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Surrogacy Law India 2026 Hindi: कौन कर सकता है सरोगेसी और कैसे?

Surrogacy Law India 2026 Hindi: कौन कर सकता है सरोगेसी और कैसे?

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भारत में सरोगेसी से जुड़े नियमों को स्पष्ट और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने 2026 में नए कानून लागू किए। Surrogacy Law India 2026 Hindi के तहत अब सरोगेसी केवल अल्ट्रुइस्टिक (निःस्वार्थ) रूप में ही मान्य है और कमर्शियल सरोगेसी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि कौन सरोगेसी कर सकता है, इसके नियम क्या हैं, और पूरी प्रक्रिया कैसे काम करती है।
 

सरोगेसी क्या है?

सरोगेसी एक आधुनिक चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से वे दंपत्ति जो किसी कारणवश प्राकृतिक रूप से माता-पिता नहीं बन पाते, वे भी अपने बच्चे का सपना पूरा कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में एक महिला, जिसे सरोगेट मदर कहा जाता है, किसी अन्य दंपत्ति (इच्छुक माता-पिता) के लिए गर्भ धारण करती है।
सरोगेसी आमतौर पर उन परिस्थितियों में अपनाई जाती है, जब महिला को गर्भधारण में मेडिकल समस्या होती है, बार-बार गर्भपात हो रहा हो, या कोई गंभीर स्वास्थ्य स्थिति गर्भधारण को जोखिमपूर्ण बनाती हो। ऐसे मामलों में डॉक्टर IVF (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक की मदद से भ्रूण तैयार करते हैं और उसे सरोगेट मदर के गर्भ में स्थापित करते हैं।
जब बच्चा जन्म लेता है, तो कानूनी प्रक्रिया के अनुसार उसे इच्छुक माता-पिता को सौंप दिया जाता है, और वही उसके वैध अभिभावक होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में मेडिकल, कानूनी और भावनात्मक पहलुओं का विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि सभी पक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

भारत में सरोगेसी से जुड़े नियमों को समझना बहुत जरूरी है, खासकर जब आप "Surrogacy Law India 2026 Hindi: कौन कर सकता है सरोगेसी और कैसे?" जैसे महत्वपूर्ण विषय के बारे में जानकारी ले रहे हों। सही पात्रता, कानूनी प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज़ों की जानकारी के साथ-साथ, सरोगेसी से जुड़ी लागत को समझना भी उतना ही आवश्यक है। ऐसे में भारत में सरोगेसी की लागत और मुंबई में सरोगेसी की लागत जानना आपको बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकता है और पूरी प्रक्रिया को समझने में सहायक होता है।

 

सरोगेसी के दो मुख्य प्रकार होते हैं:

अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी
इस प्रकार की सरोगेसी में सरोगेट मदर किसी आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि भावनात्मक या पारिवारिक सहयोग के रूप में गर्भ धारण करती है। इसमें उसे केवल मेडिकल खर्च, बीमा और गर्भावस्था से जुड़े आवश्यक खर्च ही दिए जाते हैं। भारत में वर्तमान कानून के अनुसार केवल यही प्रकार की सरोगेसी कानूनी रूप से मान्य है।
कमर्शियल सरोगेसी
इस प्रकार में सरोगेट मदर को गर्भ धारण करने के बदले आर्थिक भुगतान किया जाता है। पहले यह कई देशों में प्रचलित था, लेकिन भारत में इसे शोषण और अनैतिक प्रथाओं को रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
इस तरह, सरोगेसी न केवल एक मेडिकल प्रक्रिया है, बल्कि यह उन परिवारों के लिए एक उम्मीद भी है, जो लंबे समय से संतान सुख से वंचित हैं।

Surrogacy Law India 2026 Hindi: मुख्य नियम

भारत में सरोगेसी को सुरक्षित, पारदर्शी और नैतिक बनाने के लिए सरकार ने सख्त कानून और दिशानिर्देश लागू किए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य सरोगेट मदर के अधिकारों की रक्षा करना, इच्छुक माता-पिता को कानूनी सुरक्षा देना और किसी भी प्रकार के शोषण को रोकना है। सरोगेसी एक संवेदनशील प्रक्रिया है, इसलिए इसमें मेडिकल, कानूनी और सामाजिक पहलुओं का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।
सरकार द्वारा बनाए गए नियम यह सुनिश्चित करते हैं कि सरोगेसी केवल जरूरतमंद दंपत्तियों के लिए ही उपलब्ध हो और इसका दुरुपयोग न हो। इसके साथ ही, सरोगेट मदर की सेहत, सम्मान और अधिकारों का भी पूरा ध्यान रखा जाता है।

प्रमुख बिंदु:

केवल अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी ही वैध है:
भारत में अब केवल निःस्वार्थ (Altruistic) सरोगेसी को ही कानूनी मान्यता दी गई है। इसका मतलब है कि सरोगेट मदर को गर्भ धारण करने के बदले कोई आर्थिक लाभ या भुगतान नहीं दिया जा सकता, केवल मेडिकल खर्च और आवश्यक देखभाल का खर्च ही उठाया जाता है।
कमर्शियल सरोगेसी पूरी तरह प्रतिबंधित है:
सरकार ने कमर्शियल सरोगेसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है ताकि महिलाओं के आर्थिक शोषण को रोका जा सके। पहले कई मामलों में सरोगेसी को व्यवसाय के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसे अब पूरी तरह गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है।
सरोगेसी के लिए सरकारी रजिस्ट्रेशन जरूरी है:
सरोगेसी प्रक्रिया शुरू करने से पहले संबंधित सरकारी प्राधिकरण से पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य और निगरानी में हो।
मेडिकल और कानूनी अनुमति लेना अनिवार्य है:
सरोगेसी से पहले इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मदर दोनों को मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और कानूनी अनुमति प्राप्त करनी होती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी पक्ष इस प्रक्रिया के लिए पूरी तरह तैयार और योग्य हैं।
केवल भारतीय नागरिक ही सरोगेसी कर सकते हैं:
भारत में सरोगेसी केवल भारतीय नागरिकों के लिए ही अनुमति है। विदेशी नागरिकों या NRI के लिए सरोगेसी पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं, ताकि कानून का दुरुपयोग न हो सके।
इन सभी नियमों का उद्देश्य सरोगेसी प्रक्रिया को सुरक्षित, नैतिक और पारदर्शी बनाना है, ताकि जरूरतमंद दंपत्ति बिना किसी जोखिम के अपने माता-पिता बनने के सपने को पूरा कर सकें।
 

कौन कर सकता है सरोगेसी?

सरोगेसी एक संवेदनशील और कानूनी रूप से नियंत्रित प्रक्रिया है, इसलिए इसे करने के लिए सरकार ने कुछ स्पष्ट पात्रता (Eligibility) शर्तें निर्धारित की हैं। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तव में जरूरतमंद और योग्य लोग ही सरोगेसी का लाभ उठा सकें, और इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का दुरुपयोग या शोषण न हो।
सरोगेसी में दो मुख्य पक्ष होते हैं—इच्छुक माता-पिता (Intended Parents) और सरोगेट मदर। दोनों के लिए अलग-अलग पात्रता मानदंड तय किए गए हैं, जिन्हें पूरा करना अनिवार्य होता है।
 

इच्छुक दंपत्ति

सरोगेसी का विकल्प केवल उन विवाहित दंपत्तियों के लिए उपलब्ध है, जो किसी मेडिकल कारण से प्राकृतिक रूप से संतान प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होती हैं:
भारतीय नागरिक होना जरूरी है:
इच्छुक पति-पत्नी दोनों का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सरोगेसी प्रक्रिया देश के कानूनों के अंतर्गत ही पूरी हो।
विवाह की न्यूनतम अवधि:
दंपत्ति की शादी को कम से कम 5 वर्ष पूरे हो चुके होने चाहिए। यह नियम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि दंपत्ति का रिश्ता स्थिर और परिपक्व हो।
उम्र सीमा:
महिला की उम्र 23 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए, जबकि पुरुष की उम्र 26 से 55 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। यह सीमा इसलिए रखी गई है ताकि माता-पिता बच्चे की परवरिश के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम हों।
मेडिकल कारण से संतान होना:
सरोगेसी केवल उन्हीं दंपत्तियों के लिए अनुमति है, जो किसी चिकित्सीय समस्या (Infertility या अन्य स्वास्थ्य कारणों) के कारण गर्भधारण नहीं कर पा रहे हों। इसके लिए डॉक्टर द्वारा प्रमाणित मेडिकल सर्टिफिकेट आवश्यक होता है।
 

सरोगेट मदर के लिए शर्तें

सरोगेट मदर बनने के लिए भी कुछ महत्वपूर्ण नियम निर्धारित किए गए हैं, ताकि उसकी सेहत और अधिकारों की रक्षा हो सके:
विवाहित होना अनिवार्य है:
सरोगेट मदर का विवाहित होना जरूरी है, ताकि उसे पारिवारिक और भावनात्मक सहयोग मिल सके।
पहले से एक संतान होना चाहिए:
सरोगेट मदर के पास पहले से कम से कम एक स्वस्थ बच्चा होना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होता है कि वह गर्भावस्था के अनुभव से परिचित है और उसके शरीर में गर्भधारण की क्षमता सिद्ध हो चुकी है।
उम्र सीमा (Age Limit):
सरोगेट मदर की उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यह आयु सीमा इसलिए तय की गई है क्योंकि इस उम्र में गर्भधारण अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।
एक बार ही सरोगेसी की अनुमति:
कानून के अनुसार, कोई भी महिला केवल एक बार ही सरोगेट मदर बन सकती है। यह नियम उसकी शारीरिक और मानसिक सेहत को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है।
इन सभी पात्रता मानदंडों का पालन करना अनिवार्य है और ये नियम surrogacy law eligibility india hindi के अंतर्गत आते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य सरोगेसी प्रक्रिया को सुरक्षित, नैतिक और पारदर्शी बनाना है, ताकि सभी पक्षों के अधिकारों की रक्षा हो सके और कोई भी व्यक्ति इस प्रक्रिया का गलत फायदा न उठा सके।
 

सरोगेसी की प्रक्रिया कैसे होती है?

सरोगेसी एक चरणबद्ध (Step-by-Step) और सावधानीपूर्वक नियंत्रित प्रक्रिया है, जिसमें मेडिकल, कानूनी और भावनात्मक तीनों पहलुओं का संतुलन बनाए रखा जाता है। यह प्रक्रिया एक दिन में पूरी नहीं होती, बल्कि इसमें कई महत्वपूर्ण चरण शामिल होते हैं, जिनका पालन करना जरूरी होता है ताकि माँ और बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
नीचे सरोगेसी की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया है:

1. मेडिकल जांच

स्वास्थ्य परीक्षण:
सबसे पहले इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मदर दोनों की विस्तृत मेडिकल जांच की जाती है। इसमें ब्लड टेस्ट, हार्मोन टेस्ट, और अन्य आवश्यक जांच शामिल होती हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं।
फर्टिलिटी मूल्यांकन:
डॉक्टर यह जांचते हैं कि इच्छुक माता-पिता के अंडाणु और शुक्राणु IVF प्रक्रिया के लिए उपयुक्त हैं या नहीं।
फिटनेस कन्फर्मेशन:
सरोगेट मदर की गर्भधारण क्षमता और उसकी शारीरिक स्थिति का मूल्यांकन किया जाता है, ताकि गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार का जोखिम न हो।

2. कानूनी अनुमति

सरकारी स्वीकृति:
सरोगेसी शुरू करने से पहले संबंधित प्राधिकरण से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि सरोगेसी कानून के दायरे में रहकर ही की जा रही है।
दस्तावेज़ों का सत्यापन:
सभी जरूरी दस्तावेज़ जैसे पहचान पत्र, विवाह प्रमाण पत्र, मेडिकल सर्टिफिकेट आदि की जांच की जाती है।
एग्रीमेंट:
इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मदर के बीच एक कानूनी अनुबंध (Legal Agreement) किया जाता है, जिसमें सभी शर्तें और जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से लिखी होती हैं।

3. IVF प्रक्रिया

भ्रूण निर्माण:
इस चरण में महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को लैब में मिलाकर भ्रूण (Embryo) तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया आधुनिक तकनीक की मदद से पूरी की जाती है।
भ्रूण ट्रांसफर:
तैयार भ्रूण को सावधानीपूर्वक सरोगेट मदर के गर्भ में स्थापित किया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रक्रिया होती है, जिसे विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा किया जाता है।

4. गर्भावस्था और देखभाल

नियमित मेडिकल जांच:
गर्भावस्था के दौरान सरोगेट मदर की नियमित रूप से जांच की जाती है, जैसे अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट आदि, ताकि बच्चे का विकास सही तरीके से हो रहा है या नहीं, यह सुनिश्चित किया जा सके।
पोषण और स्वास्थ्य देखभाल:
सरोगेट मदर को संतुलित आहार, आवश्यक दवाइयां और पूरी देखभाल दी जाती है, जिससे उसकी और बच्चे की सेहत बनी रहे।
भावनात्मक सहयोग:
इस दौरान सरोगेट मदर को मानसिक और भावनात्मक समर्थन भी दिया जाता है, क्योंकि गर्भावस्था एक संवेदनशील समय होता है।
 

5. बच्चे का जन्म

सुरक्षित डिलीवरी:
डॉक्टरों की देखरेख में बच्चे का जन्म सुरक्षित तरीके से कराया जाता है।
बच्चे का हस्तांतरण:
जन्म के बाद बच्चे को कानूनी प्रक्रिया के तहत इच्छुक माता-पिता को सौंप दिया जाता है।
कानूनी प्रक्रिया पूरी करना:
बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र और अन्य कानूनी दस्तावेज़ इच्छुक माता-पिता के नाम पर तैयार किए जाते हैं, जिससे वे उसके वैध अभिभावक बन जाते हैं।
इस प्रकार, सरोगेसी की पूरी प्रक्रिया कई महत्वपूर्ण चरणों से होकर गुजरती है, जिसमें हर कदम पर सावधानी और कानूनी नियमों का पालन आवश्यक होता है। सही मार्गदर्शन और विशेषज्ञों की देखरेख में यह प्रक्रिया सुरक्षित और सफल बनाई जा सकती है।

जरूरी दस्तावेज़

सरोगेसी एक कानूनी और मेडिकल प्रक्रिया होने के कारण इसमें कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों की आवश्यकता होती है। ये दस्तावेज़ यह सुनिश्चित करते हैं कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सुरक्षित और कानून के दायरे में रहकर पूरी की जा रही है। बिना सही दस्तावेज़ों के सरोगेसी की अनुमति नहीं दी जाती, इसलिए इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मदर दोनों के लिए सभी जरूरी कागजात तैयार रखना बेहद जरूरी होता है।
ये सभी दस्तावेज़ surrogacy law documents india hindi के अंतर्गत आते हैं और संबंधित सरकारी प्राधिकरण द्वारा सत्यापित किए जाते हैं। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं:

आवश्यक दस्तावेज़:

विवाह प्रमाण पत्र:
इच्छुक दंपत्ति के लिए यह साबित करना जरूरी होता है कि वे कानूनी रूप से विवाहित हैं। विवाह प्रमाण पत्र इस बात का प्रमाण होता है कि उनका रिश्ता वैध है और वे सरोगेसी के लिए पात्र हैं।
मेडिकल सर्टिफिकेट:
सरोगेसी केवल उन्हीं दंपत्तियों के लिए अनुमति है जो किसी मेडिकल कारण से संतान प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए डॉक्टर द्वारा जारी मेडिकल सर्टिफिकेट आवश्यक होता है, जिसमें उनकी स्वास्थ्य स्थिति और गर्भधारण में आने वाली समस्याओं का उल्लेख होता है।
पहचान पत्र:
इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मदर दोनों के लिए वैध पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड (Aadhar) और पैन कार्ड (PAN) जरूरी होते हैं। यह दस्तावेज़ उनकी पहचान और नागरिकता को प्रमाणित करते हैं।
सरोगेट मदर की सहमति पत्र:
सरोगेट मदर की लिखित सहमति अनिवार्य होती है, जिसमें यह स्पष्ट होता है कि वह अपनी इच्छा से इस प्रक्रिया में शामिल हो रही है और उसे सभी शर्तों की जानकारी है। यह दस्तावेज़ उसकी सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करता है।
कोर्ट द्वारा जारी अनुमति:
सरोगेसी प्रक्रिया शुरू करने से पहले अदालत या संबंधित प्राधिकरण से अनुमति लेना जरूरी होता है। यह सुनिश्चित करता है कि पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है और सभी नियमों का पालन किया जा रहा है।
बीमा पॉलिसी:
सरोगेट मदर के लिए बीमा पॉलिसी लेना अनिवार्य होता है, ताकि गर्भावस्था के दौरान या बाद में किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में उसे आर्थिक सुरक्षा मिल सके। यह उसकी और बच्चे की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
 
इन सभी दस्तावेज़ों का सही और पूर्ण होना सरोगेसी प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए बेहद आवश्यक है। इसलिए, सरोगेसी शुरू करने से पहले सभी जरूरी कागजातों की तैयारी और उनकी जांच करना एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

सरोगेसी में कानूनी अधिकार

सरोगेसी एक संवेदनशील और जिम्मेदारी भरी प्रक्रिया है, इसलिए इसमें शामिल सभी पक्षों—सरोगेट मदर और इच्छुक माता-पिता—के अधिकारों की सुरक्षा करना बेहद जरूरी होता है। भारतीय कानून इस बात को सुनिश्चित करता है कि इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय, शोषण या भेदभाव न हो।
सरोगेसी से जुड़े सभी कानूनी अधिकार स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सुरक्षित और संतुलित तरीके से पूरी हो सके। यह अधिकार न केवल सरोगेट मदर की सुरक्षा के लिए हैं, बल्कि इच्छुक माता-पिता के अधिकारों को भी कानूनी मान्यता देते हैं।
 

सरोगेट मदर के अधिकार:

पूरा मेडिकल खर्च उठाया जाएगा:
सरोगेट मदर को गर्भावस्था से जुड़े सभी मेडिकल खर्च, जैसे जांच, दवाइयां, अस्पताल खर्च और डिलीवरी से जुड़े खर्च दिए जाते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि उसे किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।
स्वास्थ्य और सुरक्षा का विशेष ध्यान:
सरोगेट मदर की शारीरिक और मानसिक सेहत की पूरी जिम्मेदारी ली जाती है। नियमित जांच, पोषण, और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि गर्भावस्था सुरक्षित तरीके से पूरी हो सके।
शोषण से सुरक्षा:
कानून यह सुनिश्चित करता है कि सरोगेट मदर के साथ किसी भी प्रकार का शोषण या दबाव न बनाया जाए। उसे पूरी स्वतंत्रता होती है और उसकी सहमति के बिना कोई भी निर्णय नहीं लिया जा सकता।
बीमा और सुरक्षा कवरेज:
सरोगेट मदर के लिए बीमा पॉलिसी अनिवार्य होती है, ताकि गर्भावस्था के दौरान या बाद में किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में उसे आर्थिक सहायता मिल सके।
 

इच्छुक माता-पिता के अधिकार

बच्चे पर पूर्ण कानूनी अधिकार:
बच्चे के जन्म के बाद इच्छुक माता-पिता को उस पर पूर्ण कानूनी अधिकार मिल जाता है। वही बच्चे के वैध माता-पिता माने जाते हैं।
जन्म के बाद कस्टडी:
बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसकी कस्टडी इच्छुक माता-पिता को सौंप दी जाती है। सरोगेट मदर का बच्चे पर कोई कानूनी अधिकार नहीं होता।
कानूनी दस्तावेज़ उनके नाम पर:
बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र और अन्य सभी आवश्यक दस्तावेज़ इच्छुक माता-पिता के नाम पर जारी किए जाते हैं, जिससे उनकी अभिभावकता कानूनी रूप से प्रमाणित हो जाती है।
कानूनी सुरक्षा और स्पष्टता:
इच्छुक माता-पिता को यह अधिकार होता है कि पूरी सरोगेसी प्रक्रिया कानून के अनुसार पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से पूरी हो। किसी भी विवाद की स्थिति में उन्हें कानूनी संरक्षण मिलता है।
 
इन सभी अधिकारों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरोगेसी प्रक्रिया में शामिल हर व्यक्ति सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे। ये सभी प्रावधान surrogacy legal rights india hindi के अंतर्गत आते हैं, जो इस प्रक्रिया को नैतिक और कानूनी रूप से संतुलित बनाते हैं।
 

दंपत्तियों के लिए सरोगेसी नियम

भारत में सरोगेसी को लेकर दंपत्तियों के लिए स्पष्ट और सख्त नियम बनाए गए हैं, ताकि इस प्रक्रिया का उपयोग केवल वास्तविक जरूरत के मामलों में ही किया जाए और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोका जा सके। ये नियम न केवल कानूनी स्पष्टता प्रदान करते हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि सरोगेसी एक सुरक्षित और नैतिक प्रक्रिया बनी रहे।
सरकार द्वारा निर्धारित ये दिशानिर्देश दंपत्तियों की पात्रता, उनकी जिम्मेदारियों और उनके अधिकारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके।

महत्वपूर्ण नियम:

केवल विवाहित दंपत्ति ही सरोगेसी कर सकते हैं:
भारत में सरोगेसी का अधिकार केवल कानूनी रूप से विवाहित पति-पत्नी को ही दिया गया है। यह नियम परिवार की स्थिरता और बच्चे के सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।
सिंगल पेरेंट्स के लिए सीमित अनुमति:
सिंगल पेरेंट्स के लिए सरोगेसी के नियम काफी सीमित और सख्त हैं। अधिकांश मामलों में उन्हें सरोगेसी की अनुमति नहीं दी जाती, और यदि दी भी जाती है तो विशेष शर्तों के साथ।
LGBTQ+ समुदाय के लिए नियम स्पष्ट नहीं:
वर्तमान समय में LGBTQ+ समुदाय के लिए सरोगेसी से जुड़े नियम पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। इस विषय पर अभी भी कानूनी और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी है।
विदेशी नागरिकों के लिए प्रतिबंध:
भारत में विदेशी नागरिकों के लिए सरोगेसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। यह कदम सरोगेसी के व्यावसायीकरण और दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है।
ये सभी नियम surrogacy law india for couples hindi के अंतर्गत आते हैं, जो दंपत्तियों के लिए सरोगेसी को सुरक्षित और नियंत्रित बनाते हैं।
 

सरोगेसी के फायदे

सरोगेसी उन दंपत्तियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आती है, जो लंबे समय से संतान प्राप्ति के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह प्रक्रिया न केवल उन्हें माता-पिता बनने का अवसर देती है, बल्कि उनके जीवन में खुशियां भी लाती है।

फायदे:

जैविक  बच्चा पाने का अवसर:
सरोगेसी के माध्यम से दंपत्ति अपने ही जेनेटिक मटेरियल से बच्चे को जन्म दे सकते हैं, जिससे उनका बच्चे से जैविक संबंध बना रहता है।
मेडिकल रूप से सुरक्षित प्रक्रिया:
आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में सरोगेसी एक सुरक्षित प्रक्रिया मानी जाती है, जिसमें मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है।
कानूनी सुरक्षा:
सरोगेसी कानून के तहत पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से संरक्षित होती है, जिससे इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मदर दोनों के अधिकार सुरक्षित रहते हैं।
परिवार को पूरा करने का अवसर:
जो दंपत्ति किसी कारणवश माता-पिता नहीं बन पाते, उनके लिए सरोगेसी परिवार को पूरा करने और जीवन में खुशियां लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनती है।
भावनात्मक संतुष्टि:
माता-पिता बनने का सपना पूरा होने से दंपत्ति को मानसिक और भावनात्मक संतुष्टि मिलती है, जो उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है।
 

सरोगेसी के नुकसान

जहां सरोगेसी के कई फायदे हैं, वहीं इसके कुछ चुनौतियां और नुकसान भी हो सकते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है ताकि दंपत्ति सही निर्णय ले सकें।

नुकसान:

भावनात्मक चुनौतियां:
सरोगेसी प्रक्रिया के दौरान और बाद में भावनात्मक उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। सरोगेट मदर और इच्छुक माता-पिता दोनों के लिए यह एक संवेदनशील अनुभव हो सकता है।
कानूनी जटिलताएं:
हालांकि कानून स्पष्ट हैं, फिर भी दस्तावेज़ों और प्रक्रियाओं को पूरा करने में जटिलताएं आ सकती हैं, जो समय और मेहनत मांगती हैं।
समय लेने वाली प्रक्रिया:
सरोगेसी एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें मेडिकल जांच, कानूनी अनुमति और गर्भावस्था का पूरा समय शामिल होता है। इसलिए इसमें धैर्य रखना जरूरी होता है।
खर्च:
हालांकि भारत में कमर्शियल सरोगेसी प्रतिबंधित है, फिर भी मेडिकल, कानूनी और अन्य आवश्यक खर्च होते हैं, जो दंपत्तियों के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
सामाजिक और पारिवारिक दबाव:
कुछ मामलों में समाज या परिवार की सोच के कारण दंपत्तियों को मानसिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है, जो इस प्रक्रिया को और जटिल बना सकता है।
 
इस प्रकार, सरोगेसी के फायदे और नुकसान दोनों को समझकर ही दंपत्तियों को निर्णय लेना चाहिए, ताकि वे इस महत्वपूर्ण यात्रा को सही दिशा में आगे बढ़ा सकें।

2026 के कानून में क्या बदलाव हुए?

सरोगेसी को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और नैतिक बनाने के उद्देश्य से सरकार ने समय-समय पर कानूनों में बदलाव किए हैं। 2026 के अपडेटेड नियमों में खास तौर पर महिलाओं की सुरक्षा, प्रक्रिया की पारदर्शिता और कानूनी नियंत्रण को और मजबूत किया गया है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरोगेसी केवल जरूरतमंद दंपत्तियों तक सीमित रहे और इसका किसी भी प्रकार से व्यावसायीकरण या दुरुपयोग न हो।
सरकार ने इन संशोधनों के माध्यम से यह भी सुनिश्चित किया है कि सरोगेट मदर के अधिकारों की पूरी तरह रक्षा हो और इच्छुक माता-पिता को भी स्पष्ट कानूनी ढांचा मिले।

प्रमुख बदलाव:

कमर्शियल सरोगेसी पर सख्त प्रतिबंध:
अब किसी भी प्रकार की व्यावसायिक सरोगेसी पूरी तरह गैरकानूनी है। इसका उद्देश्य महिलाओं के आर्थिक शोषण को रोकना और सरोगेसी को केवल सामाजिक एवं मानवीय आधार पर सीमित करना है।
केवल निःस्वार्थ सरोगेसी की अनुमति:
सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी ही वैध होगी, जिसमें सरोगेट मदर को कोई आर्थिक लाभ नहीं दिया जाएगा, बल्कि केवल मेडिकल और आवश्यक खर्च ही वहन किए जाएंगे।
सख्त पात्रता नियम लागू:
इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मदर दोनों के लिए पात्रता मानदंडों को और सख्त बनाया गया है, ताकि केवल योग्य और जरूरतमंद लोग ही इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें।
सरकारी निगरानी में वृद्धि:
सरोगेसी प्रक्रिया पर अब पहले से ज्यादा सरकारी नियंत्रण और निगरानी रखी जा रही है। रजिस्ट्रेशन, अनुमति और दस्तावेज़ों की जांच को अनिवार्य बनाया गया है।
सरोगेट मदर के अधिकारों की सुरक्षा:
नए नियमों में सरोगेट मदर की स्वास्थ्य सुरक्षा, बीमा और कानूनी अधिकारों को प्राथमिकता दी गई है, ताकि गर्भावस्था के दौरान और बाद में उसे किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
 

सरोगेसी से जुड़े मिथक और सच्चाई

सरोगेसी को लेकर समाज में कई तरह की गलतफहमियां (Myths) फैली हुई हैं। इन मिथकों के कारण लोग अक्सर भ्रमित हो जाते हैं और सही जानकारी नहीं मिल पाती। इसलिए जरूरी है कि हम इन मिथकों और सच्चाइयों को स्पष्ट रूप से समझें।

मिथक:

सरोगेसी पूरी तरह अवैध है:
कई लोग मानते हैं कि भारत में सरोगेसी गैरकानूनी है, जबकि यह पूरी तरह सही नहीं है।
कोई भी व्यक्ति सरोगेसी कर सकता है:
यह भी एक आम गलतफहमी है कि सरोगेसी हर किसी के लिए उपलब्ध है, जबकि इसके लिए सख्त पात्रता नियम होते हैं।
 

सच्चाई:

सरोगेसी भारत में कानूनी है (नियमों के तहत):
भारत में सरोगेसी पूरी तरह कानूनी है, लेकिन इसे केवल निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत ही किया जा सकता है।
केवल पात्र व्यक्ति ही सरोगेसी कर सकते हैं:
सरोगेसी का लाभ केवल उन्हीं दंपत्तियों को मिलता है, जो कानून द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं।
सरोगेसी एक नियंत्रित प्रक्रिया है:
यह प्रक्रिया सरकार की निगरानी में होती है, जिससे पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
 

यदि आप "Surrogacy Law India 2026 Hindi: कौन कर सकता है सरोगेसी और कैसे?" के बारे में जानकारी ले रहे हैं और प्राकृतिक रूप से गर्भधारण में कठिनाई का सामना कर रहे हैं, तो IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) प्रक्रिया सरोगेसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। सरोगेसी में अक्सर IVF तकनीक का उपयोग भ्रूण तैयार करने के लिए किया जाता है, इसलिए इसके बारे में सही जानकारी होना जरूरी है। ऐसे में, सही क्लिनिक का चयन करने के साथ-साथ दिल्ली में IVF की लागत और रांची में IVF की लागत की जानकारी लेना आपको पूरी प्रक्रिया को बेहतर समझने और सरोगेसी के लिए सही निर्णय लेने में मदद करता है।

 

सरोगेसी में सावधानियां

सरोगेसी एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय है, इसलिए इसमें सही जानकारी और सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। यदि सही तरीके से तैयारी की जाए, तो यह प्रक्रिया सुरक्षित और सफल हो सकती है।

जरूरी सावधानियां:

केवल मान्यता प्राप्त क्लिनिक का चयन करें:
हमेशा ऐसे क्लिनिक या अस्पताल का चयन करें जो सरकारी मान्यता प्राप्त हो और जहां अनुभवी डॉक्टर उपलब्ध हों। इससे प्रक्रिया की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करें:
सरोगेसी से पहले सभी जरूरी कानूनी अनुमति और दस्तावेज़ पूरे करना अनिवार्य है। किसी भी नियम को नजरअंदाज करना भविष्य में समस्या पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह लें:
डॉक्टर, वकील और काउंसलर से सलाह लेना बेहद जरूरी है, ताकि आप पूरी प्रक्रिया को सही तरीके से समझ सकें और कोई भी गलत निर्णय न लें।
सभी दस्तावेज़ सुरक्षित रखें:
सरोगेसी से जुड़े सभी दस्तावेज़ों को सुरक्षित रखना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि भविष्य में कानूनी या प्रशासनिक जरूरत पड़ सकती है।
भावनात्मक और मानसिक तैयारी करें:
सरोगेसी केवल शारीरिक नहीं बल्कि भावनात्मक प्रक्रिया भी है, इसलिए मानसिक रूप से तैयार रहना जरूरी है।
इन सभी बातों को ध्यान में रखकर सरोगेसी की प्रक्रिया को सुरक्षित, सफल और सकारात्मक अनुभव बनाया जा सकता है।

 

निष्कर्ष

सरोगेसी एक अत्यंत संवेदनशील, जिम्मेदारीपूर्ण और जीवन बदल देने वाली प्रक्रिया है, जो उन दंपत्तियों के लिए आशा की नई किरण बनकर आती है, जो किसी कारणवश प्राकृतिक रूप से माता-पिता नहीं बन पाते। हालांकि यह प्रक्रिया मेडिकल तकनीक की मदद से संभव होती है, लेकिन इसके साथ कई कानूनी, सामाजिक और भावनात्मक पहलू भी जुड़े होते हैं, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है।
भारत में बनाए गए Surrogacy Law India 2026 Hindi के तहत नियमों का मुख्य उद्देश्य इस प्रक्रिया को सुरक्षित, पारदर्शी और नैतिक बनाना है। ये कानून न केवल सरोगेट मदर के अधिकारों और स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं, बल्कि इच्छुक माता-पिता को भी कानूनी सुरक्षा और स्पष्टता प्रदान करते हैं। सख्त पात्रता मानदंड, दस्तावेज़ों की अनिवार्यता और सरकारी निगरानी यह सुनिश्चित करती है कि सरोगेसी का दुरुपयोग न हो और यह केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक सीमित रहे।
यदि आप सरोगेसी के बारे में सोच रहे हैं, तो यह बेहद जरूरी है कि आप इसके सभी पहलुओं—मेडिकल प्रक्रिया, कानूनी नियम, आवश्यक दस्तावेज़ और संभावित चुनौतियों—को अच्छी तरह समझें। बिना पूरी जानकारी के इस प्रक्रिया में आगे बढ़ना भविष्य में जटिलताओं का कारण बन सकता है। इसलिए विशेषज्ञ डॉक्टरों, कानूनी सलाहकारों और अनुभवी काउंसलर्स से मार्गदर्शन लेना एक समझदारी भरा कदम होता है।
इसके अलावा, सरोगेसी केवल एक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक भावनात्मक यात्रा भी है, जिसमें धैर्य, समझ और सही निर्णय लेने की आवश्यकता होती है। सही जानकारी और तैयारी के साथ यह अनुभव सकारात्मक और सफल बनाया जा सकता है।

सही मार्गदर्शन और भरोसेमंद सहायता के लिए vinsfertility जैसे विश्वसनीय प्लेटफॉर्म आपकी पूरी प्रक्रिया को आसान और सुरक्षित बनाने में मदद कर सकते हैं। उनकी विशेषज्ञ टीम आपको हर कदम पर सही सलाह और समर्थन प्रदान करती है, ताकि आप अपने माता-पिता बनने के सपने को साकार कर सकें।
 

FAQ


1. सरोगेसी क्या है?

सरोगेसी एक प्रक्रिया है जिसमें एक महिला किसी अन्य दंपत्ति के लिए गर्भ धारण करती है।
Source: https://www.nhp.gov.in/

2. भारत में सरोगेसी कानून क्या है?

भारत में सरोगेसी को Surrogacy (Regulation) Act के तहत नियंत्रित किया जाता है।
Source: https://www.indiacode.nic.in/

3. क्या भारत में सरोगेसी कानूनी है?

हाँ, भारत में केवल अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी कानूनी है।
Source: https://pib.gov.in/

4. कमर्शियल सरोगेसी क्या है?

कमर्शियल सरोगेसी में सरोगेट मदर को आर्थिक भुगतान किया जाता है, जो भारत में प्रतिबंधित है।
Source: https://www.indiacode.nic.in/

5. अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी क्या है?

इसमें केवल मेडिकल खर्च दिया जाता है, कोई लाभ नहीं।
Source: https://pib.gov.in/

6. कौन सरोगेसी करा सकता है?

केवल पात्र विवाहित भारतीय दंपत्ति सरोगेसी करा सकते हैं।
Source: https://www.nhp.gov.in/

7. क्या सिंगल व्यक्ति सरोगेसी कर सकता है?

सिंगल पेरेंट्स के लिए नियम सीमित हैं और विशेष परिस्थितियों में ही अनुमति है।
Source: https://pib.gov.in/

8. सरोगेट मदर कौन बन सकती है?

विवाहित महिला जिसके पहले से एक बच्चा हो।
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9. सरोगेट मदर की उम्र क्या होनी चाहिए?
25 से 35 वर्ष के बीच।
Source: https://www.nhp.gov.in/

10. सरोगेसी के लिए शादी की अवधि कितनी होनी चाहिए?

कम से कम 5 साल।
Source: https://pib.gov.in/

11. क्या विदेशी नागरिक भारत में सरोगेसी कर सकते हैं?

नहीं, विदेशी नागरिकों के लिए सरोगेसी प्रतिबंधित है।
Source: https://www.indiacode.nic.in/

12. सरोगेसी के लिए कौन से दस्तावेज़ जरूरी हैं?

विवाह प्रमाण पत्र, मेडिकल सर्टिफिकेट आदि जरूरी हैं।
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13. क्या सरोगेसी के लिए मेडिकल प्रमाण जरूरी है?

हाँ, बांझपन (infertility) का प्रमाण जरूरी है।
Source: https://pib.gov.in/

14. सरोगेसी प्रक्रिया कैसे होती है?

IVF के माध्यम से भ्रूण तैयार कर सरोगेट मदर में ट्रांसफर किया जाता है।
Source: https://www.nhp.gov.in/

15. क्या सरोगेसी में बीमा जरूरी है?

हाँ, सरोगेट मदर के लिए बीमा अनिवार्य है।
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16. क्या सरोगेट मदर को भुगतान मिलता है?

केवल मेडिकल खर्च मिलता है, अन्य भुगतान नहीं।
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17. सरोगेसी में बच्चे का कानूनी अधिकार किसका होता है?

इच्छुक माता-पिता का।
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18. क्या सरोगेट मदर बच्चे पर दावा कर सकती है?

नहीं, उसका कोई कानूनी अधिकार नहीं होता।
Source: https://pib.gov.in/

19. क्या सरोगेसी सुरक्षित है?

हाँ, उचित मेडिकल निगरानी में यह सुरक्षित प्रक्रिया है।
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20. सरोगेसी के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है?

हाँ, सरकारी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
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21. क्या LGBTQ+ समुदाय सरोगेसी कर सकता है?

भारत में इसके नियम अभी स्पष्ट नहीं हैं।
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22. सरोगेसी में कितना समय लगता है?

पूरी प्रक्रिया में 1 से 2 साल तक लग सकते हैं।
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23. क्या सरोगेसी में कोर्ट की अनुमति जरूरी है?

हाँ, कानूनी अनुमति जरूरी होती है।
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24. क्या सरोगेसी में काउंसलिंग जरूरी है?

हाँ, मानसिक और कानूनी काउंसलिंग जरूरी है।
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25. क्या सरोगेट मदर एक से अधिक बार सरोगेसी कर सकती है?

नहीं, केवल एक बार की अनुमति होती है।
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26. सरोगेसी के लिए कौन से क्लिनिक चुनें?

केवल सरकारी मान्यता प्राप्त क्लिनिक चुनना चाहिए।
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27. क्या सरोगेसी में जोखिम होता है?

कुछ मेडिकल और भावनात्मक जोखिम हो सकते हैं।
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28. सरोगेसी में खर्च कितना होता है?

केवल मेडिकल और कानूनी खर्च शामिल होता है।
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29. क्या सरोगेसी में गोपनीयता रखी जाती है?

हाँ, सभी जानकारी गोपनीय रखी जाती है।
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30. सरोगेसी के लिए सही सलाह कहाँ से लें?

सरकारी और प्रमाणित मेडिकल संस्थानों से सलाह लें।
Source: https://pib.gov.in/
 





 
 

Portrait of Dr. Sunita Singh Rathour, Gynecologist and Fertility Expert

Gynecologist & IVF Specialist | 18+ Years Experience | 1,000+ Successful Live Births

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