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गर्भावस्था के 4 वें महीने में उल्टी

गर्भावस्था के 4 वें महीने में उल्टी

Gynecologist & IVF Specialist, Vinsfertility Hospital 18+ Years Experience • 1,000+ Successful Live Births

गर्भावस्था के दौरान मतली और उल्टी एक सामान्य समस्या हो सकती है, जिसे आमतौर पर "मॉर्निंग सिकनेस" के नाम से जाना जाता है। हालांकि, यह केवल सुबह नहीं, बल्कि दिन के किसी भी समय हो सकती है। यह लक्षण गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में, लगभग 5 सप्ताह की गर्भावस्था में शुरू होते हैं, और आमतौर पर 9 सप्ताह के आस-पास अपने चरम पर होते हैं। अधिकांश महिलाओं को यह समस्या 16 से 18 सप्ताह तक होती है, जबकि कुछ महिलाओं में यह ज्यादा समय तक बनी रह सकती है। अधिकांश महिलाओं के लिए यह हल्के लक्षण होते हैं, लेकिन कुछ के लिए यह अधिक गंभीर हो सकते हैं।
 

हाइपरएमेसिस ग्रेविडरम: एक गंभीर रूप

गर्भावस्था के दौरान यदि उल्टी अत्यधिक और लगातार हो, तो इसे हाइपरएमेसिस ग्रेविडरम कहा जाता है। यह एक गंभीर स्थिति है, जिसमें महिलाओं को इतनी अधिक उल्टी होती है कि उनका वजन घटने लगता है और वे निर्जलित हो जाती हैं। हाइपरएमेसिस ग्रेविडरम के कारण महिला का शरीर उचित पोषण प्राप्त नहीं कर पाता, जिससे उसे कीटोसिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कीटोसिस के लक्षणों में थकान, सांसों की दुर्गंध और चक्कर आना शामिल हो सकते हैं। इस स्थिति में महिला को तुरंत चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है। यदि इसे सही समय पर नहीं संभाला जाता, तो यह गर्भावस्था में अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।
 

गर्भावस्था के दौरान मतली और उल्टी के कारण(What causes nausea and vomiting during pregnancy?)

गर्भावस्था में मतली और उल्टी की समस्या मुख्य रूप से हार्मोनल बदलावों के कारण होती है। गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में शरीर में hCG (ह्यूमन कोरियोनिक गोनेडोट्रॉपिन) और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ता है, जो पेट के पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं और मतली और उल्टी का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा, प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ने से पाचन तंत्र की गति धीमी हो जाती है, जिससे भी मतली और उल्टी की समस्या उत्पन्न हो सकती है। कुछ महिलाओं में आयरन सप्लीमेंट्स का सेवन भी मतली का कारण बन सकता है। इसके अलावा, कुछ गर्भवती महिलाओं में पेट के संक्रमण जैसे गैस्ट्रोएन्टेराइटिस, एपेंडिसाइटिस या कोलेसिस्टाईटिस जैसी स्थितियां भी उल्टी का कारण हो सकती हैं। सिरदर्द, माइग्रेन और अन्य मस्तिष्क संबंधी विकार भी इस समस्या में योगदान कर सकते हैं।
 

गर्भावस्था के दौरान मतली और उल्टी का मूल्यांकन

यदि किसी महिला को गर्भावस्था के दौरान मतली और उल्टी के गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर सबसे पहले यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि क्या ये लक्षण सामान्य गर्भावस्था से संबंधित हैं या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत दे रहे हैं। अगर लक्षण अधिक गंभीर हो, तो डॉक्टर इसके लिए विभिन्न परीक्षण कर सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान कुछ संकेतों से पता चलता है कि उल्टी सामान्य से ज्यादा गंभीर हो सकती है, जैसे लगातार उल्टी, पेट में दर्द, निर्जलीकरण के लक्षण, बुखार और गर्भावस्था के 24 सप्ताह बाद भ्रूण में हलचल न होना। इन सभी लक्षणों के बारे में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए, ताकि स्थिति का सही तरीके से मूल्यांकन किया जा सके।
 

गर्भावस्था के दौरान मतली और उल्टी का इलाज

गर्भावस्था के दौरान मतली और उल्टी से राहत पाने के लिए आहार और जीवनशैली में कुछ बदलाव बेहद मददगार हो सकते हैं। सबसे पहले, महिलाओं को छोटे-छोटे और बार-बार भोजन करने की सलाह दी जाती है। दिन में 5 से 6 छोटे भोजन करना और भूख लगने से पहले खाना खा लेना मददगार साबित हो सकता है। इसके अलावा, हल्के, मसाले रहित खाद्य पदार्थों जैसे केले, चावल, सेब की चटनी और सूखा टोस्ट (BRAT आहार) खाने से राहत मिल सकती है। कुछ महिलाओं को गर्म पेय पदार्थ या कार्बोनेटेड पेय (सोडा) पीने से भी राहत मिलती है। अदरक का सेवन भी एक प्रभावी घरेलू उपाय हो सकता है, जैसे अदरक के कैप्सूल या लॉलीपॉप का सेवन करना। यदि घरेलू उपायों से कोई राहत नहीं मिलती है, तो डॉक्टर एंटीमैटिक दवाइयों का सेवन करने की सलाह देते हैं, जैसे विटामिन B6, डॉक्सिलामाइन, मेटोक्लोप्रमाइड या ऑनडेंसेट्रॉन।
 

डिहाइड्रेशन के मामलों में इंट्रावीनस फ्लूइड्स:

जब उल्टी के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो महिला को इंट्रावीनस फ्लूइड्स दिए जा सकते हैं, जिसमें ग्लूकोज़, इलेक्ट्रोलाइट्स और विटामिन्स होते हैं। ये फ्लूइड्स शरीर को आवश्यक पोषण और जल प्रदान करते हैं और निर्जलीकरण की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं।
 

FAQ:

1. गर्भावस्था में मॉर्निंग सिकनेस कब शुरू होती है और कितने समय तक रहती है?

मॉर्निंग सिकनेस आमतौर पर 5-6 सप्ताह में शुरू होती है और 9 सप्ताह के आसपास चरम पर पहुंचती है। यह आमतौर पर 16-18 सप्ताह तक रहती है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह अधिक समय तक हो सकती है।
 

2. क्या गर्भावस्था में उल्टी सिर्फ "मॉर्निंग सिकनेस" होती है?(Is vomiting during pregnancy only morning sickness ?)

नहीं, गर्भावस्था में उल्टी दिन के किसी भी समय हो सकती है, न केवल सुबह। इसे "मॉर्निंग सिकनेस" नहीं कहा जा सकता है।
 

3. हाइपरएमेसिस ग्रेविडरम क्या है और इसका इलाज कैसे किया जाता है?

हाइपरएमेसिस ग्रेविडरम गर्भावस्था की गंभीर उल्टी की स्थिति है, जिससे निर्जलीकरण और वजन में कमी होती है। इसका इलाज दवाइयों और IV फ्लूइड्स से किया जाता है, और गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता हो सकती है।
 

4. गर्भावस्था में मतली और उल्टी के मुख्य कारण क्या हैं?

हार्मोनल बदलाव, विशेष रूप से hCG और एस्ट्रोजन का बढ़ना, और प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ने से पाचन तंत्र प्रभावित होता है, जिससे उल्टी होती है। आयरन सप्लीमेंट्स भी एक कारण हो सकते हैं।
 

5. गर्भावस्था में मतली और उल्टी से राहत पाने के घरेलू उपाय क्या हैं?(What are the home remedies for nausea and vomiting during pregnancy?)

  • छोटे और बार-बार भोजन करें।

  • BRAT आहार (केला, चावल, सेब की चटनी, सूखा टोस्ट) खाएं।

  • अदरक, कार्बोनेटेड पेय या गर्म पेय पीने से राहत मिल सकती है।
    अगर घरेलू उपाय से राहत न मिले, तो डॉक्टर से दवाइयां लें।
     

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निष्कर्ष: 

गर्भावस्था के दौरान मतली और उल्टी एक सामान्य समस्या हो सकती है, जो मुख्य रूप से पहले तिमाही में होती है। अधिकांश महिलाएं इसे दूसरे तिमाही तक आसानी से संभाल सकती हैं, लेकिन यदि लक्षण गंभीर हो जाएं या हाइपरएमेसिस ग्रेविडरम जैसी स्थिति उत्पन्न हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। सही आहार, जीवनशैली में बदलाव और दवाइयों से इस समस्या में राहत मिल सकती है, लेकिन यदि आपको कोई चिंता हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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