Surrogacy Law India 2026 Hindi: कौन कर सकता है
भारत में सरोगेसी से जुड़े नियमों को स्पष्ट और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 लागू किया, जो 2026 में भी जारी है। Surrogacy Law India 2026 Hindi के तहत अब सरोगेसी केवल अल्ट्रुइस्टिक (निःस्वार्थ) रूप में ही मान्य है और कमर्शियल सरोगेसी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
यह कानून भारतीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है ताकि महिलाओं और बच्चों का शोषण रोका जा सके तथा सरोगेसी को नैतिक और कानूनी ढांचे में रखा जा सके। इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि कौन सरोगेसी कर सकता है, इसके नियम क्या हैं, और पूरी प्रक्रिया कैसे काम करती है।
सरोगेसी क्या है?
सरोगेसी एक आधुनिक चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से वे दंपत्ति जो किसी कारणवश प्राकृतिक रूप से माता-पिता नहीं बन पाते, वे भी अपने बच्चे का सपना पूरा कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में एक महिला, जिसे सरोगेट मदर कहा जाता है, किसी अन्य दंपत्ति (इच्छुक माता-पिता) के लिए गर्भ धारण करती है।
सरोगेसी आमतौर पर उन परिस्थितियों में अपनाई जाती है, जब:
- महिला को गर्भधारण में मेडिकल समस्या होती है
- बार-बार गर्भपात हो रहा हो
- गर्भाशय में कोई जन्मजात असामान्यता या शल्य चिकित्सा के कारण गर्भ धारण करना संभव न हो
- कोई गंभीर स्वास्थ्य स्थिति (जैसे हृदय रोग, मधुमेह या गुर्दे की बीमारी) गर्भधारण को जोखिमपूर्ण बनाती हो
ऐसे मामलों में डॉक्टर IVF (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक की मदद से भ्रूण तैयार करते हैं और उसे सरोगेट मदर के गर्भ में स्थापित करते हैं।
जब बच्चा जन्म लेता है, तो कानूनी प्रक्रिया के अनुसार उसे इच्छुक माता-पिता को सौंप दिया जाता है, और वही उसके वैध अभिभावक होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में मेडिकल, कानूनी और भावनात्मक पहलुओं का विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि सभी पक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
भारत में सरोगेसी से जुड़े नियमों को समझना बहुत जरूरी है, खासकर जब आप "Surrogacy Law India 2026 Hindi: कौन कर सकता है सरोगेसी और कैसे?" जैसे महत्वपूर्ण विषय के बारे में जानकारी ले रहे हों। सही पात्रता, कानूनी प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज़ों की जानकारी के साथ-साथ, सरोगेसी से जुड़ी लागत को समझना भी उतना ही आवश्यक है। ऐसे में भारत में सरोगेसी की लागत और मुंबई में सरोगेसी की लागत जानना आपको बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकता है और पूरी प्रक्रिया को समझने में सहायक होता है।
सरोगेसी के दो मुख्य प्रकार होते हैं:
1. अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी (Altruistic Surrogacy)
इस प्रकार की सरोगेसी में सरोगेट मदर किसी आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि भावनात्मक या पारिवारिक सहयोग के रूप में गर्भ धारण करती है। इसमें उसे केवल मेडिकल खर्च, बीमा और गर्भावस्था से जुड़े आवश्यक खर्च ही दिए जाते हैं। भारत में वर्तमान कानून के अनुसार केवल यही प्रकार की सरोगेसी कानूनी रूप से मान्य है।
2. कमर्शियल सरोगेसी (Commercial Surrogacy)
इस प्रकार में सरोगेट मदर को गर्भ धारण करने के बदले आर्थिक भुगतान किया जाता है। पहले यह कई देशों में प्रचलित था, लेकिन भारत में इसे शोषण और अनैतिक प्रथाओं को रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
इस तरह, सरोगेसी न केवल एक मेडिकल प्रक्रिया है, बल्कि यह उन परिवारों के लिए एक उम्मीद भी है, जो लंबे समय से संतान सुख से वंचित हैं। किसी भी निर्णय से पहले फर्टिलिटी विशेषज्ञ और कानूनी सलाहकार से परामर्श लेना आवश्यक है।
Surrogacy Law India 2026 Hindi: मुख्य नियम
भारत में सरोगेसी को सुरक्षित, पारदर्शी और नैतिक बनाने के लिए सरकार ने सख्त कानून और दिशानिर्देश लागू किए हैं। भारत सरकार द्वारा 2021 में लागू किए गए Surrogacy (Regulation) Act के अनुसार, इन नियमों का मुख्य उद्देश्य सरोगेट मदर के अधिकारों की रक्षा करना, इच्छुक माता-पिता को कानूनी सुरक्षा देना और किसी भी प्रकार के शोषण को रोकना है।
सरोगेसी एक संवेदनशील प्रक्रिया है, इसलिए इसमें मेडिकल, कानूनी और सामाजिक पहलुओं का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। सरकार द्वारा बनाए गए नियम यह सुनिश्चित करते हैं कि सरोगेसी केवल जरूरतमंद दंपत्तियों के लिए ही उपलब्ध हो और इसका दुरुपयोग न हो। इसके साथ ही, सरोगेट मदर की सेहत, सम्मान और अधिकारों का भी पूरा ध्यान रखा जाता है।
प्रमुख बिंदु:
• केवल अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी ही वैध है:
भारत में अब केवल निःस्वार्थ (Altruistic) सरोगेसी को ही कानूनी मान्यता दी गई है। इसका मतलब है कि सरोगेट मदर को गर्भ धारण करने के बदले कोई आर्थिक लाभ या भुगतान नहीं दिया जा सकता, केवल मेडिकल खर्च और आवश्यक देखभाल का खर्च ही उठाया जाता है। इसमें गर्भावस्था बीमा और प्रसवोत्तर देखभाल भी शामिल है।
• कमर्शियल सरोगेसी पूरी तरह प्रतिबंधित है:
सरकार ने कमर्शियल सरोगेसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है ताकि महिलाओं के आर्थिक शोषण को रोका जा सके। पहले कई मामलों में सरोगेसी को व्यवसाय के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसे अब पूरी तरह गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है। इसका उल्लंघन करने पर दंड और कारावास का प्रावधान है।
• सरोगेसी के लिए सरकारी रजिस्ट्रेशन जरूरी है:
सरोगेसी प्रक्रिया शुरू करने से पहले राज्य या केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त उचित प्राधिकारी (Appropriate Authority) से पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य और सरकारी निगरानी में हो।
• मेडिकल और कानूनी अनुमति लेना अनिवार्य है:
सरोगेसी से पहले इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मदर दोनों को मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और कानूनी अनुमति प्राप्त करनी होती है। यह सर्टिफिकेट पंजीकृत मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी किया जाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि सभी पक्ष इस प्रक्रिया के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार और योग्य हैं।
• केवल भारतीय नागरिक ही सरोगेसी कर सकते हैं:
भारत में सरोगेसी केवल भारतीय नागरिकों के लिए ही अनुमति है। विदेशी नागरिकों, NRI, PIO (Persons of Indian Origin), और OCI (Overseas Citizens of India) कार्डधारकों के लिए सरोगेसी पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं, ताकि कानून का दुरुपयोग न हो सके।
• सरोगेट मदर का चयन सीमित है:
सरोगेट मदर केवल निकट रक्त संबंधी (जैसे बहन, सास, भाभी आदि) ही हो सकती है। उसे पहले से कम से कम एक स्वस्थ बच्चा होना चाहिए, विवाहित होना चाहिए और उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। वह केवल एक बार ही सरोगेसी कर सकती है, और उसे अपने स्वयं के अंडे दान करने की अनुमति नहीं है।
इन सभी नियमों का उद्देश्य सरोगेसी प्रक्रिया को सुरक्षित, नैतिक और पारदर्शी बनाना है, ताकि जरूरतमंद दंपत्ति बिना किसी जोखिम के अपने माता-पिता बनने के सपने को पूरा कर सकें। यदि आप सरोगेसी पर विचार कर रहे हैं, तो किसी अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ और कानूनी सलाहकार से विस्तृत परामर्श लें।
कौन कर सकता है सरोगेसी?
सरोगेसी एक संवेदनशील और कानूनी रूप से नियंत्रित प्रक्रिया है, इसलिए इसे करने के लिए सरकार ने कुछ स्पष्ट पात्रता (Eligibility) शर्तें निर्धारित की हैं। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तव में जरूरतमंद और योग्य लोग ही सरोगेसी का लाभ उठा सकें, और इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का दुरुपयोग या शोषण न हो।
सरोगेसी में दो मुख्य पक्ष होते हैं—इच्छुक माता-पिता (Intended Parents) और सरोगेट मदर। दोनों के लिए अलग-अलग पात्रता मानदंड तय किए गए हैं, जिन्हें पूरा करना अनिवार्य होता है।
इच्छुक दंपत्ति के लिए पात्रता शर्तें
सरोगेसी का विकल्प केवल उन विवाहित दंपत्तियों के लिए उपलब्ध है, जो किसी मेडिकल कारण से प्राकृतिक रूप से संतान प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होती हैं:
- भारतीय नागरिक होना जरूरी है:
इच्छुक पति-पत्नी दोनों का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सरोगेसी प्रक्रिया देश के कानूनों के अंतर्गत ही पूरी हो। - विवाह की न्यूनतम अवधि:
दंपत्ति की शादी को कम से कम 5 वर्ष पूरे हो चुके होने चाहिए। यह नियम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि दंपत्ति का रिश्ता स्थिर और परिपक्व हो। - उम्र सीमा:
महिला की उम्र 23 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए, जबकि पुरुष की उम्र 26 से 55 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। यह सीमा इसलिए रखी गई है ताकि माता-पिता बच्चे की परवरिश के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम हों। - मेडिकल कारण से संतान न होना:
सरोगेसी केवल उन्हीं दंपत्तियों के लिए अनुमति है, जो किसी चिकित्सीय समस्या (Infertility या अन्य स्वास्थ्य कारणों) के कारण गर्भधारण नहीं कर पा रहे हों। इसके लिए डॉक्टर द्वारा प्रमाणित मेडिकल सर्टिफिकेट आवश्यक होता है। - कोई जीवित संतान नहीं होनी चाहिए:
दंपत्ति की कोई जीवित जैविक, दत्तक या सरोगेट संतान नहीं होनी चाहिए। यदि उनकी कोई संतान है जो मानसिक या शारीरिक रूप से विकलांग है, तो उस स्थिति में भी सरोगेसी की अनुमति दी जा सकती है, जैसा कि National Health Mission (NHM) द्वारा मान्यता प्राप्त है।
सरोगेट मदर के लिए शर्तें
सरोगेट मदर बनने के लिए भी कुछ महत्वपूर्ण नियम निर्धारित किए गए हैं, ताकि उसकी सेहत और अधिकारों की रक्षा हो सके:
- निकट रिश्तेदार होना अनिवार्य है:
भारत में सरोगेसी विनियमन कानून के अनुसार, सरोगेट मदर इच्छुक दंपत्ति की निकट रिश्तेदार होनी चाहिए। यह परोपकारी (Altruistic) सरोगेसी को बढ़ावा देने और व्यावसायिक सरोगेसी को रोकने के लिए किया गया है। - विवाहित होना अनिवार्य है:
सरोगेट मदर का विवाहित होना जरूरी है, ताकि उसे पारिवारिक और भावनात्मक सहयोग मिल सके। - पहले से एक संतान होना चाहिए:
सरोगेट मदर के पास पहले से कम से कम एक स्वस्थ बच्चा होना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होता है कि वह गर्भावस्था के अनुभव से परिचित है और उसके शरीर में गर्भधारण की क्षमता सिद्ध हो चुकी है। - उम्र सीमा (Age Limit):
सरोगेट मदर की उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यह आयु सीमा इसलिए तय की गई है क्योंकि इस उम्र में गर्भधारण अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। - एक बार ही सरोगेसी की अनुमति:
कानून के अनुसार, कोई भी महिला अपने पूरे जीवनकाल में केवल एक बार ही सरोगेट मदर बन सकती है। यह नियम उसकी शारीरिक और मानसिक सेहत को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है। - स्वास्थ्य संबंधी योग्यता:
सरोगेट मदर को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए। गर्भावस्था से पहले विस्तृत मेडिकल जांच अनिवार्य है, जिसमें संक्रामक रोगों (HIV, हेपेटाइटिस B और C) की स्क्रीनिंग भी शामिल होती है।
इन सभी पात्रता मानदंडों का पालन करना अनिवार्य है और ये नियम भारतीय सरोगेसी विनियमन कानून 2021 के अंतर्गत आते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य सरोगेसी प्रक्रिया को सुरक्षित, नैतिक और पारदर्शी बनाना है, ताकि सभी पक्षों के अधिकारों की रक्षा हो सके और कोई भी व्यक्ति इस प्रक्रिया का गलत फायदा न उठा सके।
महत्वपूर्ण सलाह: यदि आप सरोगेसी पर विचार कर रहे हैं, तो किसी अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श लें, जो आपकी स्थिति का मूल्यांकन करके सही मार्गदर्शन दे सकें।
सरोगेसी की प्रक्रिया कैसे होती है?
सरोगेसी एक चरणबद्ध (Step-by-Step) और सावधानीपूर्वक नियंत्रित प्रक्रिया है, जिसमें मेडिकल, कानूनी और भावनात्मक तीनों पहलुओं का संतुलन बनाए रखा जाता है। यह प्रक्रिया कई महत्वपूर्ण चरणों से होकर गुजरती है, जिनका पालन करना जरूरी होता है ताकि सरोगेट मदर और बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
नीचे सरोगेसी की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया है:
1. प्रारंभिक परामर्श और चयन
- फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श:
इच्छुक दंपत्ति सबसे पहले किसी अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ से मिलते हैं, जो उनकी चिकित्सीय स्थिति का मूल्यांकन करते हैं और सरोगेसी की आवश्यकता की पुष्टि करते हैं। - सरोगेट मदर का चयन:
कानून के अनुसार, सरोगेट मदर इच्छुक दंपत्ति की निकट रिश्तेदार होनी चाहिए। उसकी सहमति और उसके परिवार की स्वीकृति भी आवश्यक होती है।
2. मेडिकल जांच और मूल्यांकन
- इच्छुक दंपत्ति की जांच:
दंपत्ति की व्यापक फर्टिलिटी जांच की जाती है, जिसमें हार्मोन टेस्ट, अंडाणु और शुक्राणु की गुणवत्ता का आकलन शामिल होता है। यह पुष्टि करना आवश्यक है कि वे जैविक माता-पिता बन सकते हैं या नहीं। - सरोगेट मदर की स्वास्थ्य जांच:
सरोगेट मदर की विस्तृत मेडिकल जांच की जाती है, जिसमें शामिल हैं:- सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण (ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल, थायरॉइड)
- संक्रामक रोगों की स्क्रीनिंग (HIV, हेपेटाइटिस B, C, सिफलिस)
- गर्भाशय की जांच (अल्ट्रासाउंड द्वारा)
- हार्मोनल प्रोफाइल
- मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन:
दोनों पक्षों का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन भी किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे इस प्रक्रिया के लिए भावनात्मक रूप से तैयार हैं।
3. कानूनी अनुमति और दस्तावेज़ीकरण
- सरोगेसी बोर्ड से अनुमति:
राज्य सरोगेसी बोर्ड या राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड से औपचारिक अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके लिए सभी आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने होते हैं, जैसे:- विवाह प्रमाण पत्र
- आयु प्रमाण
- भारतीय नागरिकता का प्रमाण
- डॉक्टर का चिकित्सीय प्रमाण पत्र (infertility certificate)
- सरोगेट मदर की सहमति पत्र
- कानूनी समझौता:
इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मदर के बीच एक स्पष्ट कानूनी अनुबंध (Legal Agreement) तैयार किया जाता है। इसमें सभी अधिकार, जिम्मेदारियां, चिकित्सा खर्च, और बीमा कवरेज की शर्तें शामिल होती हैं।
4. IVF प्रक्रिया और भ्रूण स्थानांतरण
- अंडाणु और शुक्राणु का संग्रह:
इच्छुक माता के अंडाशय से परिपक्व अंडाणु (eggs) निकाले जाते हैं और पिता के शुक्राणु (sperm) का सैंपल लिया जाता है। यह प्रक्रिया हार्मोनल इंजेक्शन द्वारा अंडाशय को उत्तेजित करने के बाद की जाती है। - लैब में भ्रूण निर्माण:
IVF प्रक्रिया में अंडाणु और शुक्राणु को लैब में नियंत्रित वातावरण में मिलाया जाता है, जिससे भ्रूण (Embryo) बनता है। इस तकनीक को In Vitro Fertilization कहा जाता है। - भ्रूण का विकास और चयन:
भ्रूण को 3-5 दिनों तक लैब में विकसित होने दिया जाता है। सबसे स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण भ्रूण का चयन किया जाता है। - भ्रूण स्थानांतरण (Embryo Transfer):
चयनित भ्रूण को एक पतली कैथेटर (catheter) की मदद से सरोगेट मदर के गर्भाशय में सावधानीपूर्वक स्थापित किया जाता है। यह एक दर्द रहित प्रक्रिया है और इसमें कुछ मिनट लगते हैं। - गर्भधारण की पुष्टि:
भ्रूण स्थानांतरण के लगभग 10-14 दिनों बाद ब्लड टेस्ट (Beta hCG test) द्वारा गर्भधारण की पुष्टि की जाती है।
5. गर्भावस्था और चिकित्सीय देखभाल
- नियमित प्रसवपूर्व जांच:
गर्भावस्था के दौरान सरोगेट मदर को नियमित रूप से डॉक्टर के पास जाना होता है। इसमें शामिल हैं:- मासिक चेकअप (पहली तिमाही में)
- पाक्षिक चेकअप (दूसरी तिमाही में)
- साप्ताहिक चेकअप (तीसरी तिमाही में)
- अल्ट्रासाउंड स्कैन (भ्रूण के विकास की निगरानी के लिए)
- रक्त और मूत्र परीक्षण
- पोषण और दवाइयां:
सरोगेट मदर को संतुलित पोषण युक्त आहार दिया जाता है और आवश्यक विटामिन (जैसे फोलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम) तथा हार्मोनल दवाइयां (progesterone) दी जाती हैं। - भावनात्मक और मानसिक सहयोग:
गर्भावस्था के दौरान सरोगेट मदर को मानसिक सहयोग भी दिया जाता है। कई केंद्रों में काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध होती है। - चिकित्सा बीमा और खर्च:
सभी चिकित्सीय खर्च, दवाइयां और बीमा कवरेज इच्छुक माता-पिता द्वारा वहन किया जाता है, जैसा कि कानूनी समझौते में निर्धारित होता है।
6. प्रसव और बच्चे का हस्तांतरण
- सुरक्षित प्रसव (Delivery):
डॉक्टरों की निगरानी में सरोगेट मदर का प्रसव कराया जाता है। यह सामान्य प्रसव (Normal Delivery) या सिजेरियन (C-Section) हो सकता है, जो चिकित्सीय स्थिति पर निर्भर करता है। - नवजात की देखभाल:
जन्म के तुरंत बाद बच्चे की स्वास्थ्य जांच की जाती है और आवश्यक चिकित्सीय देखभाल दी जाती है। - कानूनी हस्तांतरण:
जन्म के बाद बच्चे को कानूनी प्रक्रिया के तहत इच्छुक माता-पिता को सौंप दिया जाता है। जन्म प्रमाण पत्र में इच्छुक दंपत्ति का नाम माता-पिता के रूप में दर्ज किया जाता है। - सरोगेट मदर की प्रसवोत्तर देखभाल:
सरोगेट मदर को प्रसव के बाद भी कुछ समय तक चिकित्सीय और भावनात्मक देखभाल प्रदान की जाती है, ताकि वह पूरी तरह स्वस्थ हो सके।
इस प्रकार, सरोगेसी की पूरी प्रक्रिया कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरणों से होकर गुजरती है। हर कदम पर चिकित्सीय सटीकता, कानूनी अनुपालन और भावनात्मक सहयोग की आवश्यकता होती है।
सलाह: सरोगेसी की जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए किसी अनुभवी और मान्यता प्राप्त फर्टिलिटी क्लिनिक का चयन करें, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर और कानूनी सलाहकार उपलब्ध हों।
जरूरी दस्तावेज़
सरोगेसी एक कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रिया होने के कारण इसमें कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों की आवश्यकता होती है। ये दस्तावेज़ यह सुनिश्चित करते हैं कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सुरक्षित और कानून के दायरे में रहकर पूरी की जा रही है।
बिना सही दस्तावेज़ों के सरोगेसी की अनुमति नहीं दी जाती, इसलिए इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मदर दोनों के लिए सभी जरूरी कागजात तैयार रखना बेहद जरूरी होता है। ये सभी दस्तावेज़ संबंधित सरकारी प्राधिकरण द्वारा सत्यापित किए जाते हैं।
आवश्यक दस्तावेज़:
- विवाह प्रमाण पत्र:
इच्छुक दंपत्ति के लिए यह साबित करना जरूरी होता है कि वे कानूनी रूप से विवाहित हैं। विवाह प्रमाण पत्र इस बात का प्रमाण होता है कि उनका रिश्ता वैध है और वे सरोगेसी के लिए पात्र हैं। कानून के अनुसार, दंपत्ति को कम से कम पांच वर्षों से विवाहित होना आवश्यक है। - मेडिकल सर्टिफिकेट:
सरोगेसी केवल उन्हीं दंपत्तियों के लिए अनुमति है जो किसी चिकित्सकीय कारण से संतान प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए पंजीकृत चिकित्सक द्वारा जारी मेडिकल सर्टिफिकेट आवश्यक होता है, जिसमें उनकी स्वास्थ्य स्थिति और गर्भधारण में आने वाली समस्याओं का उल्लेख होता है। - पहचान पत्र:
इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मदर दोनों के लिए वैध पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड और पैन कार्ड जरूरी होते हैं। यह दस्तावेज़ उनकी पहचान और भारतीय नागरिकता को प्रमाणित करते हैं। - सरोगेट मदर की सहमति पत्र:
सरोगेट मदर की लिखित सहमति अनिवार्य होती है, जिसमें यह स्पष्ट होता है कि वह अपनी इच्छा से इस प्रक्रिया में शामिल हो रही है और उसे सभी शर्तों की जानकारी है। यह दस्तावेज़ उसकी सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करता है। सहमति मजिस्ट्रेट के समक्ष नोटरीकृत होनी चाहिए। - उचित प्राधिकरण से अनुमति:
सरोगेसी प्रक्रिया शुरू करने से पहले Surrogacy Regulation Board या संबंधित प्राधिकरण से अनुमति लेना जरूरी होता है। यह सुनिश्चित करता है कि पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है और सभी नियमों का पालन किया जा रहा है। - बीमा पॉलिसी:
सरोगेट मदर के लिए 36 महीने की अवधि के लिए व्यापक बीमा पॉलिसी लेना अनिवार्य होता है। यह गर्भावस्था के दौरान या बाद में किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में उसे आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। - आयु का प्रमाण:
इच्छुक माता की आयु 25-50 वर्ष और पिता की आयु 26-55 वर्ष के बीच होने का प्रमाण आवश्यक है। सरोगेट मदर की आयु 25-35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। - सरोगेट मदर की पिछली प्रसव रिपोर्ट:
सरोगेट मदर के पास अपने स्वयं के स्वस्थ जैविक बच्चे होने का प्रमाण होना आवश्यक है, जिसमें पिछले प्रसव की चिकित्सकीय रिपोर्ट शामिल होती है।
इन सभी दस्तावेज़ों का सही और पूर्ण होना सरोगेसी प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए बेहद आवश्यक है। यदि आपको दस्तावेज़ तैयारी में सहायता की आवश्यकता है, तो किसी अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श करें। वे पूरी प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर सकते हैं।
सरोगेसी में कानूनी अधिकार
सरोगेसी एक संवेदनशील और जिम्मेदारी भरी प्रक्रिया है, इसलिए इसमें शामिल सभी पक्षों—सरोगेट मदर और इच्छुक माता-पिता—के अधिकारों की सुरक्षा करना बेहद जरूरी होता है।
भारत में Surrogacy (Regulation) Act, 2021 यह सुनिश्चित करता है कि इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय, शोषण या भेदभाव न हो। सरोगेसी से जुड़े सभी कानूनी अधिकार स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सुरक्षित और संतुलित तरीके से पूरी हो सके।
सरोगेट मदर के अधिकार:
- पूरा मेडिकल खर्च उठाया जाएगा:
सरोगेट मदर को गर्भावस्था से जुड़े सभी चिकित्सकीय खर्च—जैसे नियमित जांच, दवाइयां, अस्पताल खर्च, डिलीवरी और प्रसव के बाद की देखभाल—इच्छुक माता-पिता द्वारा दिए जाते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि उसे किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ न उठाना पड़े। - स्वास्थ्य और सुरक्षा का विशेष ध्यान:
सरोगेट मदर की शारीरिक और मानसिक सेहत की पूरी जिम्मेदारी ली जाती है। नियमित प्रसवपूर्व जांच, संतुलित पोषण, और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि गर्भावस्था सुरक्षित तरीके से पूरी हो सके। - शोषण से सुरक्षा:
कानून यह सुनिश्चित करता है कि सरोगेट मदर के साथ किसी भी प्रकार का शोषण, दबाव या व्यावसायिक लेनदेन न हो। वाणिज्यिक सरोगेसी पूर्णतः प्रतिबंधित है। सरोगेट मदर को पूरी स्वतंत्रता होती है और उसकी सहमति के बिना कोई भी निर्णय नहीं लिया जा सकता। - बीमा और सुरक्षा कवरेज:
सरोगेट मदर के लिए 36 महीने की अवधि की व्यापक बीमा पॉलिसी अनिवार्य होती है। यह गर्भावस्था के दौरान या बाद में किसी भी स्वास्थ्य जटिलता की स्थिति में उसे पूर्ण आर्थिक सहायता और चिकित्सा कवरेज प्रदान करती है। - गोपनीयता का अधिकार:
सरोगेट मदर की निजी जानकारी की गोपनीयता बनाए रखी जाती है। उसकी पहचान और व्यक्तिगत विवरण सुरक्षित रहते हैं। - कानूनी सहायता और परामर्श:
सरोगेट मदर को कानूनी सलाह लेने का पूरा अधिकार है, ताकि वह अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को ठीक से समझ सके।
इच्छुक माता-पिता के अधिकार:
- बच्चे पर पूर्ण कानूनी अधिकार:
बच्चे के जन्म के तुरंत बाद इच्छुक माता-पिता को उस पर पूर्ण कानूनी अधिकार मिल जाता है। वही बच्चे के वैध और एकमात्र माता-पिता माने जाते हैं। यह अधिकार जन्म प्रमाण पत्र में भी दर्ज किया जाता है। - जन्म के बाद कस्टडी:
बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसकी कस्टडी इच्छुक माता-पिता को सौंप दी जाती है। सरोगेट मदर का बच्चे पर कोई कानूनी अधिकार नहीं होता और न ही वह भविष्य में कोई दावा कर सकती है। - कानूनी दस्तावेज़ उनके नाम पर:
बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र और अन्य सभी आवश्यक दस्तावेज़ इच्छुक माता-पिता के नाम पर जारी किए जाते हैं। इन दस्तावेज़ों में सरोगेट मदर का नाम नहीं होता, जिससे उनकी अभिभावकता कानूनी रूप से प्रमाणित हो जाती है। - कानूनी सुरक्षा और स्पष्टता:
इच्छुक माता-पिता को यह अधिकार होता है कि पूरी सरोगेसी प्रक्रिया कानून के अनुसार पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से पूरी हो। किसी भी विवाद या जटिलता की स्थिति में उन्हें कानूनी संरक्षण मिलता है। - चिकित्सकीय निर्णयों में भागीदारी:
इच्छुक माता-पिता को गर्भावस्था से संबंधित महत्वपूर्ण चिकित्सकीय निर्णयों में शामिल होने का अधिकार है, जैसे प्रसव की विधि या आपातकालीन स्थिति में उपचार।
इन सभी अधिकारों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरोगेसी प्रक्रिया में शामिल हर व्यक्ति सुरक्षित, सम्मानित और कानूनी रूप से संरक्षित महसूस करे। यदि आपके मन में सरोगेसी से जुड़े अधिकारों के बारे में कोई प्रश्न है, तो किसी अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ या कानूनी सलाहकार से संपर्क करें। ये सभी प्रावधान Surrogacy (Regulation) Act, 2021 के अंतर्गत आते हैं, जो इस प्रक्रिया को नैतिक और कानूनी रूप से संतुलित बनाते हैं।
दंपत्तियों के लिए सरोगेसी नियम
भारत में सरोगेसी को लेकर दंपत्तियों के लिए स्पष्ट और सख्त नियम बनाए गए हैं, ताकि इस प्रक्रिया का उपयोग केवल वास्तविक जरूरत के मामलों में ही किया जाए और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोका जा सके। ये नियम न केवल कानूनी स्पष्टता प्रदान करते हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि सरोगेसी एक सुरक्षित और नैतिक प्रक्रिया बनी रहे।
सरकार द्वारा निर्धारित ये दिशानिर्देश दंपत्तियों की पात्रता, उनकी जिम्मेदारियों और उनके अधिकारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके।
महत्वपूर्ण नियम:
केवल विवाहित दंपत्ति ही सरोगेसी कर सकते हैं:
भारत में सरोगेसी का अधिकार केवल कानूनी रूप से विवाहित पति-पत्नी को ही दिया गया है। यह नियम परिवार की स्थिरता और बच्चे के सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। Surrogacy (Regulation) Act 2021 के अनुसार, विवाहित दंपत्ति के पास विवाह प्रमाण पत्र होना आवश्यक है।
सिंगल पेरेंट्स के लिए सीमित अनुमति:
सिंगल पेरेंट्स के लिए सरोगेसी के नियम काफी सीमित और सख्त हैं। अधिकांश मामलों में उन्हें सरोगेसी की अनुमति नहीं दी जाती, और यदि दी भी जाती है तो विशेष शर्तों और चिकित्सीय प्रमाणपत्र के साथ। अविवाहित व्यक्तियों को सरोगेसी का विकल्प वर्तमान कानून में उपलब्ध नहीं है।
LGBTQ+ समुदाय के लिए नियम स्पष्ट नहीं:
वर्तमान समय में LGBTQ+ समुदाय के लिए सरोगेसी से जुड़े नियम पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। विवाह की कानूनी परिभाषा के कारण इस समुदाय के सदस्यों को सरोगेसी की अनुमति प्राप्त करने में कठिनाई होती है। इस विषय पर अभी भी कानूनी और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी है।
विदेशी नागरिकों के लिए प्रतिबंध:
भारत में विदेशी नागरिकों और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (NRI/OCI) के लिए सरोगेसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। यह कदम सरोगेसी के व्यावसायीकरण और दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है। केवल भारतीय नागरिक ही कानूनी सरोगेसी प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।
ये सभी नियम surrogacy law india for couples hindi के अंतर्गत आते हैं, जो दंपत्तियों के लिए सरोगेसी को सुरक्षित और नियंत्रित बनाते हैं। किसी भी प्रश्न या विशिष्ट स्थिति के लिए प्रजनन विशेषज्ञ से परामर्श करना जरूरी है।
सरोगेसी के फायदे
सरोगेसी उन दंपत्तियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आती है, जो लंबे समय से संतान प्राप्ति के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह प्रक्रिया न केवल उन्हें माता-पिता बनने का अवसर देती है, बल्कि उनके जीवन में खुशियां भी लाती है।
फायदे:
जैविक बच्चा पाने का अवसर:
सरोगेसी के माध्यम से दंपत्ति अपने ही जेनेटिक मटेरियल (अंडाणु और शुक्राणु) से बच्चे को जन्म दे सकते हैं, जिससे उनका बच्चे से जैविक संबंध बना रहता है। IVF तकनीक का उपयोग करके भ्रूण तैयार किया जाता है और सरोगेट मदर के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है।
मेडिकल रूप से सुरक्षित प्रक्रिया:
आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में सरोगेसी एक सुरक्षित प्रक्रिया मानी जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सहायक प्रजनन तकनीकों में नियमित चिकित्सीय निगरानी से जोखिम को कम किया जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है।
कानूनी सुरक्षा:
सरोगेसी कानून के तहत पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से संरक्षित होती है, जिससे इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मदर दोनों के अधिकार सुरक्षित रहते हैं। सभी पक्षों के बीच कानूनी समझौता किया जाता है, जो दस्तावेज़ों और अधिकारों को स्पष्ट करता है।
चिकित्सीय असमर्थता का समाधान:
जिन महिलाओं को गर्भाशय की समस्या, बार-बार गर्भपात, या अन्य चिकित्सीय स्थितियां हैं, उनके लिए सरोगेसी एक प्रभावी विकल्प है। यह उन दंपत्तियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो स्वाभाविक गर्भधारण में असमर्थ हैं।
परिवार को पूरा करने का अवसर:
जो दंपत्ति किसी कारणवश माता-पिता नहीं बन पाते, उनके लिए सरोगेसी परिवार को पूरा करने और जीवन में खुशियां लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनती है। यह भावनात्मक संतुष्टि और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य में सुधार लाती है।
सरोगेसी के नुकसान
जहां सरोगेसी के कई फायदे हैं, वहीं इसके कुछ चुनौतियां और नुकसान भी हो सकते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है ताकि दंपत्ति सही निर्णय ले सकें।
नुकसान:
भावनात्मक चुनौतियां:
सरोगेसी प्रक्रिया के दौरान और बाद में भावनात्मक उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। सरोगेट मदर और इच्छुक माता-पिता दोनों के लिए यह एक संवेदनशील अनुभव हो सकता है। बच्चे के जन्म के बाद अलगाव की भावना, चिंता या तनाव हो सकता है। मनोवैज्ञानिक परामर्श इस स्थिति में सहायक हो सकता है।
कानूनी जटिलताएं:
हालांकि कानून स्पष्ट हैं, फिर भी दस्तावेज़ों, रजिस्ट्रेशन, अनुमति और प्रक्रियाओं को पूरा करने में जटिलताएं आ सकती हैं, जो समय और मेहनत मांगती हैं। सभी कागजात और कानूनी प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी है।
समय लेने वाली प्रक्रिया:
सरोगेसी एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें मेडिकल जांच, कानूनी अनुमति, IVF प्रक्रिया और गर्भावस्था का पूरा समय (9 महीने) शामिल होता है। कुल मिलाकर पूरी प्रक्रिया में 12-18 महीने या अधिक समय लग सकता है। इसलिए इसमें धैर्य रखना जरूरी होता है।
मेडिकल जोखिम:
हर गर्भावस्था में कुछ चिकित्सीय जोखिम होते हैं, जैसे प्री-एक्लेम्पसिया, गर्भकालीन मधुमेह या प्रसव संबंधी जटिलताएं। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट (ACOG) के अनुसार, सरोगेट गर्भावस्था में नियमित प्रसवपूर्व देखभाल और निगरानी आवश्यक है।
खर्च:
हालांकि भारत में कमर्शियल सरोगेसी प्रतिबंधित है, फिर भी मेडिकल जांच, IVF प्रक्रिया, दवाइयां, बीमा, कानूनी खर्च और सरोगेट मदर के आवश्यक खर्च होते हैं, जो दंपत्तियों के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। पूरी प्रक्रिया में लाखों रुपये का खर्च आ सकता है।
सामाजिक और पारिवारिक दबाव:
कुछ मामलों में समाज या परिवार की सोच, कलंक या गलतफहमी के कारण दंपत्तियों को मानसिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है, जो इस प्रक्रिया को और जटिल बना सकता है।
इस प्रकार, सरोगेसी के फायदे और नुकसान दोनों को समझकर ही दंपत्तियों को निर्णय लेना चाहिए। प्रजनन विशेषज्ञ और कानूनी सलाहकार से विस्तृत परामर्श लेना महत्वपूर्ण है, ताकि वे इस महत्वपूर्ण यात्रा को सही दिशा में आगे बढ़ा सकें।
2026 के कानून में क्या बदलाव हुए?
सरोगेसी को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और नैतिक बनाने के उद्देश्य से सरकार ने समय-समय पर कानूनों में बदलाव किए हैं। 2026 के अपडेटेड नियमों में खास तौर पर महिलाओं की सुरक्षा, प्रक्रिया की पारदर्शिता और कानूनी नियंत्रण को और मजबूत किया गया है।
इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरोगेसी केवल जरूरतमंद दंपत्तियों तक सीमित रहे और इसका किसी भी प्रकार से व्यावसायीकरण या दुरुपयोग न हो। सरकार ने इन संशोधनों के माध्यम से यह भी सुनिश्चित किया है कि सरोगेट मदर के अधिकारों की पूरी तरह रक्षा हो और इच्छुक माता-पिता को भी स्पष्ट कानूनी ढांचा मिले।
प्रमुख बदलाव:
कमर्शियल सरोगेसी पर सख्त प्रतिबंध:
अब किसी भी प्रकार की व्यावसायिक सरोगेसी पूरी तरह गैरकानूनी है। इसका उद्देश्य महिलाओं के आर्थिक शोषण को रोकना और सरोगेसी को केवल सामाजिक एवं मानवीय आधार पर सीमित करना है। कमर्शियल सरोगेसी करने पर 10 वर्ष तक की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
केवल निःस्वार्थ सरोगेसी की अनुमति:
सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल अल्ट्रुइस्टिक (निःस्वार्थ) सरोगेसी ही वैध होगी, जिसमें सरोगेट मदर को कोई आर्थिक लाभ या भुगतान नहीं दिया जाएगा। केवल मेडिकल खर्च, बीमा, पोषण और आवश्यक खर्च ही वहन किए जा सकते हैं।
सख्त पात्रता नियम लागू:
इच्छुक माता-पिता (विवाहित दंपत्ति) और सरोगेट मदर दोनों के लिए पात्रता मानदंडों को और सख्त बनाया गया है। उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, चिकित्सीय प्रमाणपत्र और संबंध (सरोगेट का करीबी रिश्तेदार होना) की शर्तें स्पष्ट हैं, ताकि केवल योग्य और जरूरतमंद लोग ही इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें।
सरकारी निगरानी में वृद्धि:
सरोगेसी प्रक्रिया पर अब पहले से ज्यादा सरकारी नियंत्रण और निगरानी रखी जा रही है। नेशनल सरोगेसी बोर्ड और स्टेट सरोगेसी बोर्ड का गठन किया गया है। रजिस्ट्रेशन, अनुमति प्रमाणपत्र (Eligibility Certificate और Essentiality Certificate) और दस्तावेज़ों की जांच को अनिवार्य बनाया गया है।
सरोगेट मदर के अधिकारों की सुरक्षा:
नए नियमों में सरोगेट मदर की स्वास्थ्य सुरक्षा, 36 महीने का व्यापक बीमा कवर, मेडिकल सुविधाएं और कानूनी अधिकारों को प्राथमिकता दी गई है। गर्भावस्था के दौरान और बाद में (प्रसव के बाद 16 सप्ताह तक) उसे किसी भी प्रकार की परेशानी या शोषण का सामना न करना पड़े, इसके लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं।
तकनीकी और चिकित्सीय मानकों में सुधार:
सरोगेसी सेवा प्रदान करने वाले क्लिनिक और अस्पतालों के लिए सख्त रजिस्ट्रेशन और मानक तय किए गए हैं। केवल पंजीकृत और अधिकृत ART क्लिनिक ही सरोगेसी प्रक्रिया कर सकते हैं।
किसी भी स्पष्टीकरण या विशिष्ट स्थिति के लिए अनुभवी प्रजनन विशेषज्ञ और कानूनी सलाहकार से संपर्क करना आवश्यक है।
सरोगेसी से जुड़े मिथक और सच्चाई
सरोगेसी को लेकर समाज में कई तरह की गलतफहमियां (Myths) फैली हुई हैं। इन मिथकों के कारण लोग अक्सर भ्रमित हो जाते हैं और सही जानकारी नहीं मिल पाती। इसलिए जरूरी है कि हम इन मिथकों और सच्चाइयों को स्पष्ट रूप से समझें।
मिथक:
- सरोगेसी पूरी तरह अवैध है:
कई लोग मानते हैं कि भारत में सरोगेसी गैरकानूनी है, जबकि यह पूरी तरह सही नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सहायक प्रजनन तकनीकें (ART) वैध चिकित्सा प्रक्रियाएं हैं, बशर्ते वे राष्ट्रीय कानून के अनुसार हों। - कोई भी व्यक्ति सरोगेसी कर सकता है:
यह भी एक आम गलतफहमी है कि सरोगेसी हर किसी के लिए उपलब्ध है, जबकि इसके लिए सख्त पात्रता नियम होते हैं। - सरोगेट मां बच्चे की कानूनी मां होती है:
कुछ लोग सोचते हैं कि सरोगेट मां को बच्चे पर कानूनी अधिकार मिलता है, लेकिन भारतीय कानून में इच्छुक दंपत्ति को ही बच्चे के माता-पिता माना जाता है। - सरोगेसी में पैसे का लेन-देन होता है:
सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 के तहत, भारत में केवल परोपकारी सरोगेसी (Altruistic Surrogacy) की अनुमति है, व्यावसायिक सरोगेसी प्रतिबंधित है।
सच्चाई:
- सरोगेसी भारत में कानूनी है (नियमों के तहत):
भारत में सरोगेसी पूरी तरह कानूनी है, लेकिन इसे केवल निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत ही किया जा सकता है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार, कानूनी ढांचा सरोगेट और इच्छुक माता-पिता दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। - केवल पात्र व्यक्ति ही सरोगेसी कर सकते हैं:
सरोगेसी का लाभ केवल उन्हीं दंपत्तियों को मिलता है, जो कानून द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं। विवाहित भारतीय दंपत्ति जिनमें चिकित्सीय आवश्यकता सिद्ध हो, वही इसके पात्र हैं। - सरोगेसी एक नियंत्रित प्रक्रिया है:
यह प्रक्रिया सरकार की निगरानी में होती है, जिससे पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है। केवल पंजीकृत ART क्लिनिक ही सरोगेसी प्रक्रिया करा सकते हैं। - सरोगेट मां का भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है:
कानून के अनुसार, सरोगेट मां की चिकित्सीय और मानसिक जांच अनिवार्य है, और उसे पूरी प्रक्रिया के दौरान चिकित्सा सुविधा और सहायता प्रदान की जाती है।
यदि आप "Surrogacy Law India 2026 Hindi: कौन कर सकता है सरोगेसी और कैसे?" के बारे में जानकारी ले रहे हैं और प्राकृतिक रूप से गर्भधारण में कठिनाई का सामना कर रहे हैं, तो IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) प्रक्रिया सरोगेसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। सरोगेसी में अक्सर IVF तकनीक का उपयोग भ्रूण तैयार करने के लिए किया जाता है, इसलिए इसके बारे में सही जानकारी होना जरूरी है। ऐसे में, सही क्लिनिक का चयन करने के साथ-साथ दिल्ली में IVF की लागत और रांची में IVF की लागत की जानकारी लेना आपको पूरी प्रक्रिया को बेहतर समझने और सरोगेसी के लिए सही निर्णय लेने में मदद करता है।
सरोगेसी में सावधानियां
सरोगेसी एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय है, इसलिए इसमें सही जानकारी और सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। यदि सही तरीके से तैयारी की जाए, तो यह प्रक्रिया सुरक्षित और सफल हो सकती है।
जरूरी सावधानियां:
- केवल मान्यता प्राप्त क्लिनिक का चयन करें:
हमेशा ऐसे क्लिनिक या अस्पताल का चयन करें जो सरकारी मान्यता प्राप्त हो और जहां अनुभवी डॉक्टर उपलब्ध हों। NCBI के अनुसार, पंजीकृत ART क्लिनिक में ही सरोगेसी प्रक्रिया करानी चाहिए, जो सभी चिकित्सीय और कानूनी मानकों का पालन करते हैं। - सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करें:
सरोगेसी से पहले सभी जरूरी कानूनी अनुमति और दस्तावेज़ पूरे करना अनिवार्य है। इसमें सरोगेट मदर से लिखित सहमति, चिकित्सीय और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन रिपोर्ट, और पात्रता प्रमाण पत्र शामिल हैं। किसी भी नियम को नजरअंदाज करना भविष्य में समस्या पैदा कर सकता है। - विशेषज्ञों की सलाह लें:
डॉक्टर, वकील और काउंसलर से सलाह लेना बेहद जरूरी है, ताकि आप पूरी प्रक्रिया को सही तरीके से समझ सकें और कोई भी गलत निर्णय न लें। चिकित्सीय, कानूनी और भावनात्मक सभी पहलुओं पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन आवश्यक है। - सरोगेट मां की स्वास्थ्य जांच करवाएं:
सरोगेट मां की पूरी चिकित्सीय जांच, जिसमें रक्त परीक्षण, संक्रमण जांच, और मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन शामिल है, अनिवार्य है। यह सुनिश्चित करता है कि गर्भावस्था सुरक्षित और स्वस्थ रहे। - सभी दस्तावेज़ सुरक्षित रखें:
सरोगेसी से जुड़े सभी दस्तावेज़ों को सुरक्षित रखना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि भविष्य में कानूनी या प्रशासनिक जरूरत पड़ सकती है। इसमें समझौता पत्र, चिकित्सा रिपोर्ट, बीमा कागजात और पंजीकरण प्रमाण शामिल हैं। - भावनात्मक और मानसिक तैयारी करें:
सरोगेसी केवल शारीरिक नहीं बल्कि भावनात्मक प्रक्रिया भी है, इसलिए मानसिक रूप से तैयार रहना जरूरी है। मेयो क्लिनिक के अनुसार, पेशेवर काउंसलिंग इस यात्रा को सरल और सकारात्मक बनाने में मदद करती है। - बीमा और वित्तीय योजना बनाएं:
सरोगेसी प्रक्रिया में चिकित्सा खर्च और अन्य लागतें आती हैं। पहले से बीमा और वित्तीय योजना बनाना समझदारी है।
इन सभी बातों को ध्यान में रखकर सरोगेसी की प्रक्रिया को सुरक्षित, सफल और सकारात्मक अनुभव बनाया जा सकता है। किसी भी संदेह या जटिलता के लिए तुरंत अपने चिकित्सक से परामर्श लें।
निष्कर्ष
सरोगेसी एक अत्यंत संवेदनशील, जिम्मेदारीपूर्ण और जीवन बदल देने वाली प्रक्रिया है, जो उन दंपत्तियों के लिए आशा की नई किरण बनकर आती है, जो किसी कारणवश प्राकृतिक रूप से माता-पिता नहीं बन पाते। यह प्रक्रिया मेडिकल तकनीक की मदद से संभव होती है, लेकिन इसके साथ कई कानूनी, सामाजिक और भावनात्मक पहलू भी जुड़े होते हैं, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है।
भारत में Surrogacy (Regulation) Act, 2021 के तहत बनाए गए नियमों का मुख्य उद्देश्य इस प्रक्रिया को सुरक्षित, पारदर्शी और नैतिक बनाना है। ये कानून न केवल सरोगेट मदर के अधिकारों और स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं, बल्कि इच्छुक माता-पिता को भी कानूनी सुरक्षा और स्पष्टता प्रदान करते हैं। सख्त पात्रता मानदंड, दस्तावेज़ों की अनिवार्यता और सरकारी निगरानी यह सुनिश्चित करती है कि सरोगेसी का दुरुपयोग न हो और यह केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक सीमित रहे।
यदि आप सरोगेसी के बारे में सोच रहे हैं, तो यह बेहद जरूरी है कि आप इसके सभी पहलुओं को अच्छी तरह समझें:
- मेडिकल प्रक्रिया और IVF प्रोटोकॉल
- कानूनी नियम और पात्रता शर्तें
- आवश्यक दस्तावेज़ और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
- संभावित चुनौतियाँ और जोखिम
- मानसिक और भावनात्मक तैयारी
बिना पूरी जानकारी के इस प्रक्रिया में आगे बढ़ना भविष्य में जटिलताओं का कारण बन सकता है। इसलिए विशेषज्ञ डॉक्टरों, कानूनी सलाहकारों और अनुभवी काउंसलर्स से मार्गदर्शन लेना एक समझदारी भरा कदम होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बांझपन से प्रभावित दंपत्तियों के लिए उचित चिकित्सा परामर्श और मानसिक सहयोग दोनों आवश्यक हैं।
सरोगेसी केवल एक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक भावनात्मक यात्रा भी है, जिसमें धैर्य, समझ और सही निर्णय लेने की आवश्यकता होती है। सही जानकारी और तैयारी के साथ यह अनुभव सकारात्मक और सफल बनाया जा सकता है। सरकारी और प्रमाणित मेडिकल संस्थानों से परामर्श लें और प्रत्येक कदम को सावधानीपूर्वक उठाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. सरोगेसी क्या है?
सरोगेसी एक प्रक्रिया है जिसमें एक महिला किसी अन्य दंपत्ति के लिए गर्भ धारण करती है। WHO के अनुसार, यह सहायक प्रजनन तकनीक (ART) का एक रूप है।
2. भारत में सरोगेसी कानून क्या है?
भारत में सरोगेसी को Surrogacy (Regulation) Act, 2021 के तहत नियंत्रित किया जाता है, जो केवल अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी की अनुमति देता है।
3. क्या भारत में सरोगेसी कानूनी है?
हाँ, भारत में केवल अल्ट्रुइस्टिक (altruistic) सरोगेसी कानूनी है, जिसमें कोई वाणिज्यिक लेनदेन नहीं होता। भारतीय कानून कमर्शियल सरोगेसी पर रोक लगाता है।
4. कमर्शियल सरोगेसी क्या है?
कमर्शियल सरोगेसी में सरोगेट मदर को मेडिकल खर्च के अलावा आर्थिक भुगतान किया जाता है, जो भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित है।
5. अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी क्या है?
इसमें केवल गर्भावस्था से जुड़े मेडिकल और बीमा खर्च दिए जाते हैं, कोई मुनाफा या भुगतान नहीं होता।
6. कौन सरोगेसी करा सकता है?
केवल पात्र विवाहित भारतीय दंपत्ति जिनके पास चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित बांझपन (infertility) का सबूत हो, सरोगेसी करा सकते हैं।
7. क्या सिंगल व्यक्ति सरोगेसी कर सकता है?
सिंगल महिला (विधवा या तलाकशुदा) विशेष परिस्थितियों में अनुमति प्राप्त कर सकती है, लेकिन सिंगल पुरुष के लिए यह संभव नहीं है।
8. सरोगेट मदर कौन बन सकती है?
कानून के अनुसार, सरोगेट मदर विवाहित महिला होनी चाहिए, जिसका पहले से कम से कम एक जीवित बच्चा हो और जो इच्छुक दंपत्ति की करीबी रिश्तेदार हो।
9. सरोगेट मदर की उम्र क्या होनी चाहिए?
सरोगेट मदर की आयु 25 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
10. सरोगेसी के लिए शादी की अवधि कितनी होनी चाहिए?
इच्छुक दंपत्ति की विवाह अवधि कम से कम 5 साल होनी चाहिए।
11. क्या विदेशी नागरिक भारत में सरोगेसी कर सकते हैं?
नहीं, भारतीय सरोगेसी कानून केवल भारतीय नागरिकों के लिए सरोगेसी की अनुमति देता है।
12. सरोगेसी के लिए कौन से दस्तावेज़ जरूरी हैं?
विवाह प्रमाण पत्र, मेडिकल सर्टिफिकेट (बांझपन का प्रमाण), पहचान पत्र, आयु प्रमाण और निवास प्रमाण पत्र जरूरी हैं।
13. क्या सरोगेसी के लिए मेडिकल प्रमाण जरूरी है?
हाँ, किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सक से बांझपन (infertility) का प्रमाण पत्र आवश्यक है।
14. सरोगेसी प्रक्रिया कैसे होती है?
IVF (In Vitro Fertilization) के माध्यम से इच्छुक दंपत्ति के अंडाणु और शुक्राणु से भ्रूण तैयार किया जाता है, जिसे सरोगेट मदर के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। WHO इस प्रक्रिया को सहायक प्रजनन तकनीक मानता है।
15. क्या सरोगेसी में बीमा जरूरी है?
हाँ, सरोगेट मदर के स्वास्थ्य और प्रसव से जुड़ी सभी जटिलताओं के लिए बीमा कवर अनिवार्य है।
16. क्या सरोगेट मदर को भुगतान मिलता है?
केवल मेडिकल खर्च, बीमा, और गर्भावस्था से जुड़े उचित खर्च दिए जाते हैं। कोई वाणिज्यिक भुगतान नहीं होता।
17. सरोगेसी में बच्चे का कानूनी अधिकार किसका होता है?
जन्म से ही बच्चे का पूर्ण कानूनी अधिकार इच्छुक माता-पिता का होता है।
18. क्या सरोगेट मदर बच्चे पर दावा कर सकती है?
नहीं, कानून के अनुसार सरोगेट मदर का बच्चे पर कोई कानूनी अधिकार नहीं होता।
19. क्या सरोगेसी सुरक्षित है?
हाँ, उचित चिकित्सा निगरानी, नियमित जांच और मान्यता प्राप्त क्लिनिक में की जाने वाली सरोगेसी सुरक्षित प्रक्रिया है।
20. सरोगेसी के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है?
हाँ, सरोगेसी बोर्ड और संबंधित सरकारी प्राधिकरण में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
21. क्या LGBTQ+ समुदाय सरोगेसी कर सकता है?
भारतीय सरोगेसी कानून वर्तमान में केवल विवाहित विषमलिंगी दंपत्तियों के लिए है। LGBTQ+ जोड़ों के लिए स्पष्ट प्रावधान अभी नहीं है।
22. सरोगेसी में कितना समय लगता है?
पूरी प्रक्रिया में—पात्रता जांच, दस्तावेज़ीकरण, IVF, गर्भावस्था और प्रसव—लगभग 1.5 से 2 साल तक लग सकते हैं।
23. क्या सरोगेसी में कोर्ट की अनुमति जरूरी है?
सरोगेसी बोर्ड से अनुमति अनिवार्य है, और कुछ मामलों में कोर्ट की मंजूरी की भी आवश्यकता हो सकती है।
24. क्या सरोगेसी में काउंसलिंग जरूरी है?
हाँ, दोनों पक्षों (इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मदर) के लिए मानसिक, कानूनी और मेडिकल काउंसलिंग आवश्यक है।
25. क्या सरोगेट मदर एक से अधिक बार सरोगेसी कर सकती है?
नहीं, कानून के अनुसार एक महिला अपने जीवनकाल में केवल एक बार सरोगेट मदर बन सकती है।
26. सरोगेसी के लिए कौन से क्लिनिक चुनें?
केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त और रजिस्टर्ड ART क्लिनिक चुनना चाहिए।
27. क्या सरोगेसी में जोखिम होता है?
जैसे किसी भी गर्भावस्था में, सरोगेसी में भी कुछ मेडिकल जोखिम हो सकते हैं—जैसे गर्भावस्था की जटिलताएं, प्रसव संबंधी समस्याएं। उचित चिकित्सा देखभाल इन्हें कम करती है।
28. सरोगेसी में खर्च कितना होता है?
अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी में केवल मेडिकल, बीमा और कानूनी खर्च शामिल होते हैं, जो क्लिनिक और शहर के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।
29. क्या सरोगेसी में गोपनीयता रखी जाती है?
हाँ, सभी मेडिकल और व्यक्तिगत जानकारी पूरी गोपनीयता के साथ सुरक्षित रखी जाती है।
30. सरोगेसी के लिए सही सलाह कहाँ से लें?
सरकारी प्रमाणित मेडिकल संस्थानों, अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञों और कानूनी सलाहकारों से परामर्श लें। किसी भी निर्णय से पहले पूरी जानकारी प्राप्त करें।
Sources & References
- The Surrogacy (Regulation) Act, 2021 — Government of India
- Indian Council of Medical Research (ICMR) — National ART & Surrogacy Registry
- NABL — National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories
- World Health Organization (WHO) — Infertility clinical guidance
- PubMed — Peer-reviewed fertility research (NIH/NLM)
All external sources link to primary government, medical, or peer-reviewed material. This article is reviewed by a qualified fertility specialist and updated as clinical guidance changes.