG और 2-hr PPG) |
मासिक या अधिक बार |
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HbA1c |
हर 6-12 महीने |
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(अनियंत्रित में हर 3 महीने) |
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ECG |
वार्षिक |
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मूत्र एल्बुमिन क्रिएटिनिन अनुपात |
वार्षिक |
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डाइलेटेड फंडस्कोपी |
निदान पर और फिर वार्षिक |
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पैर की परीक्षा |
वार्षिक या अधिक बार |
Table 5: डायबिटीज निगरानी अनुसूची
स्व-निगरानी (Self-Monitoring of Blood Glucose - SMBG)
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होम ग्लूकोमीटर का उपयोग करें
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इंसुलिन पर: दिन में 3-4 बार जांचें
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मौखिक दवाओं पर: सप्ताह में 2-3 बार
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खाली पेट और भोजन के 2 घंटे बाद जांचें
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रिकॉर्ड बनाए रखें
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एंडोक्रिनोलॉजिस्ट: अनियंत्रित हाइपरग्लाइसेमिया के लिए
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नेत्र रोग विशेषज्ञ: प्रारंभिक मूल्यांकन और हर साल
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नेफ्रोलॉजिस्ट: गुर्दे की कार्यक्षमता के लिए
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हृदय रोग विशेषज्ञ: CAD/HF/arrhythmia के लिए
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पोडियाट्रिस्ट: पैर की समस्याओं के लिए
डायबिटीज की रोकथाम
प्रीडायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज को रोका जा सकता है
शोध से पता चला है कि जीवनशैली में बदलाव से प्रीडायबिटीज से टाइप 2 डायबिटीज में प्रगति को 58% तक कम किया जा सकता है।
रोकथाम रणनीतियां
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यदि अधिक वजन है तो 5-7% वजन कम करें
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स्वस्थ BMI बनाए रखें (<25 kg/m²)
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कमर परिधि को नियंत्रित रखें
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साबुत अनाज, फल, सब्जियां, दालें खाएं
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प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और चीनी सीमित करें
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पर्याप्त फाइबर का सेवन (25-30 ग्राम/दिन)
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स्वस्थ वसा चुनें (नट्स, बीज, जैतून का तेल)
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प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट मध्यम व्यायाम
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सप्ताह में 150 मिनट एरोबिक व्यायाम
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शक्ति प्रशिक्षण सप्ताह में 2-3 बार
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सक्रिय जीवनशैली अपनाएं
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तंबाकू के सभी रूपों से बचें
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शराब का सेवन सीमित करें या बचें
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नियमित योग और ध्यान का अभ्यास करें
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पर्याप्त नींद लें (7-8 घंटे)
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तनाव कम करने की तकनीकें सीखें
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30 वर्ष के बाद हर साल जांच करवाएं
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जोखिम कारक होने पर अधिक बार जांचें
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प्रीडायबिटीज में हर साल परीक्षण करवाएं
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स्कूलों में स्वास्थ्य शिक्षा
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कार्यस्थल पर स्वास्थ्य कार्यक्रम
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सार्वजनिक जागरूकता अभियान
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स्वस्थ खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बढ़ाना
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शारीरिक गतिविधि के लिए सुविधाएं
भारत सरकार की योजनाएं और सहायता
भारत में डायबिटीज रोगियों के लिए सरकार कई कार्यक्रम और सहायता प्रदान करती है:
1. राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPCDCS)
राष्ट्रीय कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम (NPCDCS) राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संचालित है।
कार्यक्रम के उद्देश्य:
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बुनियादी ढांचे को मजबूत करना
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मानव संसाधन विकास
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स्वास्थ्य संवर्धन और जागरूकता सृजन
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प्रारंभिक निदान और प्रबंधन
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उपयुक्त स्वास्थ्य सुविधा में रेफरल
स्क्रीनिंग कार्यक्रम:
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30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों की स्क्रीनिंग
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आयुष्मान भारत - स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों में एकीकृत सेवा
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व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल का हिस्सा
कार्यक्रम घटक:
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जिला NPCDCS कार्यक्रम (626 जिले)
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मेडिकल कॉलेजों में NCD फोकल सेंटर (54 मेडिकल कॉलेज)
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राज्य/केंद्र शासित प्रदेश NCD सेल (35)
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राष्ट्रीय NCD सेल केंद्र में
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सूचना शिक्षा और संचार (IEC)/व्यवहार परिवर्तन संचार (BCC)
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क्षमता निर्माण और अनुसंधान
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राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को आवश्यक दवाओं के लिए वित्तीय सहायता
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गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए इंसुलिन सहित मुफ्त दवाएं
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सरकारी अस्पतालों में मुफ्त या अत्यधिक सब्सिडी वाला उपचार
3. प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP)
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सभी के लिए किफायती कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं
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इंसुलिन और अन्य डायबिटीज की दवाएं उपलब्ध
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राज्य सरकारों के सहयोग से संचालित
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देशभर में जनऔषधि केंद्र
4. आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY)
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10.74 करोड़ पात्र परिवारों के लिए इन-पेशेंट देखभाल
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SECC 2011 डेटाबेस के अनुसार पात्रता
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कैशलेस अस्पताल में भर्ती
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प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का कवरेज
5. आयुष्मान भारत - स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र (AB-HWC)
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सेवा वितरण में डायबिटीज की स्क्रीनिंग शामिल
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व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल
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NCD की रोकथाम, नियंत्रण और स्क्रीनिंग
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समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं
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जैव प्रौद्योगिकी विभाग का 'क्रोनिक डिजीज प्रोग्राम'
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डायबिटीज पर अनुसंधान परियोजनाओं को सहायता
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आणविक तंत्र और नए दवा लक्ष्यों पर शोध
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टाइप 2 डायबिटीज और जटिलताओं पर फोकस
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राज्य सरकारों को तकनीकी और वित्तीय सहायता
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60:40 अनुपात में केंद्र-राज्य हिस्सेदारी
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पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए 90:10 अनुपात
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NCD फ्लेक्सी-पूल के माध्यम से धन
सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं से कैसे लाभ उठाएं
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अपने नजदीकी आयुष्मान भारत HWC पर जाएं
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उप-केंद्र, PHC, CHC, या जिला अस्पताल में स्क्रीनिंग करवाएं
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AB-PMJAY के तहत पात्रता की जांच करें
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नजदीकी जनऔषधि केंद्र से किफायती दवाएं खरीदें
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मुफ्त या सब्सिडी वाली सेवाओं के लिए सरकारी अस्पताल से संपर्क करें
हेल्पलाइन और संपर्क:
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आयुष्मान भारत हेल्पलाइन: 14555
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन: https://nhm.gov.in
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प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना: https://janaushadhi.gov.in
आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा
भारत सरकार डायबिटीज की रोकथाम और नियंत्रण में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों (आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी - AYUSH) के विस्तार को बढ़ावा देती है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
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करेला (कड़वा तरबूज): रक्त शर्करा को कम करने में मदद
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मेथी के बीज: इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार
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गुड़मार (Gymnema sylvestre): शर्करा अवशोषण को कम करता है
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नीम: रक्त शुद्धिकरण और ग्लूकोज नियंत्रण
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तुलसी: तनाव कम करती है और ग्लूकोज को नियंत्रित करती है
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दालचीनी: इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाती है
योग और प्राणायाम
डायबिटीज प्रबंधन के लिए लाभकारी योगासन:
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सूर्य नमस्कार (Sun Salutation)
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पश्चिमोत्तानासन (Seated Forward Bend)
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धनुरासन (Bow Pose)
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अर्ध मत्स्येन्द्रासन (Half Spinal Twist)
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शवासन (Corpse Pose)
प्राणायाम तकनीक:
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कपालभाति
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अनुलोम-विलोम (नाड़ी शोधन)
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भ्रामरी प्राणायाम
महत्वपूर्ण सावधानी: आयुर्वेदिक उपचार को आधुनिक चिकित्सा के पूरक के रूप में उपयोग करें, न कि प्रतिस्थापन के रूप में। अपने डॉक्टर से परामर्श के बिना निर्धारित दवाएं न छोड़ें।
सामान्य प्रश्न (FAQs)
1. क्या डायबिटीज ठीक हो सकती है?
वर्तमान में डायबिटीज का कोई स्थायी इलाज नहीं है। हालांकि, उचित प्रबंधन के साथ इसे नियंत्रित किया जा सकता है और स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। टाइप 2 डायबिटीज को शुरुआती चरणों में जीवनशैली परिवर्तन और वजन घटाने के माध्यम से उलटा या नियंत्रित किया जा सकता है (remission), लेकिन निरंतर प्रयास आवश्यक है
2. मुझे कितनी बार अपनी रक्त शर्करा की जांच करनी चाहिए?
इंसुलिन पर: दिन में 3-4 बार (भोजन से पहले और 2 घंटे बाद)
मौखिक दवाओं पर: सप्ताह में 2-3 बार या डॉक्टर की सलाह के अनुसार
HbA1c परीक्षण: हर 3-6 महीने में (नियंत्रण के आधार पर)
3. क्या डायबिटीज रोगी फल खा सकते हैं?
हाँ, लेकिन सीमित मात्रा में और सही फल चुनें। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल बेहतर हैं:
अच्छे विकल्प: अमरूद, सेब, नाशपाती, संतरा, पपीता, जामुन (कम मात्रा में)
सीमित करें: आम, केला, अंगूर, चीकू (बहुत कम मात्रा में)
सुझाव: फलों को भोजन के बीच में स्नैक के रूप में खाएं, न कि भोजन के तुरंत बाद
4. क्या तनाव रक्त शर्करा को प्रभावित करता है?
हाँ, तनाव हार्मोन (कोर्टिसोल, एड्रेनालाईन) रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ा सकते हैं। नियमित योग, ध्यान, और तनाव प्रबंधन तकनीकें डायबिटीज नियंत्रण में मदद करती हैं
5. क्या मैं डायबिटीज के साथ सामान्य जीवन जी सकता हूँ?
बिल्कुल! उचित प्रबंधन, नियमित दवाएं, स्वस्थ आहार और व्यायाम के साथ, डायबिटीज के साथ लोग पूरी तरह से सामान्य, सक्रिय और उत्पादक जीवन जी सकते हैं। कुंजी है: नियमित निगरानी और अनुशासित जीवनशैली
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6. क्या डायबिटीज वंशानुगत है?
आनुवंशिकी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि माता-पिता या भाई-बहन को डायबिटीज है, तो जोखिम बढ़ जाता है। हालांकि, जीवनशैली कारक भी महत्वपूर्ण हैं। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप जोखिम को काफी कम कर सकते हैं
7. हाइपोग्लाइसीमिया के दौरान क्या करें?
तुरंत 15-20 ग्राम तेज अवशोषित कार्बोहाइड्रेट लें:
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3-4 ग्लूकोज टैबलेट
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आधा कप फलों का रस
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1 चम्मच शहद या चीनी
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5-6 कैंडी
15 मिनट प्रतीक्षा करें और फिर से जांचें। यदि अभी भी कम है, तो दोहराएं। यदि गंभीर (बेहोश), तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
8. क्या गर्भावस्था में डायबिटीज खतरनाक है?
गर्भकालीन डायबिटीज को उचित प्रबंधन की आवश्यकता होती है लेकिन नियंत्रित की जा सकती है। अनियंत्रित छोड़ दिया जाए तो यह माँ और बच्चे दोनों के लिए जटिलताएं पैदा कर सकता है। नियमित प्रसवपूर्व देखभाल, रक्त शर्करा निगरानी, और डॉक्टर की सलाह का पालन आवश्यक है।
9. डायबिटीज में कौन सी सब्जियां सबसे अच्छी हैं?
सर्वोत्तम विकल्प (कम कार्बोहाइड्रेट, उच्च फाइबर):
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पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, सरसों
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करेला (विशेष रूप से लाभकारी)
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भिंडी, लौकी, तोरी
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फूलगोभी, ब्रोकली, बंद गोभी
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टमाटर, खीरा, मूली
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बैंगन, शिमला मिर्च
सीमित करें: आलू, शकरकंद, अरबी, कच्चा केला (उच्च स्टार्च)
10. क्या डायबिटीज रोगी उपवास कर सकते हैं?
उपवास संभव है लेकिन सावधानी और डॉक्टर की सलाह के साथ। इंसुलिन या दवा की खुराक समायोजन की आवश्यकता हो सकती है। हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षणों के प्रति सतर्क रहें। लंबे उपवास से बचें और नियमित रक्त शर्करा निगरानी करें।
11. क्या चावल पूरी तरह से छोड़ना चाहिए?
सफेद चावल को सीमित करें (उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स)। बेहतर विकल्प:
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ब्राउन राइस (छोटे भाग में)
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मिलेट्स (रागी, ज्वार, बाजरा)
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जौ, जई
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साबुत गेहूं रोटी
पूरी तरह से छोड़ना आवश्यक नहीं, लेकिन भाग नियंत्रण महत्वपूर्ण है।
12. व्यायाम रक्त शर्करा को कैसे प्रभावित करता है?
व्यायाम रक्त शर्करा को कम करता है (मांसपेशियां ग्लूकोज का उपयोग करती हैं)। नियमित व्यायाम इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करता है। हालांकि, व्यायाम के दौरान हाइपोग्लाइसीमिया से बचने के लिए:
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व्यायाम से पहले रक्त शर्करा जांचें
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यदि बहुत कम है, तो पहले स्नैक लें
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ग्लूकोज टैबलेट साथ रखें
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धीरे-धीरे शुरू करें और बढ़ाएं
13. किन खाद्य पदार्थों से पूरी तरह बचना चाहिए?
पूरी तरह बचें:
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शक्कर युक्त पेय (सोडा, पैक्ड जूस)
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मिठाइयां और कैंडी
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सफेद ब्रेड, मैदा उत्पाद
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तले-भुने खाद्य पदार्थ (समोसे, पकौड़े)
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फास्ट फूड और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ
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ट्रांस फैट (वनस्पति तेल, मार्जरीन)
14. डायबिटीज में पैरों की देखभाल क्यों महत्वपूर्ण है?
डायबिटीज तंत्रिका क्षति (न्यूरोपैथी) और खराब रक्त प्रवाह का कारण बनती है। इससे:
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संवेदना में कमी (चोट या घाव महसूस नहीं होता)
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धीमी उपचार प्रक्रिया
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संक्रमण का उच्च जोखिम
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गंभीर मामलों में विच्छेदन
रोजाना पैरों की जांच, उचित जूते, और तुरंत चिकित्सा ध्यान आवश्यक है।
15. डायबिटीज के लिए सबसे अच्छा व्यायाम कौन सा है?
सर्वोत्तम व्यायाम संयोजन:
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एरोबिक: तेज चलना (सबसे सुरक्षित और प्रभावी), साइकिलिंग, तैराकी
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शक्ति प्रशिक्षण: हल्के वजन या प्रतिरोध बैंड (सप्ताह में 2-3 बार)
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योग: लचीलापन और तनाव कम करने के लिए
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दैनिक गतिविधियां: सीढ़ियां चढ़ना, बागवानी, घर के काम
लक्ष्य: प्रतिदिन 30-45 मिनट, सप्ताह में कम से कम 5 दिन
सारांश और मुख्य बिंदु
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य
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डायबिटीज प्रबंधनीय है: उचित देखभाल के साथ, आप स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
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प्रारंभिक निदान महत्वपूर्ण है: 30 वर्ष के बाद नियमित स्क्रीनिंग करवाएं।
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जीवनशैली सबसे शक्तिशाली उपकरण है: आहार, व्यायाम और तनाव प्रबंधन दवाओं से अधिक महत्वपूर्ण हैं।
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नियमित निगरानी आवश्यक है: रक्त शर्करा, HbA1c, और वार्षिक जटिलता जांच।
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दवाएं नियमित रूप से लें: डॉक्टर की सलाह के बिना कभी न छोड़ें।
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जटिलताएं रोकी जा सकती हैं: अच्छे नियंत्रण से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।
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सरकारी सहायता उपलब्ध है: NPCDCS, PMBJP, AB-PMJAY का लाभ उठाएं।
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परिवार का समर्थन महत्वपूर्ण है: डायबिटीज प्रबंधन में परिवार को शामिल करें।
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शिक्षा और जागरूकता: अपनी स्थिति को समझें और सूचित रहें।
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कभी हार न मानें: प्रयास जारी रखें, प्रत्येक छोटा कदम मायने रखता है।
आपातकालीन स्थितियों में क्या करें
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स्थिति |
तुरंत कार्रवाई |
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गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया |
तुरंत अस्पताल जाएं |
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(बेहोशी, दौरे) |
ग्लूकागन इंजेक्शन (यदि उपलब्ध) |
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बहुत उच्च रक्त शर्करा |
तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें |
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(>400 mg/dL) + उल्टी/भ्रम |
आपातकालीन कक्ष जाएं |
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गैर-उपचार योग्य पैर का घाव |
24 घंटे के भीतर डॉक्टर को दिखाएं |
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या संक्रमण |
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छाती में दर्द या सांस लेने |
तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं (102/108) |
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में कठिनाई |
यह हार्ट अटैक हो सकता है |
Table 6: आपातकालीन स्थितियां और प्रतिक्रिया
भारतीय संदर्भ में डायबिटीज प्रबंधन: व्यावहारिक सुझाव
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रागी, ज्वार, बाजरा (मिलेट्स) सस्ते और पौष्टिक हैं
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मौसमी सब्जियां खरीदें (सस्ती और ताजा)
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दालें प्रोटीन का सस्ता स्रोत हैं
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स्थानीय बाजार से खरीदारी करें
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घर का बना खाना हमेशा बेहतर और सस्ता है
व्यायाम के लिए सुझाव (बिना जिम के)
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सुबह या शाम तेज चलना (मुफ्त और सुरक्षित)
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योग (घर पर या पार्क में)
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सीढ़ियां चढ़ना (लिफ्ट के बजाय)
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घर के काम सक्रियता से करें
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बच्चों या पोते-पोतियों के साथ खेलें
सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियां
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त्योहारों और शादियों में: छोटे हिस्से लें, मिठाई सीमित करें, अधिक सब्जियां और सलाद खाएं
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सामाजिक दबाव: परिवार और दोस्तों को अपनी स्थिति के बारे में बताएं
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भोजन की पेशकश: विनम्रता से मना करना सीखें
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बाहर खाना: ग्रिल्ड या बेक्ड विकल्प चुनें, तंदूरी खाना बेहतर है
निष्कर्ष
डायबिटीज एक गंभीर लेकिन प्रबंधनीय स्थिति है। भारत में 74.2 मिलियन से अधिक लोग इससे प्रभावित हैं, लेकिन सही जानकारी, नियमित देखभाल, और स्वस्थ जीवनशैली के साथ, डायबिटीज के साथ भी पूर्ण और सक्रिय जीवन जिया जा सकता है।
याद रखें:
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प्रारंभिक निदान और नियमित निगरानी जीवन बचा सकते हैं
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जीवनशैली में बदलाव सबसे शक्तिशाली उपचार है
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सरकारी योजनाएं मदद के लिए उपलब्ध हैं
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परिवार और समुदाय का समर्थन महत्वपूर्ण है
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कभी हार न मानें - हर दिन एक नई शुरुआत है
आज ही अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी लें। यदि आपको डायबिटीज के लक्षण हैं या जोखिम कारक हैं, तो तुरंत जांच करवाएं। यदि आपको डायबिटीज है, तो नियमित डॉक्टर के पास जाएं, दवाएं लें, और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। आपका स्वास्थ्य आपके हाथों में है!
संदर्भ और सरकारी संसाधन
-
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): https://nhm.gov.in
-
NPCDCS कार्यक्रम: https://nhm.gov.in/index1.php?lang=1&level=2&sublinkid=1048&lid=604
-
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR): https://www.icmr.gov.in
-
आयुष्मान भारत: https://pmjay.gov.in
-
प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना: https://janaushadhi.gov.in
-
WHO भारत - डायबिटीज: https://www.who.int/india/health-topics/diabetes
-
Press Information Bureau (PIB): https://pib.gov.in
-
आयुष्मान भारत हेल्पलाइन: 14555
-
राष्ट्रीय आपातकालीन सेवा: 102, 108
-
स्वास्थ्य सूचना हेल्पलाइन: 104
References
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Press Information Bureau, Government of India. (2022). Steps Taken by Government to support Diabetes Patients. Ministry of Health & Family Welfare. https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1882179
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Indian Council of Medical Research (ICMR). (2022). ICMR Standard Treatment Workflow (STW) - Diabetes Mellitus Type 2. Department of Health Research, Ministry of Health and Family Welfare, Government of India. https://www.icmr.gov.in
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अस्वीकरण: यह दस्तावेज़ केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी चिकित्सा स्थिति के बारे में हमेशा अपने डॉक्टर या अन्य योग्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श करें।