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Ovarian Cyst in hindi | अंडाशय की गाँठ | कारण, लक्षण और उपचार

Ovarian Cyst in hindi | अंडाशय की गाँठ | कारण, लक्षण और उपचार

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Gynecologist & IVF Specialist
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MBBS DGO DNB (Obstetrics & Gynaecology) Fertility Specialist
This content is reviewed for medical accuracy and patient-awareness purposes. It does not replace a personal consultation with a fertility specialist.

अंडाशय की गाँठ या ओवरी सिस्ट (Ovarian Cyst) महिलाओं में एक आम स्वास्थ्य समस्या है। यह अक्सर छोटे आकार में बिना किसी लक्षण के होती है, इसलिए कई बार इसे पहचान पाना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह तेज पेट दर्द, पीरियड्स में अनियमितता, या प्रजनन संबंधी समस्याएँ भी पैदा कर सकती है। अंडाशय की गाँठ किसी भी उम्र की महिलाओं में हो सकती है, लेकिन यह प्रजनन उम्र की महिलाओं में अधिक आम है।

इस ब्लॉग में हम अंडाशय की गाँठ के मुख्य कारण, लक्षण, प्रकार, जांच, उपचार और बचाव के प्रभावी उपाय के बारे में विस्तार से जानेंगे। साथ ही, हम यह भी बताएँगे कि कब इसे हल्के लक्षण समझकर अनदेखा करना ठीक है और कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। इससे महिलाएँ अपनी सेहत के प्रति सजग रह सकती हैं और समय रहते सही कदम उठा सकती हैं।
 

यदि बार-बार प्रेगनेंसी में दिक़्क़त आती है या प्राकृतिक गर्भधारण संभव न हो, तो सरोगेसी एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बन सकती है। ऐसे मामलों में भारत में सरोगेसी की लागत और बैंगलोर में सरोगेसी की लागत जानना और सही क्लिनिक का चयन करना मददगार हो सकता है।

 

अंडाशय की गाँठ क्या है? (What is Ovarian Cyst)

अंडाशय की गाँठ एक तरल या ठोस पदार्थ से भरी छोटी थैली होती है जो अंडाशय में बनती है। यह सामान्यतः हार्मोनल असंतुलन या ओवुलेशन (Ovulation) के दौरान विकसित हो सकती है।
अधिकतर सिस्ट स्वयं ही गायब हो जाती हैं, लेकिन कभी-कभी यह पेट दर्द, अनियमित पीरियड्स और प्रजनन समस्याएँ भी पैदा कर सकती हैं।

  • लगभग 8 में से 1 महिला जीवन में किसी न किसी समय ओवरी सिस्ट से प्रभावित होती है।

  • सिस्ट का आकार सामान्यतः 2-3 सेंटीमीटर तक होता है।

  • 5 सेंटीमीटर से अधिक बढ़ने पर डॉक्टर से जांच आवश्यक है।
     

अंडाशय की गाँठ के प्रकार (Types of Ovarian Cyst)

अंडाशय की गाँठ या ओवरी सिस्ट विभिन्न प्रकार की होती है, और हर प्रकार के कारण, लक्षण और उपचार अलग हो सकते हैं। मुख्य प्रकार इस प्रकार हैं:

1. फॉलिक्युलर सिस्ट (Follicular Cyst)

  • यह सबसे सामान्य प्रकार की सिस्ट है।

  • ओवुलेशन (अंडाणु निकलने) के दौरान बनती है।

  • अधिकतर मामलों में यह 1-3 महीने के भीतर स्वयं ही गायब हो जाती है

  • आम तौर पर यह सिस्ट हल्की और बिना दर्द के होती है।

2. ल्यूटियल सिस्ट (Luteal Cyst)

  • यह सिस्ट पीरियड्स के बाद अंडाशय में बन सकती है।

  • कभी-कभी यह पेट में दर्द या असामान्य रक्तस्राव का कारण बन सकती है।

  • अधिकांश ल्यूटियल सिस्ट हल्की होती हैं, लेकिन यदि बड़ी हो जाए तो डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

3. डर्मॉइड सिस्ट (Dermoid Cyst)

  • यह सिस्ट जन्मजात होती है और अंडाशय में बाल, दांत या अन्य ऊतक हो सकते हैं।

  • यह सिस्ट अक्सर बिना लक्षण के रहती है, लेकिन बड़ी होने पर दर्द या सूजन पैदा कर सकती है।

  • डर्मॉइड सिस्ट को सर्जरी के माध्यम से हटाना ही सुरक्षित तरीका है।

4. एंडोमेट्रियोमा (Endometrioma)

  • यह सिस्ट एंडोमेट्रियोसिस के कारण बनती है।

  • अक्सर यह तीव्र दर्द, पीरियड्स में असामान्यता और प्रजनन समस्याओं से जुड़ी होती है।

  • एंडोमेट्रियोमा की सिस्ट का इलाज डॉक्टर की देखरेख में ही किया जाता है।
    source: https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC11988711/


अंडाशय की गाँठ के लक्षण (Ovarian Cyst Symptoms)

अधिकतर महिलाएँ अंडाशय की गाँठ के शुरुआती लक्षण महसूस नहीं करती, इसलिए इसे अक्सर अनजाने में छोड़ दिया जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में सिस्ट बढ़ने या आकार में बदलाव के कारण स्पष्ट लक्षण दिखाई देने लगते हैं। मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • पेट या कमर में लगातार दर्द: यह सबसे आम लक्षण है। अक्सर पेट के निचले हिस्से या कमर में हल्का या तीव्र दर्द महसूस हो सकता है, जो कभी-कभी पीरियड्स के दौरान बढ़ जाता है।

  • पीरियड्स में अनियमितता: अंडाशय की गाँठ हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकती है, जिससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं। कभी कभी पीरियड्स बहुत लंबा या बहुत छोटा हो जाता है।

  • बार-बार मूत्र आने की समस्या: बड़ी सिस्ट मूत्राशय पर दबाव डाल सकती है, जिससे बार-बार या अचानक पेशाब आने की समस्या हो सकती है।

  • पेट फूलना या भारीपन: पेट में भारीपन या सूजन महसूस होना भी एक सामान्य संकेत है। यह अक्सर खाने के बाद या दिन के अंत में अधिक महसूस होता है।

  • यौन संबंध के दौरान दर्द : कुछ महिलाओं को यौन संबंध के दौरान दर्द या असुविधा हो सकती है। यह अक्सर सिस्ट के आकार और स्थान पर निर्भर करता है।

  • पेट में अचानक तेज दर्द, उल्टी या बुखार : यदि सिस्ट अचानक फट जाए या इसके कारण टॉर्शन (Twist) हो, तो तेज दर्द, उल्टी और बुखार जैसी आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

अंडाशय की गाँठ का कारण (Causes of Ovarian Cyst)

अंडाशय की गाँठ बनने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। हर महिला में ये कारण अलग-अलग प्रभाव डाल सकते हैं। समझने के लिए मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

  • हार्मोनल असंतुलन: शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का असंतुलन होने पर अंडाशय में सिस्ट बन सकती है। यह अक्सर पीरियड्स के चक्र में बदलाव या ओवुलेशन में असामान्यता के कारण होता है।

  • प्रजनन समस्याएँ : पीसीओएस (Polycystic Ovary Syndrome) जैसी समस्या वाली महिलाओं में अंडाशय की गाँठ आम होती है। यह हार्मोनल और अंडाशय की कार्यप्रणाली में असंतुलन के कारण होती है।

  • एंडोमेट्रियोसिस: यह तब होता है जब एंडोमेट्रियम टिशू अंडाशय में विकसित हो जाता है। इसके कारण एंडोमेट्रियोमा सिस्ट बन सकती है, जो अक्सर दर्द और प्रजनन समस्याओं से जुड़ी होती है।

  • गर्भनिरोधक गोलियों का प्रभाव:  कुछ महिलाओं में लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने से हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे सिस्ट बनने की संभावना बढ़ सकती है।

  • अन्य कारण : उम्र बढ़ना, अधिक मोटापा, असंतुलित खानपान, मानसिक तनाव और जीवनशैली में बदलाव भी अंडाशय की गाँठ बनने में योगदान कर सकते हैं।

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अंडाशय की गाँठ की जांच (Diagnosis of Ovarian Cyst)

अंडाशय की गाँठ का सही और समय पर पता लगाना बहुत महत्वपूर्ण है। शुरुआती अवस्था में सिस्ट अक्सर बिना लक्षण के होती है, इसलिए नियमित जांच महिलाओं के लिए जरूरी है। डॉक्टर सिस्ट की पहचान और उसके प्रकार का पता लगाने के लिए कुछ परीक्षण कर सकते हैं।

  • अल्ट्रासाउंड- यह सबसे सामान्य और प्रभावी तरीका है। अल्ट्रासाउंड से पता चलता है कि सिस्ट तरल या ठोस है, उसका आकार कितना है और वह किस स्थान पर है।

  • सीटी स्कैन / एमआरआई-  यदि अल्ट्रासाउंड पर्याप्त जानकारी न दे, तो डॉक्टर CT स्कैन या MRI की सलाह दे सकते हैं। इससे सिस्ट की संरचना और आसपास के अंगों पर असर का बेहतर पता चलता है।

  • ब्लड टेस्ट - कुछ विशेष मामलों में ब्लड टेस्ट किया जाता है, जैसे कि CA-125 नामक मार्कर की जांच, जो सिस्ट कैंसर की संभावना को पहचानने में मदद कर सकता है।

  • लैप्रोस्कोपी – गंभीर या बड़े सिस्ट के मामलों में लैप्रोस्कोपी के जरिए सीधे अंडाशय की जांच और जरूरत पड़ने पर सिस्ट हटाई जा सकती है। यह एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है।


अंडाशय की गाँठ का उपचार (Ovarian Cyst Treatment)

अंडाशय की गाँठ का उपचार सिस्ट के प्रकार, आकार और लक्षणों पर निर्भर करता है। इसे तीन मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है: मेडिकल उपचार, सर्जिकल उपचार और घरेलू/प्राकृतिक उपाय।


मेडिकल उपचार (Medical Treatment)

हल्की और बिना लक्षण वाली सिस्ट के लिए अक्सर मेडिकल निगरानी पर्याप्त होती है। इसमें शामिल हैं:

  • नियमित अल्ट्रासाउंड जांच: सिस्ट के आकार और विकास को ट्रैक करने के लिए।

  • दर्द और सूजन के लिए दवा (Pain Relief): पेट दर्द और असुविधा कम करने के लिए डॉक्टर दवा लिख सकते हैं।

  • हार्मोनल थेरेपी: यदि सिस्ट हार्मोनल असंतुलन के कारण बनी है, तो एस्ट्रोजन या प्रोजेस्टेरोन सप्लीमेंट्स या अन्य हार्मोनल दवा दी जा सकती है।


सर्जिकल उपचार (Surgical Treatment)

कुछ मामलों में सिस्ट बड़ी, दर्दनाक या जटिल हो सकती है, ऐसे में सर्जरी जरूरी होती है।

  • लापरास्कोपिक सर्जरी (Laparoscopic Surgery): यह मिनिमली इनवेसिव तकनीक है जिसमें छोटे चीरे से सिस्ट को हटाया जाता है।

  • ओपन सर्जरी (Open Surgery): बड़ी या गंभीर सिस्ट के लिए कभी-कभी खुली सर्जरी की जाती है।

घरेलू और प्राकृतिक उपाय (Home & Natural Remedies)

हालांकि घरेलू उपाय सिस्ट को पूरी तरह नहीं हटा सकते, ये लक्षणों को कम करने और पेट की सूजन या दर्द में राहत देने में मदद करते हैं।

  • संतुलित आहार: अधिक फल, सब्जियाँ, फाइबर और हेल्दी फैट्स लें। प्रोसेस्ड फूड और अधिक मीठा खाने से बचें।

  • नियमित व्यायाम: योग, वॉक, स्ट्रेचिंग और हल्की एक्सरसाइज से पेट और हार्मोन संतुलन में मदद मिलती है।

  • हर्बल चाय: अदरक, तुलसी, पिप्पली और हर्बल डिटॉक्स चाय सिस्ट से जुड़े दर्द और सूजन को कम कर सकते हैं।

  • गर्म पानी की थैली: पेट पर गर्म पानी की थैली रखने से दर्द में राहत मिलती है।
    source: https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC6438659/


अंडाशय की गाँठ से बचाव (Prevention of Ovarian Cyst)

अंडाशय की गाँठ को पूरी तरह रोकना मुश्किल है, लेकिन कुछ सावधानियों से इसके जोखिम को कम किया जा सकता है:

  • नियमित स्वास्थ्य जांच: साल में कम से कम एक बार अल्ट्रासाउंड या डॉक्टर से चेकअप।

  • संतुलित आहार और वजन नियंत्रण: फल, सब्जियाँ और हेल्दी फैट्स।

  • पीरियड और हार्मोनल समस्या का समय पर इलाज।

  • स्ट्रेस कम करना और पर्याप्त नींद लेना।

  • हार्मोनल दवा या गोलियों के लिए डॉक्टर की सलाह लेना।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) – ओवरी सिस्ट (Ovarian Cyst)

1. ओवरी में सिस्ट होने से क्या होता है?
ओवरी सिस्ट आमतौर पर छोटे आकार में बिना लक्षण के होती है। कभी-कभी यह पेट दर्द, पीरियड में अनियमितता, पेट फूलना या यौन संबंध में दर्द का कारण बन सकती है।

2. सिस्ट को दूर होने में कितना समय लगता है?
छोटी फॉलिक्युलर सिस्ट अक्सर 1-3 महीने में खुद ही गायब हो जाती है। बड़ी या जटिल सिस्ट को चिकित्सा उपचार या सर्जरी की जरूरत हो सकती है।

3. सिस्ट होने का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण हैं: हार्मोनल असंतुलन, पीसीओएस, एंडोमेट्रियोसिस, गर्भनिरोधक गोलियों का असर, तनाव और असंतुलित खानपान।

4. क्या ओवरी सिस्ट को सर्जरी के बिना हटाया जा सकता है?
छोटी और हल्की सिस्ट को अक्सर नियमित जांच और मेडिकल उपचार से कंट्रोल किया जा सकता है। बड़ी या जटिल सिस्ट के लिए सर्जरी जरूरी हो सकती है।

5. सिस्ट का सबसे अच्छा इलाज क्या है?
छोटी सिस्ट में मॉनिटरिंग और दर्द निवारक दवाएँ सबसे अच्छा इलाज हैं। बड़ी सिस्ट या दर्द/जटिलता होने पर लापरास्कोपिक सर्जरी सुरक्षित और प्रभावी है।

6. अगर मेरे ओवरी में सिस्ट है तो क्या मैं प्रेग्नेंट हो सकता हूं?
अधिकतर सिस्ट गर्भधारण में बाधा नहीं डालती। लेकिन पीसीओएस या बड़ी सिस्ट प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। डॉक्टर की सलाह आवश्यक है।

7. ओवरी सिस्ट में कौन से फल खाने चाहिए?
सिस्ट में सेब, संतरा, पपीता, स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी जैसे एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर युक्त फल मददगार हैं।

8. अगर मुझे ओवरी सिस्ट है तो क्या मैं दूध पी सकती हूं?
हाँ, दूध पी सकते हैं, लेकिन फुल-फैट दूध कम करें और ज्यादा तैलीय डेयरी से बचें।

9. ओवरी सिस्ट होने पर क्या परहेज करना चाहिए?
ओवरी सिस्ट होने पर अत्यधिक तैलीय और जंक फूड, बहुत मीठा और प्रोसेस्ड भोजन, साथ ही अधिक कैफीन और शराब से बचना चाहिए। ये हार्मोनल असंतुलन और सिस्ट के लक्षण बढ़ा सकते हैं।

10. सिस्ट से बचने के लिए क्या खाना चाहिए?
संतुलित आहार सिस्ट से बचाव में मदद करता है। ताजे फल, सब्जियाँ, फाइबर युक्त अनाज और दालें, साथ ही हेल्दी फैट्स जैसे अखरोट और अलसी लाभकारी हैं।

11. PCOD में क्या नहीं खाना चाहिए?
पीसीओडी में प्रोसेस्ड और जंक फूड, अधिक चीनी, तली-भुनी चीजें और अधिक कॉफी से बचना चाहिए, क्योंकि ये हार्मोनल असंतुलन बढ़ा सकते हैं।

12. सिस्ट के लिए कौन सी चाय अच्छी है?
अदरक की चाय, तुलसी और पिप्पली की हर्बल चाय, और ग्रीन टी पेट दर्द और सूजन कम करने में मदद करती हैं और शरीर को स्वस्थ रखती हैं।

Portrait of Dr. Sunita Singh Rathore, Gynecologist and IVF Specialist
Medical reviewer

Gynecologist & IVF Specialist | 18+ Years Experience | 1,000+ Successful Live Births

Dr. Sunita Singh Rathore is an experienced women’s health and fertility specialist associated with Vinsfertility. She reviews reproductive health content for medical accuracy, patient clarity, and alignment with current fertility care practices.

Her areas of focus include IVF, infertility assessment, ovulation disorders, reproductive counselling, and treatment planning for couples exploring assisted reproductive options.

MBBS DGO DNB (Obstetrics & Gynaecology) Fertility Specialist
This article has been medically reviewed for educational and awareness purposes. It should not be considered a substitute for an in-person consultation, diagnosis, or treatment plan from a qualified fertility specialist.
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